तत्वमसि : सब छोड़कर सिर्फ प्यास को पीने एकांत में बैठ जाएं

बाकी गुनाह अंजाने में हो सकते हैं, मगर एक गुनाह जान-बूझकर हम रोज करते हैं …वो है -अपनी सत्य को जानने की प्यास को दबा देना.

और वही प्यास ईंधन है, वही गुरू है, वही साधन, वही साध्य… कोई है ही नहीं ऐसा जिसको रोज ये प्यास आकर आहट ना देती हो.

उबकाई लेते offices के लोग “क्या यार, ये भी कोई जिंदगी है, बस काम करो, खाना खाओ और सो जाओ” ….या फिर 4 जुआरी बैठे हुए “कुछ जिंदगी में missing है यार”……या दो प्रेमी युगल ,”कुछ अतृप्ति है, ये वो वाला प्रेम नहीं”….या कोई गृहस्थन चुपके से रसोई में रोती…

रोज़ प्यास आकर इशारा देती है और वही वक्त होता है जब हमारा दरवाजा परमात्मा खटखटा रहा होता है. सूत्र है ये एक, उसी पल सब छोड़कर सिर्फ उस प्यास को पीने एकांत में बैठ जाएं.

और सब मिल जाते हैं इशारे …मगर हम उस वक्त कुछ करने में व्यस्त हो, उस प्यास को दबा देंगे. घर के कामों में, और नहीं तो यही बात phone करके किसी को बताने में… और ध्यान के लिए किसी निश्चित सुबह या शाम के वक्त का इंतजार करेंगे.

और बहुत संभावना है कि तार ना जुड़े गहरा…… क्योंकि इबादत का वक्त तय करने वाले हम बन गए, जबकि “प्यास” का कुल अर्थ ही इतना है कि खुदा ने अपने जुड़ने का वक्त तय किया है.

उस वक्त किसी क्रिया की नहीं, बस एकांत होने की भर जरूरत है. और जो आपको किसी 2 घंटे की ध्यान विधि में घटना हो, वो प्यास के पलों में 2 लम्हों या 2 मिनट में हो जाता है.

इसलिए बस इस गुनाह से खुद को बचा लें तो अब तक के सारे जन्मो के जाने-अनजाने में किए लाखों गुनाह पानी की भाप की तरह वाष्पित हो जाएंगे….. तत्वमसि… This pic is representing Non-duality happening…

– वनकन्या शून्यो

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