यादों के झरोखे से : मास्टर तारा सिंह एक राष्ट्रभक्त सन्त नेता

  • मनमोहन शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

आज की पीढ़ी भले ही महान सिख नेता मास्टर तारा सिंह के नाम से वाकिफ न हो मगर कभी उनका देश की राजनीति में तूती बोला करती थी.

मास्टर जी एक सच्चे राष्ट्रभक्त और सनातनी हिन्दू थे. मैंने अपने जीवन में उनसे अधिक ईमानदार और खरा सिख नेता नहीं देखा.

उनके पास पार्टी फंड के उन दिनों करोड़ों रुपए रहते थे मगर उन्होंने कभी भी एक पैसा भी स्वयं पर या अपने परिवार को कभी भी खर्च नहीं किया. वह राजनीतिक शुचिता के जबर्दस्त समर्थक थे.

मास्टर जी से एक पत्रकार के रूप में मेरा दो दशक तक वास्ता रहा. मिस्टर जिन्ना सिखों का समर्थन प्राप्त करने के लिए मास्टर तारा सिंह को पटाना चाहते थे और उन्होंने उन्हें यह पेशकश की थी कि यदि सिख पाकिस्तान का समर्थन करते हैं तो वह मास्टर जी को पाकिस्तान का उपप्रधानमंत्री बना देंगे मगर मास्टर जी जिन्ना के प्रलोभन में नहीं फंसे और उन्होंने उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया.

यह बात दीगर है कि आजादी के बाद उनकी पंडित से कभी नहीं बनी. इसलिए उन्होंने केन्द्र सरकार के खिलाफ अनेक आंदोलन चलाए और वर्षों जेल में काटे.

आज जो लोग सिखों को हिन्दुओं से जुदा बताते हैं मास्टर जी उनके मुंह पर करारा तमाचा हैं. मास्टर जी विश्व हिन्दू परिषद के संस्थापकों में शामिल थे. उन्होंने साठ वर्ष तक निरन्तर हिन्दू महासभा के अधिवेश में सक्रिय भाग लिया.

मुझे भलीभांति याद है कि एक बार विख्यात सिख पत्रकार स्व. खुशवन्त सिंह मास्टर जी से मिलने गुरूद्वारा रकाबगंज दिल्ली में आए थे. बातचीत में उन्होंने मास्टर जी से कहा कि मास्टर जी सिख, हिन्दुओं की तुलना में मुसलमानों के ज्यादा नजदीक हैं. यह सुनते ही मास्टर जी भड़क उठे और उन्होंने चिल्लाकर कहा बकवास बंद कर.

अपने निजी जीवन में मास्टर जी बेहद ईमानदार थे. मगर उनमें कुछ मानवीय कमजोरियां भी थीं. वह ज्योतिष में गहरा विश्वास रखते थे.

मुझे भलीभांति याद है कि एक बार दिल्ली में मास्टर जी एक पत्रकार सम्मेलन में अकाली दल की भावी एजिटेशन के कार्यक्रम की घोषणा करने वाले थे कि इतने में उनके चहेते ज्योतिषी पंडित हवेलीराम अचानक पत्रकार सम्मेलन में प्रकट हुए और उन्होंने मास्टर जी को अलग ले जाकर उनके कान में कुछ कानाफूसी की.

इसके बाद हवेलीराम तो अंतर्ध्यान हो गए मगर मास्टर जी ने हम संवाददाताओं को बताया कि वह अभी सरकार के खिलाफ मोर्चा नहीं लगा रहे हैं. बाद में मास्टर जी ने बताया कि उन्हें मोर्चा स्थगित करने का परामर्श ज्योतिषी हवेलीराम ने दिया है.

मास्टर का जीवन बेहद सादा था और उन्होंने अपने जीवन में कोई सम्पत्ति नहीं बनाई.

मास्टर जी के राजनीतिक पतन का कारण उनका पुत्री मोह बना. उन्होंने आमरण अनशन रखा हुआ था मगर अपनी पुत्री डॉ. राजिंदर कौर की सलाह पर उसे भंग कर दिया. उनका यह फैसला उनके राजनीतिक पतन का मुख्य कारण बना.

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