लंबे समय तक बेरोज़गार और गरीब बने रहना भी बड़ी मेहनत का काम

मेरे पिता जी कहा करते थे कि गरीब होना कोई बड़ी बात नहीं. कोई भी गरीब हो सकता है.

गरीब घर में, गरीब माँ बाप की संतान हो सकता है… अमीर से अचानक गरीब हो सकता है… गरीबी कोई बहुत बुरी चीज़ नहीं…

पर लंबे समय तक गरीब या यूं कहें कि दरिद्र बने रहना बड़ा टेढ़ा काम है… ये बहुत मुश्किल काम है.

जैसे सफलता के शिखर पर टिके रहने के लिए बहुत मेहनत बड़ा पुरुषार्थ लगता है, दिन रात प्रयास करना पड़ता है…

उसी प्रकार लंबे समय तक दरिद्र बने रहने के लिए भी बड़ी मेहनत लगती है… ये एक full time Job है… बहुत मेहनत करनी पड़ती है…

वरना संपन्नता ऐसी चीज़ है कि वो आ ही जाती है… संपन्नता को अपने दरवाजे पर रोके रखना बड़ा टेढ़ा काम है… वो ज़रा सा मौका पाते ही अंदर घुस ही आती है… बहुत मेहनत, बड़े प्रयास बड़े कठिन परिश्रम से ही आप दरिद्र रह पाते हैं.

दरिद्रता के लिए जो सबसे बड़ा ingridient है वो है false ego… झूठा खोखला अहम… एक घटिया दकियानूसी thought process… हाय लोग क्या कहेंगे… समाज क्या कहेगा… ऐसे खयालात…

दरिद्रता के लिए बहुत ज़रूरी है कि अपने हालात के लिए हमेशा किसी दूसरे को दोषी ठहराते रहें, हमेशा complain करते रहें, रोते रहें, सरकार की नीतियों को दोष देते रहे, अपनी फूटी किस्मत को दोष देते रहें… पर करें कुछ न…

दरिद्र आदमी इसके अलावा एक अन्य काम में भी बहुत माहिर होता है. दरिद्रता में कैसे survive करना है इसपर उसकी बहुत जबरदस्त R&D होती है… बोले तो Research and Development… वो बहुत कम पैसे और संसाधनों में लंबे समय तक जीवित रहने पर thesis लिख सकता है.

उसी तरह बेरोज़गारी है… लंबे समय तक बेरोज़गार रहने के लिए भी आपको दिन रात प्रयास करना पड़ता है. लंबे समय तक बेरोज़गार रहना आसान नहीं…

हर आदमी लंबे समय तक बेरोज़गार नहीं रह सकता… उसके लिए एक नंबर का काहिल, हरामखोर, और अलहदी होना पड़ता है… चिर बेरोज़गार आदमी अपनी बेरोजगारी को justify करने के लिए रोज़ एक नया बहाना खोज लेता है.

उच्च कुल गोत्र में जन्म लेना, बहुत बड़ी (फ़र्ज़ी) डिग्री लेना, बहुत बड़ी ego होना… ऐसे गुणों से सम्पन्न हो तो काम आसान हो जाता है…

लंबे समय तक बेरोज़गार रहने के लिए आपको, वर्तमान सरकार की निशदिन आलोचना, आरक्षण, जाति प्रथा, समाजवाद (हाय अडानी, हाय अम्बानी), दलित उत्पीड़न, इत्यादि मंत्रों का भी निरंतर जाप करना पड़ता है… झूठी false ego होना भी बहुत जरूरी है…

इसके अलावा एक बहुत ज़रूरी item और होनी चाहिए लंबे समय तक बेरोज़गार रहने के लिए… 52 बीघा पुदीना… दरिद्र, शिक्षित बेरोज़गार की छत पर अक्सर 52 बीघा पुदीना लगा होता है जो सरकार की गलत नीतियों के कारण सूख रहा है और निकम्मी सरकार कुछ नहीं कर रही…

चिर बेरोज़गार से अगर पूछो कि तुम साले अपनी छत पर 52 बीघा पुदीना आखिर लगाए क्यों???

वो बताएगा कि आप समझते नहीं… पुदीना is my passion… इस धरती पर मेरा जन्म छतरपे 52 बीघा पुदीना रोपने के लिए ही हुआ है… सरकार ने आखिर छत हमें दी ही क्यों? छत है तभी तो हमने उसपे पुदीना लगाया… जब सरकार जानती है कि छत पे पुदीना झुरा जाता है, तो आखिर सरकार ने हमारे सिर के ऊपर से छत हटाई क्यों नहीं?

कब हटाएगी???

आखिर हमने 2014 में वोट किसलिए दिया था???

और ये जान लीजिए कि अगर मेरा ये 52 बीघा पुदीना झुरा गया तो मैं 2019 में देख लूंगा…

यदि आपके इर्दगिर्द कोई ऐसा व्यक्ति है जो लंबेsssss… समय से दरिद्र और बेरोज़गार है तो सबसे पहले उसकी छत से उसका 52 बीघा पुदीना उपरवाओ…

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