बैंक अफसर की सलाह उनके लिए, जिन्हें छोटे स्तर पर काम करने में शर्म नहीं

यह लेख उन लोगों को ध्यान में रखते हुए लिखा है, जिन्हें कोई छोटे स्तर पर काम करने में शर्म नहीं आती.

छोटा सा फास्टफ़ूड का स्टाल, चाय की दुकान, परचून की दुकान, छोटी सी हलवाई की दुकान, शुरुआती स्तर पर ढाबा, बर्तनों की दुकान, इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक आइटम्स की शॉप, छोटा आइसक्रीम पार्लर आदि तमाम प्रकार के काम हैं.

[मुद्रा लोन लेने बैंक से संपर्क करने से पहले यह पढ़ लीजिए]

इनका थोड़ा अध्ययन कीजिये, किसी के पास कुछ दिन जाकर देखिये, सीखिए…

एस्टीमेट बनाइये कि काम छोटे स्तर पर शुरू करने में न्यूनतम कितना खर्च आएगा…

सामान कहाँ से लाना है, कितनी लागत आएगी… दुकान कहाँ खोलनी है, काम कैसे करना है, आपके उत्पादों और सेवाओं का क्या स्कोप है उस एरिया में…

कम से कम कितना बेच लेंगे, कितना कमा लेंगे… सबसे ज़रूरी, कम से कम कितनी छोटी या कितनी बड़ी किश्त चुका सकेंगे बैंक को वापस, शुरुआती दौर में काम हल्का चलने के बाद भी…

ये सब एक पेपर पर खाका उतार कर रखिये… इसे ही कहते हैं प्रोजेक्ट रिपोर्ट… ये ज़रूरी नही है, पर ये सब बैंक में पूछा जाएगा… इसका अध्ययन करने के बाद आप इसे मैनेजर के सामने रख दीजिए…

कुछ 10-15% की मार्जिन मनी का इंतजाम रखिये… मार्जिन इसलिए लिया जाता है कि आपका भी कुछ पैसा आपके काम मे लगे तो आपको चिंता रहती है कि काम ठीक से चलना चाहिए… इसलिए 100 रुपए के लोन में बैंक लगभग 90 रूपए ही लोन देता है और 10 रुपए आपके लगाता है.

सलाह ये रहेगी कि कोई भी काम एकदम से कूद कर बड़े लेवल का ना करें, पहले छोटे से शुरू करें.

जितनी किश्त महीने में आराम से चुका सकते हैं उतना ही वचन दें बैंक को और उसी हिसाब से अपने लोन का repayment पीरियड या कर्ज अदायगी का समय निर्धारित करवाएं.

बैंक में जाएं और अपने काम के बारे में, प्रोजेक्ट के बारे में मैनेजर को संतुष्ट करने का प्रयास करें…

इस स्तर के सारे काम प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत किये जा सकते हैं.

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