हम इतने उतावले कि न अपने असली मित्र को पहचानते हैं, न अपने असली शत्रु को

सोशल मीडिया में बाबा राम देव को गरियाने वाले लोगों में अधिकांश (लगभग 90%) ब्राह्मण देवता, पंडी जी लोग हैं.

ये लोग बाबा राम देव को जातिवाद न फैलाने की नसीहत देते हुए खुद जातिवाद फैला रहे हैं.

योग और आयुर्वेद को दुनिया भर में प्रतिष्ठापित पुनर्स्थापित कर, घर घर पहुंचा कर, हिंदुत्व की जो सेवा बाबा राम देव ने की है उसकी मिसाल आधुनिक भारत में तो मिलना मुश्किल ही है…

स्वास्थ्य और आरोग्य के क्षेत्र में दुनिया भर के अरबों लोगो को एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में और नियम से योग करने के लिए प्रेरित करने में बाबा का जो योगदान है उसे भुलाया नहीं जा सकता.

इसके अलावा अपने स्वदेशी उत्पादों से Unilever और Nestle जैसी multinational कंपनियों को नाकों चने चबवा देने वाले बाबा…

हज़ारों नहीं बल्कि लाखों लोगों को पतंजलि के माध्यम से प्रत्यक्ष और परोक्ष रोज़गार देने वाले बाबा…

एक संन्यासी या व्यापारी (आपकी मर्जी आप चाहे जो कहें) होते हुए भी पूरी की पूरी केंद्र सरकार से टकरा जाने वाले बाबा…

Vatican और ईसाई चर्च द्वारा पोषित UPA सरकार से टकरा के, दिन रात उसके खिलाफ अभियान चला के, उसके खिलाफ पूरे दो साल तक दिन-रात देश के एक-एक कोने में अलख जगाने वाले बाबा…

और एक ईसाई-मुसलमान पोषक, छद्म सेक्युलर सरकार को खोखला कर उखाड़ फेंकने में महती भूमिका निभाने वाले बाबा को सिर्फ एक सीरियल के एक एपिसोड पर जिस तरह से गरिआया जा रहा है, उस से सिर्फ यही सिद्ध होता है कि हम हिन्दू कितने अविवेकी हैं, सब कुछ कितनी जल्दी भूल जाते हैं…

हम इतने उतावले हैं, इतने छिछले हैं कि न अपने असली मित्र को पहचानते हैं और न अपने असली शत्रु को…

हम वही लोग हैं जो 40 साल तक घनघोर सेक्युलर रह के, रोज़ाना हमारे ज़ख्मों पे नमक छिड़कने वाले राहुल गांधी द्वारा तिलक लगा के, जनेऊ पहन के इटालियन रोमन कैथोलिक ब्राह्मण बन जाने पे दिलो जान से फिदा हुए जाते थे और एक आदमी के 25 साल से ज़्यादा के सेवा कार्य को भुला के उसे आज गालियां दे रहे हैं.

हिन्दू को जाति के नाम पे कितनी आसानी से लड़ाया जा सकता है, बाबा रामदेव प्रकरण इसका सबसे अच्छा उदाहरण है.

जो लोग आज बाबा रामदेव को जातिवाद न फैलाने की नसीहत दे रहे हैं, उन्हें अपने इस विरोध में छिपे जातिवाद पे भी नज़र दौड़ानी चाहिए.

ग़ालिब का शेर है –

मैंने मजनू पे लड़कपन में असद
संग उठाया था कि सर याद आया

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY