अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष की धमकी, दीक्षांत समारोह में न आए कोई संघ से जुड़ा नेता

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष ने राष्ट्रपति को 7 मार्च को होने वाले दीक्षांत समारोह में बुलाने पर उठाया नया विवाद.

यह तो सभी को पता है कि AMU में हमेशा से अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता रहा है.

देश विदेश के हजारों मुस्लिम छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए AMU जाते हैं लेकिन सामान्य मुस्लिम घरों से जाने वाले छात्रों में से अधिकतर वहां जाकर कट्टरपंथी विचारधारा के अनुयायी बन जाते हैं.

उनके अंदर हिन्दुओं और खास तौर से संघ व भाजपा के लिए इतनी अधिक नफरत भर दी जाती है कि वो अपने शहर-कस्बों में लौटकर भी सामान्य हिन्दूओं से पहले की तरह घुलमिल नहीं पाते.

AMU के छात्रसंघ अध्यक्ष ने खुलेआम धमकी दी है कि दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति को तो आने दिया जायेगा लेकिन भूलकर भी कोई संघ से जुड़ा नेता वहां किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

हद है. केन्द्र सरकार से अक्सर करोड़ों की मदद पाने वाली यूनिवर्सिटी में संघ से जुड़े किसी नेता को तो नहीं आने देंगे लेकिन उसी संघ की केन्द्र सरकार से मदद लेने से कोई ऐतराज नहीं. वाह. क्या बात है.

देश में केन्द्र में भाजपा सरकार है. जिसको पिछले लोकसभा चुनाव में सहयोगी पार्टियों सहित 38% से अधिक वोट मिला था. और यह भी तब जबकि तमिलनाडु -केरल- आंध्र प्रदेश -प. बंगाल, उड़ीसा, असम, अरूणाचल प्रदेश जैसे कई प्रदेशों में भाजपा का कोई जनाधार ही नहीं है.

अगर यूपी, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, हरयाणा, हिमांचल जैसे मुख्य प्रदेशों की बात करें तो यहां अधिकतर जगह NDA का वोट प्रतिशत 50% से भी अधिक हो जाता है.

इसका सीधा मतलब है कि अधिकतर हिन्दू संघ और भाजपा को साम्प्रदायिक नहीं मानते. हिन्दुओं में 60% से अधिक भाजपा या संघ से जुड़ाव महसूस करते हैं, इसके बावजूद जब कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम नेता संघ को गाली देते हैं, तो अधिकतर हिन्दुओं को यह गाली खुद को दी गई महसूस होती है.

इन पंक्तियों के लेखक ने खुद 8 वीं तक की पढाई संघ संचालित सरस्वती शिशु मंदिर से पूरी की थी. मुझे कभी भी स्कूल में या संघ की शाखाओं में मुस्लिमों के खिलाफ एक भी शब्द किसी से सुनने को नहीं मिला.

और फिर भी जब प. बंगाल में 300 से अधिक शिशु मंदिरों की मान्यता जबरन समाप्त कर दी जाती है, या जब AMU के छात्रसंघ अध्यक्ष जब संघ के खिलाफ इतना जहरीला बयान देते हैं तो मुझे लगता है कि मुझे बिना किसी गलती के जबरन गाली दी जा रही है. और मेरा मन और ज्यादा संघ व भाजपा से जुड़ जाता है.

इस लेख के माध्यम से मैं सभी सामान्य मुस्लिम समाज से आग्रह करूंगा कि AMU के छात्रसंघ अध्यक्ष या ओवैसी बन्धुओं जैसे लोगों के कट्टरपंथी विचारों का विरोध करें और संघ व भाजपा से दिल से जुडें. संघ किसी भी हाल में मुस्लिम विरोधी नहीं है, पर इस तरह के कट्टरपंथी,समाज तोड़ने वाले विचारों का विरोध जरूर करता रहेगा.

और हां

जय हिंद.

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