आयुर्वेद आशीर्वाद : भगवान शिव को अतिप्रिय भांग

आज अनेक शिव मंदिरों में भगवान शिव का श्रृंगार भांग से किया जाएगा. भगवान शिव को भाँग अतिप्रिय है तो यह कोई साधारण पौधा नहीं होगा.

भांग के नर पौधे के पत्तों को सुखाकर भांग तैयार की जाती है. भांग के मादा पौधों की रालीय पुष्प मंजरियों को सुखाकर गांजा तैयार किया जाता है.

भांग की शाखाओं और पत्तों पर जमे राल के समान पदार्थ को चरस कहते हैं. भांग की खेती प्राचीन समय से ही भारतवर्ष में की जाती रही है. इसकी खेती करने वाले को पुराने समय में पणि कहते थे.

अगर आपको कहें कि भांग के पौधे से कपड़े, प्लास्टिक, कागज, बिल्डिंग मटेरियल, और बायोडीजल भी तैयार किए जाते हैं, तो कम लोग ही विश्वास करेंगे? पर यह सच है.

लगभग 8 हजार पूर्व चीनियों ने भांग से कपड़े बनाने की विधि को विकसित कर लिया था. वर्तमान में चीनियों ने इससे बने कपड़ों का उपयोग फैशन के लिए शुरू किया. यही नहीं, भांग के पौधों से जूते और जीन्स भी तैयार किए जाते हैं.

करीब 2 हजार वर्ष पूर्व से इस पौधे का इस्तेमाल कागज बनाने के लिए होता रहा है. इसका उत्पादन भले ही कम हो, लेकिन इस कागज की खासियत यह है कि रिन्यूबल होता है. भांग के पौधे से बिल्डिंग मैटेरियल भी बनाए जाते हैं.

नीदरलैन्ड और आयरलैन्ड में कम्पनियां इन पौधों से बिल्डिंग मैटेरियल जैसे फाइबर बोर्ड, प्रेस बोर्ड और हेम्पक्रीट जैसे प्रोडक्ट्स का उत्पादन करती हैं.

40 के दशक में कार निर्माता कम्पनी फोर्ड ने भांग के पौधे से बनी प्लास्टिक से एक प्रोटोटाइप कार बनाने में सफलता हासिल की थी. हालांकि इस कार को कभी बाजार के लिए नहीं उतारा गया. फोटो में हेनरी फोर्ड इस कार पर कुल्हाड़ी से वार करते दिखाई पड़ रहे हैं.

इस पौधे के जड़ और बीज में मौजूद तेल से बायोडीजल बनाया जा सकता है. पर दुर्भाग्य से यह पौधा इतना कुख्यात है कि इस योजना पर कोई भी देश या प्रशासन ठीक से अमल नहीं कर रहा.

औषधीय लाभ

भांग में इंफ्लैमेटरी तथा एनेलजेसिक केमिकल्स होते हैं जिसके शरीर के दर्द में तुरंत आराम मिलता है. एक सीमित मात्रा में भांग का प्रयोग करने से मांसपेशियों का दर्द, आर्थराइटिस (गठिया) के दर्द में तुरंत राहत मिलती है.

बहुत तेज बुखार होने पर थोड़ी सी भांग पीने से शरीर का तापमान सामान्य होकर फीवर उतर जाता है. सेक्सुअल प्रॉब्लम्स (जैसे प्राइवेट पार्ट में उत्तेजना न होने, यौन इच्छा कम होना आदि) होने पर भी आयुर्वेद में भांग का सेवन बताया जाता है.

किसी भी तरह की चिंता, अवसाद तथा डिप्रेशन संबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए भांग के सेवन रामबाण उपाय है. यदि किसी कारण से भूख लगना बंद हो गई हो तो सीमित मात्रा में भांग का सेवन काली मिर्च के साथ करने से भूख बढ़ जाती है.

लगातार सिर में दर्द रहने पर भांग की पत्तियों के रस का अर्क बनाकर दो-तीन बूंद कान में डालने से सिरदर्द हमेशा के लिए चला जाता है. मानसिक संतुलन खोने पर भांग में हींग मिलाकर सेवन करवाई जाती है. भांग के नियमित सेवन से कैंसर से शरीर में हुए घाव भी जल्दी ठीक हो जाते हैं.

सावधानियां

डायबिटीज़ के रोगियों, हार्ट पेशेंट्स, गर्भवती महिला, बच्चों तथा बुजुर्गों को भांग का सेवन नहीं करना चाहिए. भांग की खेती बिना शासन के अनुमति करना क़ानूनी अपराध है.

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