क्या ऐसा पीएम चाहिए जो चुनाव जीतने के लिए हमारे टैक्स से जुटाई निधि को उड़ा दे?

बजट प्रस्तुत होने के बाद कुछ मित्रों ने सोशल मीडिया में मोदी सरकार के प्रति अपनी नाराज़गी प्रकट की है.

कहने को तो वह वित्त मंत्री जेटली को दोष दे रहे हैं लेकिन यह मानकर चाहिए कि इस दोषारोपण के असली हकदार प्रधानमंत्री मोदी हैं.

कुछ मित्रों ने लिखा कि सरकार के बचाये हुए पैसों से अगले वर्ष कांग्रेस चुनाव जीत के मौज उड़ाएगी. उनका ऐसा लिखने का मतलब यह है कि वे प्रधानमंत्री के कार्य करने की प्रणाली को नहीं समझ पाए.

क्या आप वास्तव में ऐसा प्रधानमंत्री चाहते हैं जो चुनाव जीतने के लिए आपके और हमारे कर से जुटाई गई निधि को ऐसे ही उड़ा दे; अनाप-शनाप के खर्चों में बर्बाद कर दे.

फिर उनमें और कांग्रेसियों में क्या फर्क रह जाएगा? क्या आपकी माता जी ने पड़ोसियों को खुश करने के लिए अपने जेवर बेचकर उनको राज भोग कराया था? क्या उन्होंने अपने घर के बजट की ऐसी तैसी कर दी थी?

मैं ऐसा क्यों कह रहा हूं इसे समझाने का प्रयास करता हूं.

इस सदी में हुए अब तक के चुनावों में, हर चुनाव के एक वर्ष पूर्व प्रस्तुत किए गए बजट में सरकार ने अपने खर्चे को वोटरों को लुभाने के लिए अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया गया था.

सन 2009 के चुनाव के पिछले वर्ष सरकारी खर्च 24% बढ़ गया था, जब कि पिछले चुनाव के एक वर्ष पूर्व सन 2013 के बजट में सरकारी खर्च साढ़े दस प्रतिशत से अधिक बढ़ गया था. लेकिन मोदी सरकार ने इस वर्ष के सरकारी खर्च में सिर्फ 10% की वृद्धि हुई जबकि अगले वर्ष चुनाव होना है.

यह बजट आम आदमी और औरत के लिए है, जो गरीब है, गांव या स्लम में रहती है. इस बजट में उसके लिए गांवों में सड़क, शौचालय, सिंचाई, बिजली, गैस और सर के ऊपर छत उपलब्ध कराने के बारे में है. यह बजट ग्रामीण विकास और बुनियादी ढाँचे के बारे में है.

पिछले वर्ष और इस वर्ष के बजट को अगर मिला कर देखें तो सरकार एक लाख आठ हज़ार किलोमीटर ग्रामीण सड़क बना देगी. अगले चुनाव होने के पहले लगभग सभी गांवों में सड़क पहुंच जाएगी.

इसी प्रकार दो वर्षों (पिछले वर्ष और इस वर्ष) में एक करोड़ से अधिक ग्रामीण घर बन जाएंगे; चार करोड़ से अधिक घरों में बिजली पहुंच जाएगी तथा आठ करोड़ घरों में फ्री की गैस.

यह सब कुछ अगले लोकसभा चुनावों के पूर्व हो जाएगा. इसके अलावा गांवों में 18 करोड़ से अधिक बैंक अकाउंट खोल दिए गए हैं तथा कई लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा प्रदान कर दी जाएगी.

ऐसा नहीं है कि यह सिर्फ कागज़ी स्कीम है; इन सभी प्रोजेक्ट के लिए बजट में उचित धन का प्रावधान है. और उनकी चौबीसों घंटे मॉनिटरिंग हो रही है.

इनको आप अगर स्वास्थ्य बीमा से जोड़ कर देखें, तो इस बजट में कम से कम 50 करोड़ ग्रामीण और निर्धन व्यक्तियों को सीधे-सीधे लाभ होगा, जिनमें 25 करोड़ मतदाता सूची में हो सकते हैं (बाकी 18 वर्ष से कम आयु के हो सकते हैं).

पिछले लोकसभा चुनावों में लगभग 55 करोड़ भारतीयों ने मत दिया था. इसमें से भाजपा को 31% तथा एनडीए को लगभग 40% वोट मिले थे. एक तरह से भाजपा को 17 करोड़ भारतीयों ने वोट दिया था तथा एनडीए को 22 करोड़ मत मिले थे.

राजस्थान में हुए उपचुनावों में बुरी तरह हारने के बाद भी भाजपा को 40% मत मिले. इसका मतलब यह है कि वह ग्रामीण मतदाता जिन्हें अभी हाल ही में गैस, बिजली, शौचालय और घर मिला, तथा उनका गांव सड़क से जुड़ा, वह शायद मतदान केंद्र के समय जाते हुए सोचे कि उसे क्या लाभ हुआ है और उनमें से आधे लाभार्थी अल्टीमेटली कमल पर उंगली रख दे.

बाकी का मत कोर मतदाताओं से मिल जाएगा. अतः आप नेतृत्व पर अपना विश्वास बनाए रखें.

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