फिर कहोगी कि बहुत बेरोज़गारी है, नौकरी नहीं है, फेल हो गया मोदिया

मैंने एक बार एक लड़के की टी-शर्ट पर एक वाक्य पढ़ा था, ‘I was born intelligent… education spoilt me…’

ये वाक्य दरअसल हमारी आज की शिक्षा व्यवस्था पर एक टिप्पणी थी जो सिर्फ rote education को महत्व देती है जिसमें सिर्फ रट के exam में copy भर देना ही महत्वपूर्ण है. हमारी शिक्षा बच्चे के सर्वांगीण विकास में पूर्णतः विफल है.

सिर्फ इतना ही नहीं, हमारी शिक्षा नीति वो करेला है जो हमारी इस सामाजिक व्यवस्था की नीम पर चढ़ गई है जिसमें शारीरिक श्रम को बड़ी हिकारत से देखा जाता है.

90 के दशक में जब हम माहपुर-सैदपुर में स्कूल चलाते थे, तो वो English Medium स्कूल था जिसमें हम NCERT का syllabus पढ़ाते थे.

उन दिनों वहां अंग्रेजी जानने वाले लोग बहुत कम थे. टीचर्स की बहुत समस्या रहती थी. स्थानीय पुरुष तो बिल्कुल नहीं मिलते थे.

उन दिनों Union Bank of India में rural posting के नाम पर दक्षिण से स्टाफ आता था. वहां अपना जुगाड़ सही बैठ गया था. हमको 3-4 दक्षिण भारतीय महिलाएं मिल जाती थीं पढ़ाने वाली.

फिर हमको ये समझ आया कि इस इलाके में पुरुष तो अंग्रेजी नहीं जानते पर कुछ महिलाएं / बहुएं जो बाहर पढ़ी लिखीं है और विवाह यहां हुआ है वो CBSE से पढ़ी हैं… हम अपने छात्रों में खोजते रहते कि किसकी माँ CBSE से पढ़ी है.

उन दिनों हमने पाया कि लोगों ने अपने बेटों के लिए बहुत उच्च शिक्षित highly educated professionally qualified बहुएं खोज ली हैं, पर उनकी सारी शिक्षा-दीक्षा धरी की धरी और वो बेचारी सिर्फ एक गृहणी बन के रह गयी हैं.

उन दिनों एक जुमला हमेशा सुनने को मिलता… हमको अपनी बहू से काम नहीं कराना, हमको कौन सा नौकरी करानी है?

मुझे लगता कि काम करना क्या इतना बुरा काम है???

आज की हमारी सामाजिक व्यवस्था और ये डिग्री केंद्रित शिक्षा व्यवस्था तो कोढ़ में खाज सी हो गयी है. डिग्री धारी शिक्षित तो शारीरिक श्रम आधारित blue collar job के लिए खुद को over qualified मान के उस तरफ जाना नहीं चाहता.

कल मैंने जो post डाली थी Wanted Teachers वाली, उसमें कई लोगों ने मुझे अपना Resume व्हाट्सएप्प किया है.

None of them is qualified.

कुछ confused हैं, कुछ भैंस का सिक्कड़ (मेरे को भैंस दो, क्योंकि मेरे पास सिक्कड़ है) लिए घूम रहे थे आज तक, पर अब बकरी खोजने लगे हैं… पर सरकारी आदेश है कि बकरी बांधनी है तो सिक्कड़ नहीं चलेगा, रस्सी मने BEd ज़रूरी है…

कुछ BEd हैं पर विषय ज्ञान Zero है.

अब चूंकि नया session शुरू होने वाला है, हमारे पास सैकड़ों की संख्या में resume आते हैं.

माँ कसम 100 में से 99 resume देख पढ़ के रोना आता है…

मैंने एक लड़की से कहा कि देखो तुमने कितने करीने से कपड़े पहने हैं, Make up किया है, लिस्पिस्टिक लगाई है, नेल पेंट किया है… पर तुम्हारा resume…

Its pathetic.

तुम्हारी तैयारी Zero है.

तुम्हारा विषय ज्ञान Zero है.

तुम MA English हो, English की teacher बनना चाहती हो, पर तुमने ज़िन्दगी में कभी कोई अंग्रेजी साहित्य, उपन्यास नहीं पढ़ा… तुम तीन अंग्रेजी Authors का नाम नहीं गिना सकती…

फिर कहोगी कि बहुत बेरोज़गारी है…

मोदिया फेल हो गया…

नौकरी नहीं है…

जबकि हक़ीक़त ये है कि इतनी ज़्यादा नौकरी हैं पर योग्य लोग नहीं हैं…

किसी भी employer उद्यमी से बात करके देखिए… वो परेशान है… लोग नहीं है, अच्छे employees नहीं हैं.

सड़कों पर जो बेरोज़गारों की भीड़ है उनमें से 90% निकम्मे, नाकारा, नालायक लोग हैं. योग्य आदमी कभी बेरोज़गार नहीं घूमता.

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