अटल सरकार के खिलाफ अपनाए हथकंडे फिर आज़मा रही कांग्रेस, पर तब नहीं था सोशल मीडिया

कई मित्र अक्सर मुझको टोक देते हैं कि पिछले तीन-साढ़े तीन वर्षों से केंद्र में भाजपा की सरकार है लेकिन मैं कांग्रेस के ख़िलाफ़ ही क्यों लिखता हूं? भाजपा के ख़िलाफ़ क्यों नहीं लिखता हूं?

उन मित्रों का मुझसे ऐसा प्रश्न करना, ऐसी अपेक्षा करना स्वाभाविक है. अतः आज उन सभी की जिज्ञासाओं का उत्तर दे रहा हूं.

पहली बात यह कि केन्द्र की मोदी सरकार से कुछ ऐसी अपेक्षाएं सबको थीं जो अभी भी पूर्ण नहीं हुई हैं. लेकिन इसी के साथ सच यह भी है कि इस सरकार में बहुत कुछ ऐसा भी हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ था तथा जिसको अनदेखा नहीं ही किया जा सकता है.

इन सबसे सर्वोपरि तथ्य यह है कि अपने अब तक के साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल में इस सरकार ने ऐसा कोई भी कुकर्म, कोई भी पाप नहीं किया है जिसके चलते यह कहा जा सके कि इस सरकार ने देश के साथ विश्वासघात किया, उसको धोखा दिया, उसके हितों का सौदा किया, उसकी पीठ में खंजर मार दिया.

जिन मित्रों की समझ में मेरी बात नहीं आयी हो उनको उदाहरण देकर समझाता हूं कि समझौता ब्लास्ट, मालेगांव ब्लास्ट, बाटला हाऊस काण्ड, इशरत जहां, सोहराबुद्दीन और रामसेतु पर हलफनामा से लेकर साम्प्रदायिक हिंसा विरोधी औरंगज़ेबी कानून तक (लम्बी सूची है ऐसे कारनामों की) सरीखा एक भी कुकर्म इस सरकार ने नहीं किया है.

2G, कोलगेट, कॉमनवेल्थ गेम्स आदि आदि… (बहुत लंबी सूची है) सरीखी सरकारी ख़ज़ाने की बड़ी लूट तो छोड़िए इस सरकार के किसी छोटे-मोटे भ्रष्टाचार का भी कोई उदाहरण आज तक सामने नहीं आया है.

अब बात यह कि कांग्रेस जब सत्ता में ही नहीं है तो फिर उसकी आलोचना क्यों?

तो इसका उत्तर यह है कि कांग्रेस स्वयं को इस सरकार का बेहतर विकल्प बताकर इसको उखाड़ फेंकने का अभियान चला रही है, तैयारी कर रही है.

उसको ऐसा करना भी चाहिए. यह उसका लोकतांत्रिक अधिकार भी है और दायित्व भी है. लेकिन वो आजतक अपनी एक भी ऐसी योजना, एक भी ऐसा कार्यक्रम, एक भी ऐसी नीति देश के समक्ष नहीं रख सकी है जो उसको वर्तमान सरकार का बेहतर विकल्प सिद्ध कर सके.

इसके बजाय अभी तक इसके लिए जो हथकण्डे कांग्रेस अपना रही है. जैसा झूठ वो देश से बोल रही है. उसे देखकर 2014 से पहले की यादें ताज़ा हो रही हैं.

क्योंकि 1998 से 2004 के मध्य अटल सरकार के खिलाफ भी ऐसा ही कांग्रेसी अभियान तब भी चला था. यही NDTV, यही ABP (तब स्टार न्यूज नाम था), यही आजतक आदि उस अभियान के मुख्य संचालक बने थे.

क्योंकि तब सोशल मीडिया नहीं था इसलिए ये सब बहुत ताकतवर थे. अटल जी के खिलाफ इनका अभियान सफल हुआ था. दूसरों की क्या कहूं मैं स्वयं शिकार बन गया था इनके अभियान का.

परिणामस्वरूप अटल जी की सत्ता से विदाई हो गई थी. इसका परिणाम क्या हुआ यह हम सबने देखा ही नहीं भोगा भी है.

अतः अंत में बस यही कहूंगा कि… इसीलिए मेरा लेखन जिस दिशा में चल रहा है उसी दिशा में चलता रहेगा क्योंकि 2004 में दूध का जला हुआ हूं, इसलिए अब मट्ठा भी फूंक फूंक कर पी रहा हूं.

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