आवश्यक है जल खनन पर नियन्त्रण, वरना उजड़ जाएंगे शहर, कस्बे और गांव

वर्ष 2012 में मैंने कहा था – भारत की सूचना प्रौद्योगिकी का केन्द्र बैंगलौर अत्यन्त शीघ्र ‘नरक’ बनने वाला है… और केवल 6 वर्ष में मेरी बात सत्य हो रही है.

क्यों? कैसे?

मैं वहाँ देखता था प्रतिदिन विभिन्न स्थानों पर Borewell Drilling Machine से खुदाई चल रही होती थी. कुछ स्थानीय लोगों से बातचीत में पता चला कि बैंगलौर में कई स्थानों पर 1500-1800 फीट की गहराई पर पानी मिलता है.

स्वाभाविक है कि मानवीय श्रम की पारम्परिक विधि से तो कई महीनों में जाकर खुदाई पूरी होगी जबकि ये ड्रिलिंग मशीन मात्र 2-3 दिन में 1500-2000 फीट की खुदाई कर डालती है.

इतना कुछ जान लेने के बाद मेरी छठी इन्द्रिय ने संकेत देने आरम्भ किए और मैं विचार करने लगा:

बैंगलौर में प्रतिदिन अनुमानत: 50 स्थानों पर ड्रिलिंग मशीन से खुदाई चल रही होती है. एक स्थान पर खुदाई समाप्त होती है दूसरे स्थान पर आरम्भ…

बहुत से लोगों ने छोटे-छोटे प्लॉट में पम्प लगा रखे हैं, कुछ टैंकर लगा रखे हैं और 24 घण्टे भूमिगत जल निकाल निकाल कर टैंकर भर-भर कर पानी की सप्लाई करते हैं.

बहुत सी कम्पनियों के अपने कैम्पस से जो पानी प्राप्त होता है वह पर्याप्त नहीं होता और वे बाहर से पानी के टैंकर मँगाते हैं.

मैंने विचार किया :

यदि इसी गति से ‘पानी की माइनिंग’ चलती रही तो भूमिगत जल समाप्त होना निश्चित है. जब भूमिगत जल समाप्त हो गया तो यहाँ रहने वाले लोग, यहाँ स्थापित कम्पनियों के कार्यालय आदि इन सबकी जल आपूर्त्ति कैसे होगी?

पीने के लिए तो पानी की बोतलें और जार मँगा लोगे पर नहाने-धोने, लघुशंका के लिए भी पानी की आवश्यकता होती है. बाहर से कितने टैंकर मँगवाए जा सकते हैं, और कितनी दूर से?

दिनभर टैंकरों के आवागमन से यातायात की समस्या और विकराल होगी. जाम की समस्या से जूझ रहा महानगर और बुरी तरह से जाम में फँसकर स्थिर हो जाएगा.

यह महानगर न तो रहने योग्य रहेगा, न काम करने योग्य… और तब पलायन आरम्भ होगा… और यह स्थान निर्जन हो जाएगा.

Bengaluru alert! Why India’s IT capital may face Cape Town fate, leaving millions without drinking water.

समस्या गम्भीर है विकराल रूप लेते देर नहीं लगेगी… केवल बैंगलौर ही नहीं… अन्य सभी महानगरों, नगरों और गाँवों में… यत्र तत्र सर्वत्र…

जल खनन पर नियन्त्रण आवश्यक है WATER MINING MUST BE STOPPED.

जल संसाधन के उपयोग और उपभोग के सम्बन्ध में अत्यन्त शीघ्र कानून बनने चाहिए.

किसी भी क्षेत्र में प्रति वर्ग किलोमीटर में निजी सम्पत्ति में ट्यूबवैल (बोरवैल) की अनुमति सम्बन्धी कठोर कानून बनाने चाहिए.

कल्पना कीजिए आपका पड़ोसी भूमिगत जल का दोहन करता है तो केवल उसकी भूमि का जलस्तर नहीं गिरेगा… जलस्तर आपकी भूमि के नीचे भी गिरेगा.

स्पष्ट है कि आपके जल संसाधन की चोरी हो रही है जिसके भयंकर परिणाम आपके बच्चों को ही भुगतने पड़ेंगे.

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