रॉयल राजस्थान : चोखी ढाणी

राजधानी जयपुर में एक रिसॉर्ट्स है, चोखी ढाणी. ये चोखी ढाणी रिसॉर्ट्स जयपुर की शान है.

चोखी/चोखा राजस्थानी शब्द है. शाब्दिक अर्थ होता है तगड़ा धाकड़ शानदार जानदार जिंदाबाद जबरदस्त.

ढाणी का अर्थ होता है गाँवो शहरों के बाहर चार भाई या एक ही जाति परिवार के चार छः लोग जब खेतों में छान (छप्परा/मचान) या झोपड़ी बना के रहते हैं, उसे ढाणी कहा जाता है.

हालांकि अब झोपड़ियों की जगह पक्के मकान हो गए हैं. ढाणियों से नेशनल स्टेट हाईवे निकल गए हैं. मेगा हाईवे निकल गए हैं. स्कूल हॉस्पिटल फ्लाई-ओवर बन गए हैं. 440kv की विद्युत् की लाइन पहुंच गई है. विकास की बयार दौड़ गयी है हमारी ढाणियों में.

जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर बड़े शहर हैं लेकिन इन सड़कों पर भी आपको ऊंट एवं ऊंट गाड़ी दौड़ती दिख जाएगी.

अब आइये आप जयपुर के चोखी ढाणी रिसॉर्ट्स पर.

आप जयपुर जैसे शहर में बने इस चोखी ढाणी रिसॉर्ट्स में जैसे ही प्रवेश करोगे, आपको यूं फील होगा हम 2 मिनिट में महानगर से राजस्थान के गांव देहात में पहुंच गए हैं.

अंदर पक्का कंस्ट्रक्शन नहीं है. सिर्फ छान छप्परा झोपड़ियां है. अंदर घुसते ही राजस्थानी परिधान आभूषण साफा पहने हुए महिला पुरुष स्टाफ आपका राजस्थानी भाषा में स्वागत करेगा. राम राम सा…. घणी खम्मा …. आओ सा …. पधारो सा ….

अंदर का माहौल खेत एवं रेगिस्तान जैसा है. कहीं पे कुँए से स्त्रियां पुरुष पानी निकाल रहे हैं, कहीं पे किसान बैलों से हल जोत रहा है. कहीं पर चौपाल पे किसान बैठे हुक्का गुड़गुड़ा रहे हैं. कहीं पे बणजारे अपना परम्परागत वाद्ययंत्र रावण हत्था बजा रहे हैं…

पास में उनकी स्त्रियां कालबेलिया नृत्य कर रही हैं… कहीं पे ऊंट गाड़ों के नीचे गाड़िया लुहार बैठे हैं… कहीं पे सपेरा सांप के सामने बिन बजा रहा है. कहीं पे स्त्रियां गाय भैंस बकरी भेड़ दुह रही हैं… कहीं मिट्टी की हांडी में स्त्रियां परंपरागत तरीके से बिलोना कर रही हैं, मक्खन निकाल रही हैं… कहीं पर स्त्रियां पत्थर की शीला पर पत्थर के बट्टे से लहसुन की चटनी पीस रही हैं… कहीं पर स्त्रियां पेड़ों पर रस्सी से सावन के झूले गा रही हैं… कहीं लोक गायन तो कहीं लोक नृत्य हो रहा है तो कहीं लोक वाद्ययंत्र बज रहे हैं…. शुद्ध रंगीला राजस्थान ….

अब आइये चोखी ढाणी के भोजन पर…

आपको छप्पर के नीचे दरियों पर सपरिवार पंक्तिबद्ध बैठाया जाएगा. आपके सामने लकड़ी का बाजोट (पट्टा) रखा जाएगा थाली रखी जायेगी. मिट्टी के दीपक में तुरंत बिलोने से निकाला हुआ मक्खन परोसा जाएगा.

मोठ बेसन बाजरे जौ गेंहू की रोटी परोसी जाएगी, धाकड़ देशी मेहमाननवाजी की जाएगी. लहसुन की चटनी और बेसन गट्टा की सब्ज़ी परोसी जाएगी. दाल बाटी चूरमा परोसा जाएगा. केर सांगरी की सुपरहिट राजस्थानी सब्ज़ी भी परोसी जाएगी जो दुनिया की सबसे महंगी सब्ज़ी है. केवल रेगिस्तान की झाड़ियों में लगती है खेजड़ी में लगती है.

भोजन परोसने वाले आपकी खातिरदारी जंवाई (दामाद) की तरह करेंगे. टैग लाइन होगी वही राजस्थानी …. आओ सा …. विराजो (बैठो) सा …. जीमो (भोजन करो) सा …. और लेवो सा (और लीजिये) ….

इस रिसॉर्ट्स के दिल्ली से एवं मेरे राजस्थान के घर से 4 घण्टे लगते हैं. मैं अक्सर फैमिली को ले कर जाता हूँ.

ऐसी चोखी ढाणियां अब अजमेर में बन गयी है. जैसलमेर में है. अन्य शहरों में भी हैं. मैं सब जगह जाता रहता हूँ.

मेरे कुछ मित्रों बहनों भाइयों ने पूछा – रितेश भाई 15 साल बाद आपका बेटा अपनी शादी में आपको पंक्तिबद्ध देशी भोज करने देगा??

हमने देशी को भी शाही (रॉयल) बना दिया. चोखी ढाणियों के माध्यम से.

रॉयल राजस्थान !!!! ….

– रितेश प्रज्ञांश

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