जहाँ मानवता ज़िंदा है, वहीं जन्मेगी नई स्वस्थ पीढ़ी

8 फरवरी 2018 गुरुवार की अर्ध रात्रि. धार्मिक नगरी वाराणसी. ब्रैंडफोर्ड (ब्रिटेन) के प्रवासी साफ्टवेयर इंजीनियर अमित पुरोहित अपनी गर्भवती पत्नी संध्या पुरोहित को लेकर वाराणसी के सिगरा स्थित एक प्राइवेट हास्पिटल में पहुंचते है. संध्या प्रसव पीड़ा से गुजर रही है.

अस्पताल पहुंचने पर अमित को प्रस्तावित खर्च का लंबा चौड़ा एस्टीमेट थमा कर एडवांस जमा कराने का कहा जाता है. अमित जैसे ही पैसे निकालने पहुंचते है तो मालूम चलता है कि उनका एटीएम ब्लाक हो गया है. इस पर हास्पिटल प्रबंधन इलाज करने से हाथ खड़े कर देता है.

अमित पुरोहित बदहवास हो जाते है. वहां पास खड़े लोग भी लाचार नजर आते हैं. मानवता कोने में दुबकी नजर आती है. ऐसे में इस लाचार दंपत्ति की मदद को आगे आता है एक ऑटो चालक मुन्ना.

अस्पताल के बाहर खड़े ऑटोरिक्शा चालक मुन्ना अमित को सरकारी अस्पताल से सुरक्षित प्रसव कराने का भरोसा दिलाते हैं. वह उन्हें अपने ऑटो में बिठा कर एक महिला स्वास्थ्यकर्मी आशा के पास ले जाते हैं. आशा उन्हें लेकर रात एक बजे वाराणसी के सरकारी अस्पताल पहुंचती है. जहाँ तैनात टीम तुरंत सक्रिय हो जाती है.

मुन्ना परिवार के लिए अपने घर से भोजन की व्यवस्था करता है. सुबह संध्या एक स्वस्थ बेटे को जन्म देती है. अब जच्चा बच्चा दोनों स्वस्थ है.

तो मित्रों यह जान लेवें कि आर्थिक रूप से संपन्न व्यक्ति को भी कभी-कभी कौड़ियों का मोहताज होना पड़ जाता है. अतः गरीब से गरीब व्यक्ति से संवाद बनाना सीखें. साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करें कि हम सबके भीतर भी वह भाव जिंदा रखे जो मुन्ना ऑटो चालक के भीतर दिखा.

वर्तमान दौर में इस भाव का ही संकट है. यह भाव प्रकट होते ही तमाम दुश्वारियां खतम हो जाती हैं. सोशल स्टेटस, पैसा, पॉवर सब क्षणिक है. करुणा, उदारता, मानव प्रेम महत्वपूर्ण है. मुन्ना और आशा के जज़्बे को सलाम. सभी के लिए अनुकरणीय उनकी मानव प्रेम की भावना को नमन!

फोटो में जिस महिला की गोद में नवजात शिशु है उनका नाम संध्या है, उनके साथ स्वस्थ्य कर्मी आशा. जो दूसरी ओर खड़े है वो ऑटो चालक मुन्ना है.

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY