कैटरीना कैफ, प्रशंसक के पत्र में सिर्फ प्रशंसा ही नहीं, होता है प्रेम भी

डियर कैटरीना कैफ,

बादलों में घुलती हुई बारिश की एक बूँद हो तुम जिसे धरती पर जाकर खो जाना होता है, मगर जिस पर अंत तक आसमान की निगाह बनी रहती है. जिसके लबों की जुम्बिश में धरती और आसमान के मिलन के पते छुपे होते हैं, मगर जिन्हें पढ़ना मनुष्य के बस की बात नहीं है.

उन्हें हवा पढ़ती है और बादलों से उसकी मुखबरी कर देती है. जिसकी हंसी में बारिश की साजिशें शामिल है, जिसके आंसुओं में पतझड़ के उदास पत्तों की बंदनवार टंगी होती है. जिसके पास मासूमियत की दुर्लभ भाषा है जिसे संरक्षित करने के भाषाविज्ञानी और नृविज्ञानी न खत्म होने वाली बहसों में उलझे हुए है.

जिसे देखकर लगता है कि नदी के तीव्र वेग के मध्य एक शांत निर्वात में कुछ बूंदे अटक गई हो और मिलकर आइस-पाईस खेल रही हो जिन्हें देख नदी की चंचलता अपने सौतले भाई को याद करके उदास हो जाती हो.

तुम इस धरती पर ईश्वर की दृष्टि से मुक्त हो, इसलिए इतनी निर्मल और सहज हो कि तुम्हें देखकर अपने न किए गए पाप याद आते हैं और थोड़ा सा अपराधबोध होता है. तुम्हारी मुस्कान में क्रोशिए के कुछ फंदे उलझे पड़े हैं और कुछ मेजपोश इसी वजह से आज तक मुक्कमल नहीं हो पाए हैं.

तुम्हारी हंसी में समन्दर की करवट और रेत की उम्र अटकी पड़ी है दोनों को मिलाकर जो भी चित्र बनता है उसे तुम्हारा बंकिम मुस्कान के साथ देखना मन के अंदर एक भूलभुलैय्या बना देता है.

देवताओं और मनुष्यों के मध्य जो श्रेष्ठता का अभिनय वर्षों से चल रहा है तुमने उसका मूक पाठ लिखा है. इसलिए तुम्हारे पास विस्मय नहीं है. तुम अप्राप्य हो कर भी हमेशा संवाद के दायरे में ही नज़र आती हो मनुष्य के लिए इससे हसीन छल और कोई नहीं हो सकता है.

तुम्हें देखकर जो बच्चे बड़े हुए हैं उनकी अभिरुचियाँ सामान्य मनुष्यों से भिन्न है. तुम्हें देखकर जो वयस्क अधेड़ हो रहे हैं उनका जीवन के प्रति आशावाद देखते ही बनता है, और जो बुज़ुर्ग तुम्हें देख रहे हैं उनके मन में स्वर्ग की एक सुंदर कल्पना बनती है.

इसलिए उनके चेहरे पर मृत्यु चिंता भी को पढ़ पाना मुश्किल हो रहा है. दुनिया भर के मनोवैज्ञानिक इस बदलाव को देखकर खुश है क्योंकि तुमने उनका काम आसान कर दिया है.

मेरे पास कल्पना की सीमित सी उड़ान है, मगर फिर भी मैं अनंत तुम्हारे सौन्दर्य पर भाष्य कर सकता हूँ. मैं मनुष्य हूँ, मैं ऐसा करते हुए देवताओं की मृत्युपर्यन्त प्रतीक्षा कर सकता हूँ कि वे मुझे तुम्हारे सौन्दर्य का पाठ करते हुए देखकर ईर्ष्यावश आए और आकर मेरी हत्या कर दें.

इस तरह मैं अपने मोक्ष के मार्ग को सुगम करने का एक अवसर भी खोज रहा हूँ. मुझे उम्मीद है कि मेरी इतनी बौद्धिक चालाकी को तुम माफ़ करोगी और आदतन हंसते हुए मेरी कामनाओं की पतंग को अपने कौतूहल से काट दोगी.

भाषा की अपनी सीमा और लिपि के अपने अन्धकार के मध्य तुम्हें देखकर मैं दावे से कह सकता हूँ कि तुम्हारे विषय जो अनकहा रह गया है वह इस कहे गए से लाख गुना सुंदर है. उसे केवल हृदय में महसूस किया जा सकता है.

तुम मेरे शब्दों के अपव्यय पर हैरान नहीं होगी, क्योंकि हमारी भाषाओं में कोई साम्य नहीं है. मगर संगीत की तरह कुछ मनोभावों की भी अपनी एक मौलिक भाषा होती है जो येन-केन-प्रकारेण संप्रेषित हो ही जाती है. अपने भाव सम्प्रेषण को लेकर यह मेरे जीवन का एक किस्म का चरम आशावाद है.

तुम्हारे स्त्रीत्व को समझने के लिए वांग्मय की वृहद समझ नहीं, दर्शन की टीकाओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन के विश्लेषण से बचने की प्रवृत्ति की ज़रूरत है. दृश्य में जो माधुर्य शामिल होता है उसका एक मूल स्रोत तुम्हारा स्त्रीत्व से लबरेज़ अस्तित्व है.

भविष्य में जब मनुष्य की सभ्यताओं के विवरण व्यक्तियों के माध्यम से तलाशे जाएंगे तो तुम किस कोटि का प्रतिनिधित्व करोगी यह अभी बता पाना मेरे कथित ज्ञानी मन के लिए फिलहाल संभव नहीं है.

आषाढ़ के एक बादल की पौष के कोहरे से जितनी गुप्त बात होती होगी ठीक उतनी बातें मैंने एकांत में तुमसे की है. हो सकता है शब्द कहीं खो गए हो भाव कहीं धूमिल हो गए हो. मगर मुझे उम्मीद है ये खत देर सबेर तुम तलक ज़रुर पहुंचेगा. तब तक मैं अपने विरुद्ध मनुष्य के क्रोध और ईर्ष्या के प्रसंगो का दस्तावेजीकरण करूंगा, क्योंकि यदि संयोग से कभी तुमसे मुलाक़ात हुई तो मेरे पास तुम्हें सौपने के लिए यही एकमात्र मानवीय चीज़ होगी.

जिसे पढ़कर तुम अपनी आंग्ल मिश्रित हिन्दी में कहोगी –‘तुमने यकीनन मुक्ति का एक बेहतर अवसर खो दिया है. फिर भी मैं तुम्हारे लिए दुआ करूंगी कि तुम्हारे साथ इसलिए सख्ती से पेश ना आया जाए क्योंकि तुमने मनुष्यों की भीड़ में मुझे पहचान लिया था.’

मेरे लिए तुम्हारी इतनी सी सिफारिश ईश्वर से करुणा प्राप्त करने के लिए पर्याप्त होगी. खत के अन्त में मैंने अपना छोटा सा स्वार्थ प्रकट कर दिया है इसलिए मनुष्य इस लोक में मनुष्य रहने के शापित है. तुम्हारे मामलें में कम से कम मैं उस जुमले का पात्र नहीं हूँ जिसमें कहा जाता है ‘मेन विल बी मेन’

तुम्हारा एक प्रशंसक,
अजित

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