तीन शब्द तीन ताल

सुनो, मुझे तब सुनने हैं यह तीन शब्द
जब हम गंगा में नौका विहार कर रहे होंगे

उस जगह जहाँ गंगा दूर दूर तक नज़र आती है
साफ़ निर्मल स्वच्छ
जहाँ सामने किनारे पर हो एक शिव मंदिर
नज़र आ रहा हो शिवलिंग
और उस पर पड़े दो कमल के फूल

सोचो, तब यह तीन शब्द तीन ताल हो जाएँगे
नीचे पानी की लहरें रक़्स करती हुई
एक से एक ताल मिला चलती हुई

ऊपर उगता हुआ सूर्य
सूर्य की किरणें राग भैरवी अलापती हुई
शिवलिंग पर गागर में से गिरता टप-टप गंगा जल
यूँ तो तुम्हारा कहना
लव यू
मुझे हमेशा ही किसी और दुनिया का वासी बना देता है
फिर भी मुझे सुनना है वहाँ
गंगा के बीच, नाव में बैठे, तुम्हारी हल्की सी छुअन के साथ
और ब्रह्माण्ड की असीम शांति को जीना है
कण-कण को जुड़े, गाते, नृत्य करते देखना है
सिर्फ़ प्रेम ही है जो एक बिंदु को इतना विस्तारित कर देता है
कि वो सारी कायनात हो जाए
और सारी कायनात हो जाए शिवमयी, प्रेममयी

या फिर किन्हीं हरी-हरी वादियों में
जंगल के बीचो-बीच
किसी इकहरी पगडंडी पे
ऊँचे-ऊँचे पर्वतों के साए में
पक्षियों की कू कू
सीली-सीली सी हवाएँ
और तुम मेरा हाथ थाम
मेरी आँखों में झाँक
कहो
लव यू, सोहनिए

एक-एक पत्ता मुस्कुरा कर देखने लगे
परिंदे ख़ामोश हो जाएँ एक पल के लिए
फ़रिश्ते चलते-चलते ठहर जाएँ
पहाड़ अदब से अपना सर झुका लें
और वादियाँ नाच उठें
ता थय्या ता थय्या

प्रेम ही है जिस में सारी कायनात सिमट कर
किसी की बाहों में आ जाती है
एक बिंदु हो जाती है
आनंद हो जाती है
शांति हो जाती है

यूँ तो मैं बंद कमरे में भी देख लेती मैं हूँ पूरा ब्रह्माण्ड
जब से मुझे हुआ है तुमसे प्रेम
पर वो अहसास गंगा के बीच नौका में बैठे
तुम्हारे संग
या फिर जंगल की सूनी पगडंडी पे टहलते
कुछ अलग ही होंगे
Ambience makes much difference, you know

बंद कमरे में बैठ
चाय पीते- पीते
मैं सुन लूँगी तुम्हारी वो सब बातें
जो तुम अक्सर अधूरी छोड़ देते हो
यह कहते -कहते

कभी मिले तो बताऊँगा…

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