बाबा के सीरियल के प्रचार में जुटे हो तो ठीक, वरना अपनी ऊर्जा कहीं और खपाओ

ये बाबा रामदेव को लेकर क्या चल रहा है फेसबुक पर? जिसे देखो वही उन्हें बुरा-बुरा कह-लिख रहा है.

टेलीविज़न और अख़बार से बरसों से दूर हूँ, पर दो दिन से फेसबुक पर बाबा के खिलाफ लिखे जाते देख आज गूगल news सर्च की… पर उधर भी बाबा से संबंधित कोई समाचार नहीं.

हैरान-परेशान कुछ आलोचक विद्वानों से पूछा तो पता लगा कि बाबा के जीवन पर आधारित कोई टीवी सीरियल बन रहा है और उसके टीज़र/ ट्रेलर पर मठाधीशों की लपलपा रही है… जीभ…

ये उतावले पहले भी कई मौकों सहित अभी हाल में ही पद्मावत/ पद्मावती मामले में मुंह की खा चुके हैं.

बड़े से बड़े मठाधीश से लेकर उनके भक्तों तक, पहले सबने बिना देखे-जाने-समझे जी भर कर पद्मावत के खिलाफ ज़हर उगला और फिल्म रिलीज़ होने के बाद फिल्म के गुणगान में लग गए.

क्या ऐसा ही कुछ बाबा रामदेव वाले मामले में नहीं हो रहा? मुझे तो ये तक नहीं पता कि ये कोई टीवी सीरियल है या सिंगल एपिसोड वाला कोई प्ले या फीचर फिल्म… पर क्या दो दिन से बवाल काट रहे फेसबुकियों को पता है पूरी पटकथा?

रिलीज़/ टेलीकास्ट होने से पहले यूं फेसबुक पर ग़दर मचा कर उतना भी न उखाड़ पाओगे जितना पद्मावत मामले में उखाड़ लिया था… अगर कुछ उखाड़ लिया था तो… वरना भंसाली के बिना-वेतन प्रचारक ही बने थे आप…

ऐसा ही कुछ इस मामले में है तो ठीक… बाबा के सीरियल/ फिल्म के प्रचार में जुटे हो तो ठीक, वरना अपनी ऊर्जा कहीं और खपाओ… ये राष्ट्रवाद, ये विचारधारा, ये स्वदेशी आपकी समझ के बाहर की बात है.

कमाल है, नीरव मोदी/ चिदंबरम/ अभिषेक मनु सिंघवी के कारनामों की चर्चा के वक़्त ये बाबा रामदेव का राग छेड़ने वाला कोई शातिर दिमाग ही होगा.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY