भारतीय कम्युनिस्ट : हमेशा सत्ता के साथ ‘लिव-इन’ में रह, खुद को कहते रहे ‘लेफ्ट’

जैसे ही आप ‘मोदी राज’… ‘योगी राज’ जैसे शब्द लिखते-बोलते, इस्तेमाल करते हैं : आप राजनीति और सत्ता में दार्शनिक विचारधारा और राजनैतिक आंदोलन की बड़ी अवधारणा से दूर हो, व्यक्तिवादी हो जाते हैं. संकीर्णता के शिकार हो जाते हैं, जबकि आपका इरादा ऐसा कुछ होता नहीं.

गलती आपकी नहीं है. यह खेल गिरोहों का है जो आपके इस्तेमाल के लिए ऐसे शब्दों को गढ़ते रहे हैं.

आप-हम खेल के उस्ताद : गढ़े गये गिरोही शब्दों को… मेरा है… मेरा है कहते हुए, हर बार की तरह ले उड़ते हैं.

यह तो आज की बात है, एक उदाहरण पुराना और ऐतिहासिक देखिए :

फ्रांस की क्रांति से पैदा हुए शब्द ‘लेफ्ट-राइट’ यह बताते हैं कि जो सत्ता के खिलाफ रहे वे बाएं बैठे और वामपंथी कहलाये. जिन्होंने राजा का साथ दिया वे दक्षिणपंथी कहलाते हुए राजा के राइट बैठे.

भारत में क्या हुआ?

1947 के नेहरू राज से लेकर मनमोहन सिंह के खड़ाऊ शासन तक… भारतीय कम्युनिस्ट हमेशा सत्ता के साथ रहे. सत्ता में समर्थन के नाम पर लिव-इन रिश्ते में रहे. यानी राजा के साथ रहे : फिर भी खुद के लिए फर्जी तरीके से वामपंथी शब्द इस्तेमाल करते हुए… भारतीय राष्ट्रवाद को दक्षिणपंथ उर्फ राइट का नाम दिया.

भारतीय राष्ट्रवाद आजन्म सर्वहारा समाज के साथ रहा. गरीबों-मज़लूमों-मूलनिवासियों की आवाज रहा. जमीन-धूल-मिट्टी से लेकर गांव-समाज-व्यवहार की बात करता रहा. सत्ता के सदा खिलाफ रहा… फिर भी उसके लिए दक्षिणपंथ शब्द!

राष्ट्रवाद की जगह फर्जी तरह से दक्षिणपंथ नाम गिरोहों ने आपके लिए गढ़ा, आपने आदतन उसे खुद का कहते हुए उठाया.

आज वो आपसे सवाल करते हैं : हे दक्खिनपंथी जी! आपके राष्ट्रवाद की परिभाषा क्या है? आपका राष्ट्रवाद तो काल्पनिक है! आपका राष्ट्रवाद तो धार्मिक है!

और आप इधर-उधर से तर्कों की व्यवस्था करते नजर आते हैं.

विरोध की नकारात्मक कोख से जन्मी वामपंथी विचारधारा को खुद के अस्तित्व के लिए सामने एक चुनौती की जरूरत होती है.

यहां भारत में आयात के बाद इस विदेशी दर्शन ने भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को ही दुश्मन करार दे… उसका अपने अनुरूप फर्जी नामकरण किया दक्षिणपंथ.

गिरोह के वैचारिक-दार्शनिक फ्रॉड गढ़ने की अदा पुरानी है. बुद्धिखोरी की आड़ में झूठ-लफ्फाज़ी की दुकानदारी ही हकीकती कहानी है…

हालिया जंगलों से उठते फर्जी पेटिकोटों से लेकर फ्रांसीसी क्रांति की पैदाइश… लेफ्ट-राइट शब्दों के फर्जी इम्पोर्ट और सप्लाई तक.

भारतीय राष्ट्रवाद को पता होना चाहिए कि उनके सामने का गिरोह किस काली-झूठी आयातित अवैध मिट्टी का मिलन है. उसे देशी महक के पसीने में गढ़ने की तैयारी करिये… उसकी गढ़ी लफ्फाज़ियों से परहेज़ रखिये.

भारतीय राष्ट्रवाद ही वह वैचारिक-राजनैतिक स्तंभ है जो हमेशा भारत में सर्वहारा… अनुसूचित जातियों, आदिवासियों, निर्बलों, किसानों के साथ खड़ा रहा है.

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