चुन लीजिए अपना पक्ष, आपके पास अब कम है समय

एक घराना है भारत का महिन्द्रा… इसके मुखिया है आनंद महिंद्रा… मैंने लगभग 1991 से इनको हर बजट की तारीफ करते पाया.

मनमोहन, दंडवते, यशवंत सिन्हा, जसवंत सिंह, प्रणव बाबू, चिदंबरम और जेटली… एक आनंद महिन्द्रा और एक रंजय त्रिपाठी… दो ही हैं भारत में जो कभी बजट से गुस्सा नहीं हुए… सबसे खुश थे…

महिंद्रा बड़े आदमी है, बजट से खुश होने के प्रकटीकरण का अधिकार है उनके पास, लेकिन बजट के कुछ माह बाद उस पर बोलने का अधिकार नहीं है… मैं छोटा आदमी हूँ मुझे वो अधिकार है…

बजट सब अच्छे होते हैं… बुरी होती है नीयत और उस नीयत के अनुसार हो जाती है बजट की नियति…

मोटा भाई की सरकार में बजट की नियति तो ख़राब नहीं होगी… ये न खाएगा न खाने देगा, सिर्फ मुझे ही नहीं पूरे विश्व को पता है…

तो फिर बजट का होगा क्या?… कुछ नहीं बस इतना कि बजट के implementation से इंडिया मौज करेगा…

एक दूसरा मामला ये भी है कि आनंद महिंद्रा और रंजय त्रिपाठी ही ऐसे दो शख्स हैं जिन्होंने पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों पर कोई रोना पीटना न मचाया…

इसके उलट महिंद्रा ने अपने गाड़ियों की माइलेज बढ़ाने की कोशिश की… और मैंने भी कम से कम और ज़रूरत भर के ही माइल्स तय करके अपने बजट को संतुलित रखा…

मोटा भाई ने 10 साल UPA शासन में 64000 करोड़ के चढ़े क़र्ज़ का 43400 करोड़ ईरान को वापस कर दिया है, नया क़र्ज़ नहीं चढ़ा है तेल के बदले…

क़र्ज़ नहीं चढ़ा है लेकिन अब मामला उल्टा है… ईरान के ऊपर 150 मिलियन अमेरिकन डॉलर्स का क़र्ज़ चढ़ गया है…

चाबहार से पूरी तरह काण्डला और मुंबई जुड़ चुके हैं और ईरान – अफगानिस्तान से लेकर पूरे सेंट्रल एशिया में भारत का माल बिना पाकिस्तान का रास्ता इस्तेमाल किए जाने लगा है…

लेकिन इस सबसे जनता को कोई फायदा नहीं दीखता… इस बजट के बाद तो और तिलमिला चुके हैं लोग… और पिछले 6 माह से तेल के बढ़ते दाम एक कारण है ही…

आती रिपोर्ट को माना जाए तो अब ये जनता मोटा भाई को तेल लेने भेजने को तैयार हो चुकी है, इस जनता का बस चले तो अभी ही चुनाव करके मोटा भाई को बम्बू मिशन के अंतर्गत बम्बू के सबसे ऊपर के छोर पर लटका के लॉन्च कर दे और मोटा भाई को कच्छ के दलदल में दफ़न कर दे…

फेसबुकिया जमात से लेकर, और कोई भी हो सुन लो… हम तो मज़बूती से मोटाभाई के साथ है और रहेंगे…

मैं इन बकलोल रुष्टा-खुष्टा फेसबुकिए की तरह मूर्ख मंडली में नहीं, जो रोना धोना मचाए हैं और फिर भी कहते हैं कि 2019 में मोदी आएगा…

मुझे मालूम है कि लड़ाई बहुत कठिन और दुर्गम होने वाली है… जीतने के लिए लड़ेंगे… आज आप रोना धोना मचाए है तो आपका रास्ता तय हो चुका है…

आपके लाख चाहने पर भी आपको दूसरे खेमे का मानते हुए आपका मर्दन करने का कार्यक्रम चालू हो जाएगा…

आपके पास अधिकतम जून 2018 तक समय है… उसके बाद बच निकलने का समय नहीं है… इधर व उधर… बीच में रहोगे तो दोनों मारेंगे… choose your side now, you have little time left…

उसके बाद जो भी फैसला हो उसमें आपकी वाहवाही नहीं स्वीकारी जाएगी… आपका मर्दन होगा… क्योंकि जिस समय ज़रूरत थी आपकी उस समय आप हाथ छोड़कर भाग खड़े हुए थे…

हम हैं जो अपने नेता, अपने सेनापति के साथ खड़े हैं मज़बूती से हर कंडीशन में… हार हो या जीत… राजनैतिक शुचिता और निष्पक्ष होने का बुखार हमको न कभी चढ़ा और न चढ़ेगा…

Comments

comments

loading...

LEAVE A REPLY