मेरे को भैंस दो, क्योंकि मेरे पास सिक्कड़ है

इधर फेसबुक पर देस भर की लंतरानी पेल कर मैंने एक counseller का status हासिल कर लिया है और बहुत से लोग मुझे फोन कर अपनी निजी पारिवारिक समस्याओं, parenting के विषय में, और कई बार तो यूँ ही जब थोड़ा हताश निराश depressed फील करते हैं तो मुझे फोन कर लेते हैं…

और आप तो जानते ही हैं कि मैं कितना ऊटपटांग आदमी हूँ… तो मेरी सलाह, मेरी counselling भी आम तौर पे भोत किरान्तिकारी ही होती है…

मसलन एक मित्र ने फोन कर मुझसे पूछा कि दादा, मैं राजपूत और मेरी मित्र एक दूसरे प्रदेश की ठाकुर फिर भी घर वाले (खास कर मेरी बहन और जीजा) मेरी शादी को मान नही रहे, उनको local और मोटा दहेज लाने वाली बहू चाहिए… जबकि मेरी gf बहुत highly qualified भोत सही लड़की है…

मैंने उस से कहा अबे तू एकदम्मै मूरख है क्या बे? साले बिना रीढ़ के केंचुए… एक दिन अपनी बहन और जीजा को कमरे में बंद कर के लट्ठ उठा और उनको बोल… साले आज के बाद मेरे फटे में टांग अड़ाई तो दोनों टांगें तोड़ दूंगा… और ब्याह कर ले अपनी GF से… कोई समस्या हो तो हमको बोल… हम चलेंगे बारात में…

यूँ भी लड़की भगा के दहेज आडम्बरहीन ब्याह करने-कराने का तो मेरे को भोत अनुभव है.

इसके अलावा कुछ फोन प्रोफेशनल सलाह के लिए भी आते हैं. खासकर entreprenureship (उद्यमिता) के लिए. मेरी वो पोस्ट जिसमे मैने cobbling सीख के cobbler (मोची) का काम करते हुए Nike, Adidas के महंगे जूतों को repair करने वाला idea बहुत से लोगों को पसंद आया है.

इसके अलावा जब से मीडिया ने मोदी जी का पकौड़ी बेचने वाला बयान highlight किया है, बहुत से युवाओं ने इस विषय पे सोचना शुरू कर दिया है.

कहा जाता है कि आप व्यक्ति को मार सकते हैं but you can not kill an Idea or a thought जिसका कि समय आ चुका है…

एक मित्र ने मुझे फोन कर पूछा कि मैं बैंक से 10 लाख रूपए का लोन मांग रहा हूँ मुद्रा योजना में, और बैंक दे नही रहा.

मैंने उसे बताया कि बाजार में शुरू होने वाले 100 में से 90 business विभिन्न कारणों से, शुरू होने के पहले साल के भीतर बंद या असफल हो जाते हैं. बैंक भी ये बात जानता है. इसलिए bank भी उन्ही उद्यमों पे पैसा लगाता है जो कुछ समय से छोटे पैमाने पर सफलतापूर्वक चल रहे हैं, उनमें निवेश कर उन्हें बढ़ाया जाए.

तुम इतना अधिक पैसा, 10 लाख रूपए लगा के एक नया काम करना चाहते हो जिसका तुमको कोई अनुभव नहीं… तुम कोई छोटा उद्यम plan क्यों नही करते? ऐसा जो 10-20 हज़ार या 50,000 में शुरू हो जाये. इसमे रिस्क भी तो सिर्फ 10, 20 या 50,000 का ही रहेगा?

इसके अलावा 50 हज़ार की छोटी पूंजी से काम शुरू कर के भी 3000 रोज़ाना यानी लाख-50,000 रूपए महीना कमाया जा सकता है पर 10 लाख लगा के शुरू किया गया उद्यम इसी अनुपात में 10 लाख रूपए महीना कमा के नहीं देगा.

समस्या ये है कि इतनी कम पूंजी से शुरू किया गया काम नीली कमीज पहन के करना पड़ता है… It’s a blue collar job…

समस्या ये है कि हमारा युवा काम धंधा उद्यम करने की जब सोचता है तो वो उस से कमाये जाने वाले पैसे के बारे में न सोच के shirt के collar के रंग के बारे में सोचता है… He’s more worried about the color of the collar.

उसे काम धंधे से ज़्यादा अपने status की चिंता होती है… Blue collar उद्यमी को कोई अपनी बेटी नहीं देना चाहता. हम हिंदुस्तानियों को कामगारी से काले हुए हाथों से और मेहनत के पसीने की बू से बहुत नफरत है. हम सब सफेद कमीज पे टाई लगा के Fogg का perfume लगा के काम करना चाहते हैं.

सबको white collar job चाहिए, सबको सरकारी नौकरी चाहिए… हमारे समाज की खोखली छिछली सामाजिक मान्यताएं, हमारा खोखला education system हमारे हाथ में एक फ़र्ज़ी कागज़ी डिग्री थमा देता है… जो हमको blue collar उद्यम करने के लिए overqualified करार देती है…

आज हर हिंदुस्तानी के हाथ में भैंस का सिक्कड़ है… वो भैंस का सिक्कड़ लिए मोदी के दरवाजे खड़ा है… कहता है कि मेरे को भैंस दो…

क्यों भाई, क्यों दें आपको भैंस?

क्योंकि मेरे पास सिक्कड़ है…

कायकू लिया सिक्कड़? हमसे पूछ के लिया सिक्कड़???

सिक्कड़ इसलिए लिया कि तुमने हर गली में सिक्कड़ बेचने की दुकान खोली है…

अब आपकी समस्या ये है कि आपने भैंस का सिक्कड़ खरीद लिया सो अब आप उसमें बकरी तो बांध नहीं सकते…

अपने सिक्कड़ को बेचो कबाड़ में, डिग्री की बनाओ बत्ती… रस्सी खरीदो और भेड़ बकरी पालो…

ऐसा उद्यम plan कीजिये जिसे 10-20 या 50,000 में शुरू कर 1000-2000 रूपए रोज़ाना कमाया जा सके.

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