उनके हक़ के लिए हम गर्दन कटाने को तैयार, वो नाखून तक कटाने को राजी नहीं!

लकड़बग्घों से काश्मीरी पंडितों का दर्द सहा नही जा रहा. भोत नाराज हैं लकड़बग्घे मोदी जी से.

मोदी जी ने धोखा दिया… आखिर हमने मोदी जी को भोट क्या सड़क बिजली पानी के लिये दिया था? अभी तक धारा 370 काये नई हटाई… कश्मीरी पंडितों का पुनर्वास कब होगा?

अबे पहले कश्मीरी पंडितों से तो पूछ लो कि वो जाना भी चाहते हैं वापस काश्मीर?

जम्मू में फिल्मकार कामाख्या नारायण सिंह की 35A पे बनी डॉक्यूमेंट्री का विमोचन था. हम यहां सुल्तानपुर से मोटर साइकिल चला के जम्मू गए…

उधर खुद जम्मू से कोई नहीं आया… हम बेवकूफों की तरह बेगानी शादी में अब्दुल्ला बन के नाच रहे थे…

जम्मू-कश्मीर स्टडी circle के कार्यकर्ता पूरे देश से आ के जम्मू में जुटे हुए थे… प्रोग्राम शुरू हुआ तो हॉल 80% भरा था.

एक घंटे में आधा खाली हो गया, डॉक्यूमेंट्री खत्म हुई तो 80% हॉल खाली था… हम बाहरी लोग बचे थे… स्थानीय जम्मू वाले सब चले गए थे…

डॉक्यूमेंट्री बनाने वाला बेचारी कश्मीरी महिलाओं के हक़ो हुक़ूक़ के लिए मरा जा रहा और उस कार्यक्रम में धारा 370 की मारी, न कोई कश्मीरी महिला आयी, न कोई वाल्मीकि सफाई कर्मी आया और न कोई गुरखा गोरखाली…

जिनके हक़ की लड़ाई हम यहां दिल्ली, मुम्बई और बनारस से जा के लड़ रहे, वो खुद जम्मू में गायब थे…

मैंने जम्मू के अपने एक संपादक मित्र से पूछा कि ये जम्मू के हिंदुओं का क्या रुख-रवैया है 35A और 370 पर…

उनका जवाब था कि वो भ्रमित हैं… उनको लगता है कि अगर 370 हट गई तो जम्मू में हिंदी टीचर की पोस्ट पर बलिया का कोई असित मिसिर अखंड भारत का नारा लगाता हुआ आ जमेगा…

इधर लकड़बग्घे कश्मीरी पंडितों के हक़ो हुक़ूक़ के लिये मरे जा रहे है उधर दिल्ली में बैठे 23,000 कश्मीरी पंडित विधानसभा का वोट डालने तक नहीं गए, जबकि बूथ वहीं दिल्ली में ही था.

कश्मीर घाटी की 7 सीटें ऐसी हैं जिनमें दिल्ली में बैठे कश्मीरी पंडित अगर भाजपा को वोट दे दें तो भाजपा की सीट संख्या PDP से ऊपर निकल जाती है और भाजपा अकेले दम कश्मीर में सरकार बना सकती है…

बेचारा लकड़बग्गा (यहां मैं खुद को भी लकड़बग्घा ही मानता हूँ) कश्मीरी पंडितों के लिये अपनी गर्दन कटाने को तैयार है और उधर कश्मीरी पंडित दिल्ली में बैठा नाखून तक कटाने को नहीं राजी?

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