जानिए कौन है नीरव मोदी और कैसे किया घोटाला

अभी हाल में नीरव मोदी का नाम एक बहुत बड़े घोटालेबाज के रूप में आ रहा है. कुछ लोग इसके लिए बैंकिंग व्यवस्था को दोष दे रहे हैं. कुछ सरकारी लोगों पर अपना क्रोध उतार रहे हैं.

भाजपा, कांग्रेस और अन्य दल एक दूसरे पर दोष डालने का काम कर रहे हैं और करेंगे. यही उनकी राजनीति है. परंतु आइये समझ लें कि यह घोटाले क्या है.

पहले यह जानते हैं कि नीरव मोदी क्या है और कौन है? यह नीरव मोदी के भाई निशाल बेल्जियम के नागरिक हैं. 48 वर्षीय नीरव मोदी दुनिया की डायमंड कैपिटल कहे जाने बेल्जियम के एंटवर्प शहर के मशहूर डायमंड ब्रोकर परिवार से संबंध रखते हैं.

बेल्जियम में पले बढ़े नीरव मोदी 1999 में भारत में आ कर इस ज्वेलेरी के काम की बारीकियों को समझने लगे. और फिर भारत में उन्होंने फायरस्टोन डायमंड की स्थापना की.

उनकी ओर से डिजाइन किया गया गोलकोंडा नेकलेस वर्ष 2010 में हुई नीलामी में 16.29 करोड़ रुपए में बिका था, जबकि वर्ष 2014 में एक नेकलेस 50 करोड़ रुपए में नीलाम हुआ था.

वह फोर्ब्स की भारतीय धनकुबेरों की वर्ष 2017 की सूची में 84वें नंबर पर हैं. उनकी माली हैसियत 1.73 अरब डॉलर (लगभग 110 अरब रुपए) है और उनकी कंपनी का रेवेन्यू 2.3 अरब डॉलर (लगभग 149 अरब रुपए) है.

अब कुछ बैंकिंग के काम काज को समझें. जब एक भारतीय कुछ आयात करता है, तो वह अपने भारतीय बैंक से विदेशों में भारत के अन्य बैंक से भुगतान करवा सकता है. उस कारोबारी को भारत के बैंक (यहाँ Punjab National Bank) से Letter Of Undertaking मिल जाता है. जिसके लिए उस बैंक की औपचारिकताएं खाते धारक को पूरी करनी होती है.

अपना कुछ धन या अन्य कुछ सामान जमानत के लिए बैंक को दे दिया जाता है. वह बैंक विदेशों के भारतीय बैंक को वह पत्र दे देता है. अब विदेशों का भारतीय बैंक जिस जिस को कारोबारी कहता है धन दे देता है. एक तरह से भारत मे बैंक (Punjab National Bank) विदेशों के लिए जमानत देता है कि यदि उनका पैसा कारोबारी ने नहीं दिया तो भारत में स्थापित बैंक धन की भरपाई करेगा.

यहाँ भी यही हुआ कि पंजाब नॅशनल बैंक ने नीरव मोदी की कंपनियों को LoU दिया. अब नियमानुसार भारतीय बैंक यानि पंजाब नेशनल बैंक को Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunication (SWIFT) के रास्ते से विदेशों के भारतीय बैंक को यह निर्देश देना है.

इस SWIFT प्रणाली के तहत पंजाब नेशनल बैंक के कम से कम तीन अधिकारी इसमें शामिल होने चाहिए. एक बनाने वाला, दूसरा उसे जाँचने वाला और तीसरा सत्यापन करने वाला. आप ध्यान दें तो अपने बैंक भी जब आप चैक देते हैं तो पहले चैक स्वीकार करके टोकन देने वाला, दूसरे आपके हस्ताक्षर मिलने वाला और तीसरा पैसा देने वाला, जो एक बार फिर आपके हस्ताक्षर लेता है.

कुल एमएलए कर कम से कम तीन जिम्मेदार व्यक्ति इस प्रणाली में जुड़े होते हैं. साथ में यह सारा काम Core Banking System की प्रणाली से होता है.

अब आइये Core Banking System को समझते हैं. आपको ध्यान होगा कई वर्ष पहले आप खाते में जो पैसा चैक से जमा करते थे तो, यदि स्थानीय चैक हो तो दो से तीन दिन और यदि दूसरे शहर का होता था तो 15 से 20 दिन लग जाते थे. तब वह चैक दूसरे बैंक तक पहुंचता था और फिर Clearing हो कर पैसा मिलता था.

