मोदी सरकार के खिलाफ आज विपक्ष के पास एक ही हथियार है, दुष्प्रचार

हर साल ऐसी बहुत सी रिपोर्ट्स आती हैं जो कहती हैं कि पूरे विश्व की 90% संपत्ति केवल 1% लोगों के पास है. अमीर गरीब की खाई बढ़ती जा रही है. तमाम प्राकृतिक संसाधन कुछेक लोगों की मुट्ठी में हैं.

हमारे रवीश कुमार अक्सर प्राइम टाइम में इस बात की चर्चा करते हैं कि विमुद्रीकरण के बाद अम्बानी, अडानी की संपत्ति दुगुनी हो गयी लेकिन आम आदमी की संपत्ति में कमी दर्ज हुई है.

आखिर ये अम्बानी अडानी की संपत्ति क्या है? कहा जाता है कि मुकेश अम्बानी की कुल संपत्ति 40 बिलियन डॉलर है. बिल गेट्स की 90 बिलियन डॉलर.

मुकेश जी की ये संपत्ति किस रूप में है? क्या उनके पास सोना है, टनों सोना? ज़मीन है 40 बिलियन डॉलर की?

नकद तो नहीं होंगे, फिर ये रकम किस रूप में है जो पिछले एक साल में दुगुनी हो गई. डिमॉनेटिजेशन ने बाकी व्यापारियों को तबाह कर दिया लेकिन मुकेश जी को आबाद कर दिया?

बहुत सीधा और साधारण उत्तर है रिलायंस के शेयर.

मुकेश अम्बानी की असल संपत्ति उनकी कंपनी है. रिलायंस के शेयर डिमॉनेटिजेशन के बाद से एक साल में दुगुने हो गए. मुकेश जी की संपत्ति उसी अनुपात में बढ़ गयी.

और बाज लोगों ने ऐसा हल्ला मचाया की मुकेश जी ने कोई पाप करके पैसा दुगुना कर लिया.

बजट के बाद रिलायंस के शेयर 10% नीचे आ गए. उनको करीब 50 हजार करोड़ का नुकसान हो गया. लेकिन उन्होंने हल्ला नहीं काट लिया.

अम्बानी अडानी, बिल गेट्स, वारेन बफेट, अजीम प्रेम जी, नारायण मूर्ति और अब स्वामी रामदेव अपनी अपनी कंपनियों के द्वारा विश्व के धनी व्यक्ति बने हैं.

बहुतों ने ऊपर जाने के लिए गड़बड़ भी की होगी. काला धन भी कमाया होगा. साफ़ व्यापार भारत में वैसे भी मुमकिन नहीं रहा.

लेकिन शेयर बढ़ने की वजह से संपत्ति बढ़ने में लोग मोदी सरकार को घसीट लाएं, समझ नहीं आता.

रवीश इशारो में बात करते हैं, हिंट सरकाते हैं, जानते हैं लोग भोले हैं. दुष्प्रचार का शिकार आज नहीं तो कल हो ही जायेंगे.

मोदी सरकार के खिलाफ आज विपक्ष के पास एक ही हथियार है, दुष्प्रचार.

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