जीवन में हर जगह मौजूद है हॉब्स का दुष्ट और रूसो का भला इंसान

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के अध्ययन के समय अगर किसी विषय ने मुझे रोमांचित किया था, वह था थॉमस हॉब्स और जॉ जाक रूसो के विचारों के मध्य अंतर्द्वंद.

यद्यपि वे दोनों समकालिक नहीं थे, लेकिन उनके परस्पर विरोधी विचारों को आज के आधुनिक राज्य (राष्ट्र) की उत्पत्ति का जनक माना जाता है.

हॉब्स का मानना था कि ‘मनुष्य का जीवन अकेला, निर्धन, दुष्ट, पाशविक, क्रूर और अल्पकालिक है’.

इसके विपरीत, रूसो मानता था कि ‘प्राकृतिक अवस्था में मनुष्य स्वतंत्र, बुद्धिमान और भले स्वाभाव का था’ एवं विकास ने उस प्योर या खरे व्यक्ति को भ्रष्ट कर दिया.

दोनों ही मानते है कि राज्य (राष्ट्र) की उत्पत्ति और उसकी वैधता का आधार प्रत्येक व्यक्ति के मध्य social contract या सामाजिक अनुबंध है.

हॉब्स के लिए हम लोगों ने सामाजिक अनुबंध इसलिए किया क्योंकि हम अपने आप को अपने जैसे दुष्ट व्यक्तियों से बचाना चाहते थे. अतः उस अनुबंध से उपजे राज्य की जिम्मेवारी होगी – हमारी सुरक्षा.

लेकिन रूसो मानते थे कि हमने सामाजिक अनुबंध इसलिए किया क्यों कि हम सभी प्रगति के बावजूद स्वतंत्रता और समान अधिकार चाहते थे; अपनी संपत्ति की सुरक्षा चाहते थे, अतः उस सामाजिक अनुबंध के तहत अपने कुछ अधिकार राज्य को सौंप दिए.

हमें अपने जीवन में हॉब्स का दुष्ट और रूसो का भला इंसान लगभग प्रतिदिन मिलता है.

अभी हाल में हुए नीरव मोदी के घोटाले को हॉब्स वाले दुष्ट व्यक्ति की श्रेणी में रखा जाना चाहिए. अथाह संपत्ति होने के बावजूद उसे और संपत्ति चाहिए थी, वह भी दूसरों की संपत्ति पर डाका डाल के. उसने उस भ्रष्ट बैंकिंग व्यवस्था का लाभ उठाया, जो अभिजात वर्ग के हित को ध्यान में रखकर बनायी गयी है.

क्या आपको लगता है कि भ्रष्टाचार और वंशवाद में डूबी कांग्रेस और उनकी समर्थक पार्टी इस भ्रष्ट व्यवस्था को समाप्त करने के लिए उत्सुक होंगे?

सरकार नीरव मोदी की संपत्ति जब्त कर रही है, दोषियों को पकड़ रही है, लेकिन क्या गारंटी कि ऐसा भ्रष्टाचार भविष्य में ना हो?

नीरव द्वारा विदेश भेजे जाने वाले धन को बैंक में उसके जमा पैसे ना लिंक होने से घोटाला हो गया.

हॉब्स के अनुयायी उस भ्रष्ट कर्मचारी का रोल महत्वपूर्ण नहीं है. वह कर्मचारी ना होता तो नीरव को कोई अन्य भ्रष्ट कर्मचारी किसी अन्य बैंक या ब्रांच में मिल गया होता.

इसके लिए सरकार को पैसे का आदान-प्रदान, उस पैसे का स्वामी, उस धन व संपत्ति पर टैक्स इत्यादि पर निगाह रखनी होगी. हम सभी को रूसो वाला भले स्वभाव का व्यक्ति बनने में मदद करनी होगी.

प्रधानमंत्री मोदी यही कर रहे हैं. वह भारत की भ्रष्ट संरचना को बदल रहे हैं. उस संरचना को, जिससे अभिजात वर्ग ने अपने परिवार और खानदान को राजनैतिक और आर्थिक सत्ता के शीर्ष पर बनाए रखा.

हम सभी में कही ना कही हॉब्स का मनुष्य निवास करता है. उसे रूसो वाला भले स्वभाव का व्यक्ति बनाने में उस भ्रष्ट संरचना का क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन या रचनात्मक विनाश करना होगा.

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