चौकोर रोटी

बहुत दिनों से टिफिन में सब्जी रोटी ले जाते ले जाते बोर हो गई थी. मम्मी को ऑफिस के काम से जल्दी निकलना पड़ रहा था इसलिए कुछ नई डिश बनाने का समय नहीं मिल पा रहा था.

फिर भी परेशान होकर एक दिन मम्मी से कह दिया- क्या माँ रोज रोज वही मुँह चिढ़ाती भिंडी और कभी ना खत्म होने वाली रोटी, फिर आपकी डाँट खाओ कि खाना फिनिश नहीं किया.

मम्मी ने कुछ नहीं कहा फिर रोटी बनाने लगी, लेकिन मैंने देखा इस बार रोटी का आकार छोटा था, छोटा बोले तो बहुत ही छोटा, पूड़ी से भी छोटा. मैं कभी मम्मी को देखती कभी रोटी को.

मैंने इतनी छोटी रोटी कभी नहीं देखी थी. गैस पर गोल-मटोल सी फूली हुई छोटी-छोटी रोटियाँ मुझे वैसी ही लग रही थी, जैसी मैं अपनी छोटी बहन के साथ किचन-किचन खेलते समय इमेजिन करती हूँ.

मम्मी ने आलू को भी गोल-गोल काटकर बनाया था. टिफिन में मम्मी ने वही दोनों चीजे रखीं. मैंने स्कूल में अपने दोस्तों को रोटी दिखा-दिखाकर खाई, खाने का स्वाद वही था लेकिन मज़ा दोगुना हो गया था. हम सब बहुत हँस रहे थे और खुश हो रहे थे.

घर आकर मम्मी को बहुत प्यार किया और बताया कि कैसे सब छोटी-छोटी रोटी देखकर खुश हो रहे थे. आपको तो पता है मम्मी की आदत फिर एक भारी-सा डायलॉग मार दिया. जब जीवन में एकरसता आ जाए और कोई नया विकल्प ना मिलें, तो या तो उन्हीं कामों को नए तरीके से कर के देखो, या अपना देखने का नज़रिया बदल दो.

जो अंकल या आँटी इसे पढ़ें मुझे ज़रूर बताएँ, मम्मी की बात का क्या मतलब हुआ? जिसका जवाब मुझे पसंद आएगा उनको मैं मम्मी से चोकोर रोटी बनवाकर खिलाऊँगी.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY