राष्ट्रतोड़कों से मुकाबला करना है तो याद रखें – सबसे पहले हम हिन्दू हैं

भारत सदियों से हिन्दू राष्ट्र रहा है, यह हिन्दुओं की पुण्य भूमि है लेकिन कालांतर में हालात बदलते गए… समाज विखंडित होता गया, हम जातियों में बँटते गए…

नतीजा यह हुआ कि हम हिन्दू ना रहकर ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र बन कर रह गए… हम अपने स्वाभिमान और शौर्य को भूल गए… वेद, पुराण एवं उपनिषदों की शिक्षा को भूल गए.

संघ की स्थापना के पहले से ही इसके संस्थापक के दिमाग में यह बात बैठ चुकी थी कि देश में एक ऐसे सशक्त संगठन की तत्काल आवश्यकता है जिसमें जाति, वर्ग, पंथ और ऊँच नीच के भेदभाव का कोई स्थान नहीं रहेगा.

क्योंकि इन्हीं सामाजिक विसंगतियों की वजह से समाज कभी एकजुट नहीं रहा… जिसका लाभ हमारे शत्रु उठाते रहे और हम पर शासन करते रहे.

हिन्दू समाज उपेक्षित होता रहा… बहुसंख्यक होने के बावजूद हमने मुठ्ठी भर विदेशी शत्रुओं के सामने घुटने टेक दिए थे क्योंकि हम संगठित नहीं थे, हमारा हिन्दू समाज संगठित नहीं था.

इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर संघ की स्थापना हुई और “हम हिन्दू हैं” इसी भाव के साथ संघ की अपनी कार्यपद्धति बनी जिसका पालन आज तक किया जाता है.

कल संत रविदास जयंती थी, देश भर के संघ स्थानों एवं संघ कार्यालयों में इस अवसर पर कई कार्यक्रम हुए.

हमारे साम्बा नगर में भी एक ऐसा ही कार्यक्रम हुआ जिसमें भक्ति काल के प्रमुख संत, विचारक, कवि और समाज सुधारक गुरू रविदास जी की जयंती मनाई गई… उनके व्यक्तित्व, उनकी शिक्षा और उनके द्वारा समाज में दिए गए योगदान पर प्रकाश डाला गया.

वर्तमान में देश की राजनीति इस दिशा की ओर चल पड़ी है कि जहाँ सत्ता प्राप्ति के लिए पार्टियाँ किसी भी सीमा तक जाने को तैयार हैं… समाज में फूट डालने से लेकर जातिवाद एवं धार्मिक उन्माद को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करके हिन्दू समाज को खंडित करने का प्रयास कर रही हैं.

ऐसे में हम सभी का यह कर्तव्य बनता है कि हम ऐसा प्रयास करें कि हमारे समाज में जातीय विद्वेष फैलाने वाले तत्वों को सफलता ना मिले.

हम चाहे जिस समाज, जाति, समुदाय, पंथ के हों सबसे पहले हम हिन्दू हैं… और जब इस भावना के साथ संगठित होकर अपने विरोधियों के सामने खड़े होंगे तभी उनसे मुकाबला करने में सक्षम होंगे.

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