अमेरिका और चीन के लिए बचा रखने की चीज़ है आक्रामकता-अभिमान

कुछ शिकायत दिखाई दी कि मोदीजी ने ओमान के सुल्तान को बार बार हिज़ एक्सेलेंसी कह कर संबोधित किया.

जब कि ओमान एक पिद्दी सा देश है और वही मोदीजी अमेरिकी राष्ट्रपति को बार बार बराक कह कर संबोधित कह रहे थे.

तो क्या मोदीजी ओमान जैसे देश के सामने झुक रहे थे?

ओबामा को बराक कहना एक बोल्ड निर्णय था. पर वह भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन था. कायदे से मिस्टर प्रेसिडेंट कहना बनता था.

पर वह मोदीजी का कैलकुलेशन था… और वह कोई मोदीजी का दोस्ताना नहीं था… अमेरिका से बराबरी का हिसाब माँगने का तरीका था.

ओबामा का भारत दौरा एक शक्ति प्रदर्शन था. वह संबंध सुधारने की प्रक्रिया नहीं थी. ओबामा की भारत को हड़काने की कवायद थी.

आपने दो बातें नोटिस की होंगी… एक बार भी ओबामा ने आतंक से लड़ने की बात नहीं की. और दूसरी ओर भारत को दबे शब्दों में टुकड़े-टुकड़े में तोड़ने की धमकी भी दी.

बदले में मोदीजी ने उसे बराक-बराक कह कर जता दिया कि मैं तुमसे नहीं झुकता… हम बराबरी के देश हैं.

यह डिप्लोमेटिक शो-डाउन था… चल गया… क्योंकि एक तो ओबामा डेमोक्रैट है, और डेमोक्रेट्स कभी भारत के पक्ष में यूँ भी नहीं हो सकते. तो उसकी खुशी-नाराज़गी की परवाह करके भी कुछ मिलना नहीं था.

दूसरे, रिपब्लिकन्स आ गए तो ओबामा को बुरा लगे या अच्छा, वह गया चूल्हे में.

तीसरा, कुछ भी है तो ओबामा डेमोक्रेटिकली इलेक्टेड रिप्रेजेन्टेटिव है… और यूँ भी अमेरिकन मीडिया अपने प्रेजिडेंट को कुत्ते जैसा दुत्कारती है… उन्हें आदत है…

पर ओमान का सुल्तान राजा है, उसे हिज़ एक्सेलेंसी कहलाने का अधिकार है.

फिर आप उससे संबंध सुधारने गए हैं. उससे बराबरी करके मिलना क्या है?

यूँ भी छोटों से बराबरी करने में कोई इज्जत नहीं बढ़नी. यहाँ विनम्रता ही सोहती है… arrogance-आक्रामकता-अभिमान अमेरिका और चीन के लिए बचा रखने की चीज़ है.

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