अनुपम उपमा : बड़ी आई श्रीदेवी!

ज्यादा श्रीदेवी मत बनो!
अपने आप को श्रीदेवी समझती हो क्या!
अरे यार! बहुत सुंदर है, एकदम श्रीदेविया टाइप!
सिरिदेवी हो क्या!

पहली-पहली याद है, लालजी मामा की शादी की. हमउम्र बहनें, मौसियाँ सारे बच्चे खूब खेलते उधम मचाते. और सब के बीच चर्चा का विषय नगीना और श्रीदेवी. सर पर हाथों से साँप का फन बना कर मैं तेरी दुश्मन, दुश्मन तू मेरा गाना गाना और नाचना. जो ये सिनेमा देख चुके थे वो भावभंगिमा के साथ इसकी कहानी सुनाते और हम जैसे बच्चे भौचक हो कर कहानी सुनते.

फिर याद आता है दशहरा. शायद 1988 का. पटना के सारे पण्डालों में सिर्फ एक ही गाना-चांदनी ओ मेरी चांदनी! ओ मेरे सोना, सोना!!

मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियाँ को तो हनुमान चालीसा की तरह कंठस्थ कर गई थी. जाने बाद के कितने सालों तक मईया कहती थी तनी उ वाला मुंडेया वाला गाना सुनइहें! और मैं टेपरिकॉर्डर की तरह चालू- ले जा वापस तू अपनी बारात मुंडेया, मैं नई जाना, नई जाना तेरे साथ मुंडेया…

गिनती याद नहीं कितनी मौसियों, बुआओं, दीदीयों की बारात में रात भर गीत-गालियाँ गाते हुए मैं ससुराल नहीं जाऊंगी, डोली रख दो कहारों… गा कर बारातियों-घरातियों की वाहवाही लूटी. वो तो अच्छा था कि अपनी बारात में खुद ही गीत नहीं गा सकती थी! वरना चांदनी की तरह मेरी भी जलावतनी हो ही गई होती! हा हा हा!

इंग्लिश-विंग्लिश सिर्फ श्रीदेवी के लिए ही देखना था मुझे और अभी आठ दिन पहले ही तो अपनी बेटी को सदमा दिख रही थी मैं. हालांकि इतनी दुबली होकर और नाक की सर्जरी कराई हुई श्रीदेवी में भी मुझे मोरनी बागां मां बोले आधी रात वाली श्रीदेवी ही दिखती थी.

बिना अश्लीलता के उनकी अदाएं, जलवे, नृत्य, कॉमेडी, प्यार का इजहार, अट्रैक्शन, सेडक्शन! सब उन्हीं को देख कर समझ में आया. यहाँ तक कि मैंने प्यार किया कि अंत्याक्षरी भी काटे नहीं कटते दिन ये रात से ही हिट हुई और दिल और जबान में बसी हुई है.

और इतराने के लिए तो वी वी वी वी वी वी वी हवा-हवाई से बेहतर गाना मुझे आज तक नहीं मिला. वो श्रीदेवी ही हो सकती है जिसकी तस्वीरों से उसका प्रेमी चारों दीवारों को भर दे.

श्रीदेवी की सफलता, निजी जिंदगी, फिल्मों से सन्यास, वापसी और अब बेटी का लॉन्च! सब कुछ हमारी पीढ़ी के साथ चला. सब कुछ देखा, अब गुनने की बारी.

श्रीदेवी कभी मरने के लिए पैदा नहीं होती. श्रीदेवी कभी बूढ़ी नहीं होती. श्रीदेवी कभी हमारे जीवन से नहीं जाएगी. श्रीदेवी अपने हुनर के साथ, चांदनी बनकर छत पर बरसती लाल पंखुड़ियों के नीचे नाचती रहेगी.

फ़रदा-ओ-दी का तफ़रिक यक बार मिट गया
कल तुम गए, कि हम प क़यामत गुजर गई!!

– कल्याणी मंगला गौरी

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