ज़हर से डरिये मत, अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना सीखिए

बिच्छू… नाम सुनते ही डर लग जाता है, इतना डर कि पूछिये मत. जो बिच्छू सिर्फ एक या दो वार में मर जाता है उसे भी हम तब तक मरते रहते हैं जब तक उसकी चटनी ना बन जाये.

आखिर क्यों? डर के कारण…

मेरे घर पर भी कई बार बिच्छू निकले जिन्हें देखते ही पत्नी की चीख निकल गयी. मुझे बुलाया और उस बेचारे प्राणी को मोक्ष प्रदान करने का हुक्म सुना दिया.

बोलीं, “देख क्या रहे हो मार डालो इसे? अरे हथौड़े से खत्म कर दो इसे.”

मैंने कहा, “अरे इसे जान से क्यों मारो, जीने दो उस बेचारे को, उसे पता नहीं था बेचारा गलती से घर मे घुस आया होगा.”

पत्नी बोली, “ये आपको बेचारा दिखाई दे रहा है काट लेता तो?”

मैंने कहा, “इसे पाल लेते हैं.”

पत्नी बोली, “पागल हो क्या या मुझे मारना चाहते हो? मारना है तो सीधे ज़हर दे दो.”

अब पत्नी से कहाँ सहा जाता सो उन्होंने मुझे बिच्छू का दोस्त और उनका दुश्मन करार दे दिया, मैंने फिर कहा, “अरी भाग्यवान ये नुकसान नही फायदा देगा, अपन करोड़पति बन जाएंगे.”

तो बोलीं, “हाँ मुझे मालूम है आपने मेरा लाइफ इन्शुरन्स इसीलिए करवाया था ताकि मुझे मार कर आप बीमे की राशि से करोड़पति बन जाओ. कौन है वो कलमुँही जिसने आपको अपने जाल में फंसा रखा है? मुझे तो पहले से ही शक़ था दिन भर फेसबुक पर लड़कियों से चैट करते रहते होंगे, आज सब सामने भी आ गया, मार डालो मुझे इसी से कटवा दो.”

मैंने कहा, “अरे हद्द है यार ज़रा बात तो सुनो.” वे बोलीं, “कुछ नहीं सुनना आप अभी के अभी इसे मारो बस.”

हार कर मैंने आराम से चिमटे से पकड़ कर बिच्छू उठाया और घर के बाहर कर दिया, उसे ज़िन्दा छोड़ने पर मुझे देशद्रोही करार दिया गया.

बाद में मैंने पत्नी को बताया कि अगर अपन उसे पाल लेते और उसका ज़हर निकालते रहते, उसे इकठ्ठा कर के बाजार में बेचते तो 72,99,99,730 रूपए प्रति लीटर में बिकता.

अब पत्नी की शक्ल देखने लायक थी, बोली “अरे तो आप मूर्ख हो क्या? जाओ उसे ढूंढ कर लाओ ना, मेरी शक्ल क्या देख रहे हो? मेरी तो किस्मत ही फूटी है, जब आपको पता है मुझे दुनियादारी की समझ नहीं है तो काहे को मेरी बात मानी, वैसे तो कोई बात नहीं मानते पर आज जब करोड़ों का फायदा हो सकता था तो लुटा दिए पैसे, घर आई लक्ष्मी को बाहर फेंक आये, आपसे मेरी खुशी देखते ही कहाँ बनती है.”

मने 5 मिनट के अंदर ही मैं उनका कातिल, उनका दुश्मन, देशद्रोही, धोखेबाज़, गद्दार, मूर्ख, और पैसे डुबोने वाला व्यक्ति बन गया था.

यही हाल कुछ फ़ेसबुकियों का हैं, बड़ी जल्दी निष्कर्ष पर पहुँच जाते हैं. कभी मैं उनके लिए हिंदुत्व का झंडाबरदार होता हूँ, तो कभी सेक्युलर तो कभी देशद्रोही तो कभी सत्ता का गुलाम मोदी का एजेंट. आप उन्हें कितना भी समझाने का प्रयास करें, वे आपकी एक न सुनेंगे.

मुझे समझना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि जिस बिच्छू के काटने का आपको डर लग रहा है, जिस बिच्छू के डंक का डर आपको सता रहा है उसी बिच्छू के डंक से मुझे 72 करोड़ रूपए के फायदे की संभावना दिखाई दे रही है.

ज़हर से डरिये मत ज़हर को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना सीखिए. Look for opportunity in every challenge.

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