स्वरोज़गार अभियान : सोशल मीडिया से उठी आवाज़, आओ करें कथनी और करनी एक

फेसबुकिया लंतरानी पेलना कई बार बहुत महंगा पड़ जाता है.

रजाई में घुस के पोस्ट पेलने और ज़मीन में उतर के काम करने में फर्क होता है.

मूडी जी ने कह दिया पकौड़े बेचो… कुछ भाई लोग आ खड़े हुए हैं… लाओ जी अब तो चाय पकौड़े ही बेचने हैं. लाओ लगवाओ हमारा स्टाल…

आपको सूचित करते हुए ये हर्ष हो रहा है कि अभी पिछले ही हफ्ते हमारे एक मित्र ने एक मित्र का स्टाल लगवाया है एक जगह…

दिन-रात मेहनत पुरुषार्थ तो वो लड़का कर रहा है पर मूल पूंजी जो कि सिर्फ 10,000 रूपए थी, वो उसके पास नहीं थी… वो हमारे उन मित्र ने लगाई…

कल मेरे पास फोन आया, दद्दा मेरा भी लगवा दो यार… भोत परेशान हूँ. ठेला ही लगा लूंगा. बस एक बार stand कर दो, कमा के भर दूंगा.

मैंने उस शहर के अपने फेसबुकिया मित्रों से बात की.

सारी बात बताई. बोला कि पहले बंदे के credentials check करो. अगर सही है, शराबी, जुआरी, सट्टेबाज और ड्रग एडिक्ट न हो तो सहायता करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि ओके दद्दा, चेक कर लेते हैं और अगर बंदा सही है तो हम 5-7 स्थानीय मित्र मिल के स्टाल लगवा देंगे, चालू करा देंगे.

फिर उन्होंने ही सुझाव दिया कि दद्दा इतने लोग हैं अपन आपस में जुड़े हुए… एक कोष बना लो… ऐसे ही युवाओं की मदद करने के लिए.

जिस किसी को कोई फड़, काउंटर, स्टाल, ठेला लगाने के लिए प्रारंभिक मदद चाहिए उस कोष में से हमसे ले ले. महीने दो महीने में कमा के भर दे जिस से कि आगे फिर किसी और की मदद हम कर सकें.

मुझे तो ये आईडिया बहुत पसंद आया. पर अपनी एक समस्या ये है कि बातों की लंतरानी चाहे जितनी पिलवा लो, काम करने में अपन भी थोड़ा कम ही विश्वास करते हैं.

सो इस कोष का अध्यक्ष और कर्ता धर्ता किसे बनाया जाए. मेरे सर्किल में तो मेरे समेत चार आदमी और चारों लफ्फाज़… काम नही करेंगे बात चाहे जितनी करा लो… ये तीनो किसी काम के नहीं.

इसलिए मेरा सुझाव है कि या तो सुभाष शर्मा जी गाज़ियाबाद वाले, या फिर भाई तरुण बनर्जी कानपुर वाले या देवनाथ द्विवेदी सर लख़नऊ वाले, इनमें से किसी को ये काम सौंप दिया जाए.

या फिर कोई नाम आप सुझाओ (preferably retired, अनुभवी, उम्रदराज कोई महिला हो तो और बेहतर) या कोई खुद Volunteer करे आगे आये कि मैं सम्हालूँगा…

कोष की देखभाल उसके जिम्मे… और जिसकी मदद करनी है उसका verification कर स्थानीय मदद कर उसका स्टाल लगवाने की जिम्मेवारी स्थानीय फेसबुकियों की…

अब इस सार्वजनिक मंच पर आप लोग इस आईडिया पर विमर्श कीजिये. इसके pros and cons, कमी-खूबी डिस्कस कीजिये.

जरूरी नहीं कि आप इससे सहमत ही हों. सीधे खारिज भी कर सकते हैं और इससे बेहतर विकल्प भी सुझा सकते हैं.

सुझाव आमंत्रित हैं.

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