अब धीरे धीरे internet के कारण सभी बैंक आपस में नियमित रूप से जुड़े रहते हैं. आप आज कहीं का भी पैसा कहीं पर, कहीं का भी चैक किसी भी शाखा मे जमा कर सकते हैं क्योंकि सभी बैंक CBS से जुड़ी है. आपको याद होगा कुछ वर्ष पहले ही समस्त चैक बुक बदली गयी थीं और इस प्रणाली कि नई चैक बुक दी गयी थी. यह सब बैंक में पैसे की सुरक्षा के लिए किए गए प्रबंध हैं. इस प्रणाली के उपमार्ग (Bypass) के लिए बैंक के अधिकारियों का शामिल होना ज़रूरी है. और यही हुआ.

अब समझें कि क्या हुआ था?

नीरव मोदी और उनकी सहयोगी कंपनियों के मालिक मेहुल चौकसी ने अपनी कई कंपनियों के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक की ब्रेडी रोड शाखा के गोकुल नाथ शेट्टी, जो कि पंजाब नेशनल बैंक के उस समय के विदेशी विनिमय विभाग के उप महा प्रबन्धक थे. उनके साथ मिल कर इस प्रकार के LoU ले कर के सन 2011 से काम कर रहे हैं.

कभी पैसा दिया कभी नहीं पर यह LoU का काम चलता रहा. इस LoU को जारी करने के लिए कई प्रणाली को bypass भी किया गया. अब गोकुलनाथ शेट्टी के सेवा निवृत्त होने के बाद इन्हीं कंपनियों के प्रतिनिधि एक और LoU जब लेने गए तो नए अधिकारी ने माना कर दिया क्योंकि सभी औपचारिकताएं पूरी नहीं की जा रही थीं.

इस पर प्रतिनिधियों ने कहा कि हम तो वर्षों से ऐसे ही कर रहे हैं. तब जब पिछला हिसाब किताब देखा गया तो पता चला कि 44 मिलियन डॉलर की धांधली पायी गयी. अधिक छानबीन के बाद और 1.8 बिलियन डॉलर कि धांधली 2 हफ्ते बाद पता चल गयी. इस प्रकार से लगभग 11500 करोड़ रुपये का भुगतान बैंक ने कर दिया जिसके लिए कोई जमानत बैंक के पास है ही नहीं.

अब प्रश्न यह है कि आप गलती बैंक की मानेंगे कि उनके अधिकारियों का भ्रष्टाचार की. निश्चित रूप से बैंक के यदि सभी नियमों का आप पालन करते तो पहले तो यह LoU दिये ही नहीं जाते और यदि दिये गए तो SWIFT के तहत पकड़े जाते. यदि उससे भी निकलते तो CBS प्रणाली के नाते पकड़ में आ जाते.

अब जब बैंक ने तीनों स्तर की सुरक्षा प्रणाली को नकार दिया तो निश्चित रूप से बैंक प्रणाली का दोष न हो कर यह उन अधिकारियों का दोष है. अब यदि कोई रिज़र्व बैंक से अपनी जेब में नोट भर कर निकले और सुरक्षा कर्मचारी उसे नहीं पकड़े तो यह कमी रिज़र्व बैंक प्रणाली की तो नहीं मानी जाएगी.

दूसरे जब रोज़ आप नकदी को भी नहीं गिनेंगे तो आपको पकड़ में पैसा नहीं आएगा. अब क्या आप फिर प्रणाली को दोष देंगे ? खुद ही सोचिए !

महत्वपूर्ण प्रश्न है कि इस पैसे का भुगतान कौन करेगा. देखिये यह नुकसान की भरपाई तो पंजाब नेशनल बैंक ही करेगा. यह उस बैंक के उन कर्जे में आएगा जो डूब जाने की गिनती में आएगा.

मेरे व्यक्तिगत रूप से किसी भी सरकार पर दोष नहीं गिनाया जा सकता है क्योंकि अभी तक किसी भी सरकारी व्यक्ति का कोई पत्र सामने नहीं आया जिसमें बैंक को निर्देश दिये गए हो कि इस प्रणाली को बाइपास करके LoU दे दिया जाये. कोइ मौखिक हो तो पता नहीं पर वह भी अभी तक सामने नहीं आया है.

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