तारीफ का एक शब्द बच्चे के लिए जलते अंगारे पर पड़ी पानी की शीतल बूँद सा है

मेरी पत्नी आजकल पंजाब के एक बहुत अच्छे स्कूल की प्रिंसिपल हैं. शिक्षा के क्षेत्र में उनका नाम है और वो एक बहुत काबिल प्रशासक हैं.

उन्होंने अपनी एक टीचर को सबके बीच में बहुत ज़ोर से डांटा. दो घंटे बाद स्टाफ रूम में फिर डाँटा. छठे पीरियड में फिर एक बार सभी टीचर्स के बीच में डांट दिया.

लड़की बेचारी वहीं सबके बीच फफक के रो पड़ी. फिर आया आखिरी पीरियड. उसमें उस दिन पूरे स्टाफ की एक मीटिंग थी. सब बैठे. मैडम ने उनसे पूछा…. क्यों? आया मज़ा? सबके बीच में यूँ डांट खा के कैसा लगता है? बुरा लगा न? उन बच्चों को भी बुरा लगता होगा जिन्हें तुम रोजाना डांटती हो.

अपनी खीज उतारने के लिए मार देती हो …..उन्हें duffer, गधा, नालायक, कामचोर और न जाने क्या क्या बोलती हो…. कितना demoralize होते होंगे वो…. मैं इतने दिन से तुम्हे समझा रही हूँ…. तुम्हे समझ नहीं आ रहा था.

आज मैं तुमसे नाराज नहीं थी. मैंने तुम्हें सिर्फ ये अहसास दिलाने के लिए कि सार्वजनिक प्रताड़ना कितनी कष्ट दायी होती है, तुम्हें जान बूझ के डांटा. लड़की फिर रोने लगी. फिर उसे अपने पास बुलाया. गले से लगाया. चूमा चाटा पुचकारा. वापस भेज दिया. मीटिंग चलती रही.

सबके काम काज की समीक्षा हो रही थी. काम के मामले में उस लड़की की खूब तारीफ हुई. दस मिनट बाद उसे फिर खड़ा किया. पूछा …..क्यों? जब मैंने गले से लगाया … प्यार दिया …… तो कैसा लगा ? अच्छा लगा न ? सबके बीच में तारीफ हुई ……. कैसा फील हुआ …….

उस मीटिंग के बाद प्रिंसिपल साहिबा ने योजना बद्ध तरीके से उस लड़की की सबके सामने तारीफ करनी शुरू की…… यदि कुछ सुधारना भी होता तो पहले तारीफ करती. तुम्हारा ये ये काम बहुत अच्छा है .you are my most valuable staff ….. इस इस field में सुधार करो ……. ये ये गलतियां सुधारो …… तुम जिंदगी में बहुत ऊपर जाओगी. कहना न होगा ……. आज वो लड़की उनके स्कूल की सबसे काबिल टीचर है ……..

मैंने 25 बरस तक बच्चों के बीच काम किया है… शिक्षा और sports के क्षेत्र में… parents, गुरुजन और पूरा समाज जाने अनजाने में रोजाना बच्चों को बड़े कायदे से harass करते हैं. उसे बहुत कायदे से समझा देते हैं कि बेटा… तुम इस धरती के सबसे बड़े नालायक और कामचोर हो… तुमसे न हो पायेगा… तुम तो भीख मांगोगे…

मैं ऐसे बहुत से लोगों को जानता हूँ जो ये बताते हैं कि हमारे बाप ने कभी जिंदगी में हमारी तारीफ न की…. हमेशा नालायक ही बताया. मेरे एक मित्र आज भी उस टीचर को याद करके भावुक हो जाते हैं जो हमेशा स्कूल में उनकी तारीफ करते थे.

मेरी पत्नी मेरी सबसे अच्छी सबसे होनहार student रही. आजकल उनका सारा दिन स्कूल में सिर्फ बच्चों को चूमने चाटने में ही बीतता है. खासतौर से उन बच्चों को जो सबसे कम नंबर लाते हैं या उन्हें जो गोरे चिट्टे नहीं. बहुत खूबसूरत नहीं. वो जिन्हें दुनिया सिर्फ इसलिए दुत्कारती रहती है कि उनका रंग सांवला है या उनके नयन नक्श तीखे नहीं. या वो जो slow learners हैं. स्कूल में ऐसे बच्चों को बहाने खोज के तारीफ की जाती है …… ohh ….. you are sooooo intelligent ……. अरे वाह ….. आपकी hand writing तो बहुत सुन्दर है …… आपकी ड्रेस बहुत सुन्दर है..

नालायक से नालायक आदमी में भी कुछ गुण तो होते ही हैं.. क्यों न उन्हें ही explore किया जाए. दुनिया भर में तिरस्कृत बच्चे को तारीफ का एक शब्द जलते अंगारे पर पड़ी पानी की शीतल बूँद सा लगता है.

समाज में प्रोत्साहन से जो results मिल सकते हैं वो punishment से कभी नहीं मिल सकते .
अपने बच्चों की और अपने स्टाफ की तारीफ करना सीखिए .

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