खराब सरकार की बजाय अधिक टैक्स देना, बेहतर सौदा

बजट से अगर कोई बुरी तरह प्रभावित हुआ है और इसलिए नाराज या निराश है तो उसे बुरा-भला कहने का मेरा कोई अधिकार नहीं है…

पर मेरी शंका है कि ज्यादातर लोग इस पर जितनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं, वह वास्तव में उनके नफा-नुकसान के गणित के अनुपात से कहीं बहुत ज्यादा है.

अपनी बताऊँ… यहाँ टैक्स का यह हाल है कि टैक्सी चलाने वाले से लेकर रेस्टॉरेंट में वेटर तक सब इसके शिकंजे में आ जाते हैं.

मैं 12% नेशनल-इन्शुरेन्स सब्सक्रिप्शन देता हूँ, उसके बाद 40% टैक्स देता हूँ. उसके बाद हर चीज जो खरीदता हूँ उसपर 20% वैट देता हूँ.

गाड़ी चलाने के लिए रोड-टैक्स हर साल देता हूँ जो हर साल पिछले साल से ज्यादा होता है.

फिर सड़क-सफाई-व्यवस्था और लोकल सरकारी खर्चे के लिए हर घर से कॉउन्सिल टैक्स अलग से…जो सालाना लगभग डेढ़ हजार पाउंड पड़ता है…

आप कह सकते हैं कि बदले में मुझे बहुत बेहतर सुविधाएं मिलती हैं. पर इसकी कीमत का गणित लगाइए…

और यह भी गणित लगाइए… यह टैक्स वह बन्दा नहीं देता जो सरकार के पैसे पर मुफ्त में जीता है… हमेशा किसी मजबूरी में नहीं, अक्सर शौकिया…

और जीता मतलब सिर्फ खाता-पीता नहीं है, उसकी दारू-गांजा-चरस का खर्च भी हम ही उठाते हैं… वह सरकार के दिये फ्लैट में मुफ्त में रहता है. कौंसिल टैक्स तो खैर नहीं ही देता है, बियर की बोतल को कूड़े के डब्बे में डालने की ज़हमत भी नहीं उठाता…

अगर किसी को कोई डिसेबिलिटी हो गई है तो उसके पूरे खानदान की चाँदी है. सरकार उसे इतने पैसे देती है जितना किसी भी नौकरी में किसी को नहीं मिलता.

एक ऐसे व्यक्ति को मैं जानता हूँ… उसे डाउन्स सिंड्रोम है, वह सरकार के पैसे से केअर होम में मुफ्त ही नहीं रहता, उसके एकाउंट में सरकार से मिले जेब खर्च से 30 हज़ार पाउंड जमा हैं… मैंने इतने पैसे आज तक एक साथ नहीं देखे…

उसकी माँ उसके पैसे से अपने लिए एक मकान खरीद रही है, यहाँ के बेहद पॉश इलाके में… और यह मेरे टैक्स के पैसे से…

मेरे टैक्स के पैसे से यहाँ सीरिया और अफगानिस्तान से आये टेररिस्ट अपने बारह बच्चों के साथ सरकारी मकान में रहते हैं… और BMW से चलते हैं…

मेरे टैक्स के पैसे से 14 साल की लड़कियाँ बिनब्याही माँ बनकर, बच्चे पैदा करके सरकार से अपनी चरित्रहीनता का वजीफा लेती हैं…

फिर भी, किसी को मैंने यहाँ टैक्स की दरों पर बिलबिलाते नहीं देखा. लोगों ने टैक्सों को वैसे ही स्वीकार कर रखा है, जैसे खराब मौसम को…

टैक्स देना अखरता है… सबको अखरता है… अच्छी सड़क, बिजली, शासन-व्यवस्था के बावजूद अखरता है…

मुझे अपनी टैक्स की कीमत पता है… पर यह भी पता है कि इससे बहुत बहुत बड़ी कीमत है, एक खराब सरकार की कीमत…

आप सोचिये, आप कौन सी कीमत चुकाना चाहते हैं…

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