बोल न हल्के हल्के : कोई मीठी बात करें…

सारी गांठे खुल जाएंगी
आवाज़ की इक फूंक से
बातें दो चार बोल दो

सन्नाटों में बहती हवा की
धुन भी
लगती है कसैली
एक दस्तक से बज उठते हैं संगीत

सौदा चुप का है
चुप चुप भी बीत जाएगी उम्र
क्यों न बातों का सौदा करें
बोल बिक जाएं
बोल के मोल

स्वर का कंकड़ मार के
फोड़ दो छत्ते शहद के
आंखों आंखों में फिसल जाएगी
सौ साल जितनी लम्बी रात,
कितने दिनों से
बादामी ख़्वाब
मख़मली नींद में
सोये नहीं जो,
इनको सुला दें…

– राखी सिंह

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