भारतीय परिवार संस्था : संकट में है अनोखा अव्यक्त स्नेह, आदर एवं विश्वास

विमानपत्तन पर बैठा हूँ. रात में एक दुर्घटना का समाचार मिला, जाँच के लिये जा रहा हूँ. कुछ दिनों पहले मैंने बिना प्लग के विद्युत प्रवाही तार खुला छोड़ काम करने एवं बिना हेलमेट या सुरक्षा रज्जु के काम करने पर लिखा था.

घर में हो या कार्यालय/ कार्यस्थल पर, छोटी दिखती असावधानियाँ घातक हो सकती हैं, ध्यान दें. सुरक्षा सम्बंधित बातों का अनुपालन करें. असुरक्षित ढंग से काम करने में कोई वीरता नहीं है, न ही सुरक्षा के साथ काम करने में कोई भीरुता.

सेना से अधिक वीरता कहाँ मिलेगी? कभी ध्यान से देखा है आप ने उनके अनुशासन एवं सुरक्षा अनुपालन को? आग का स्फुल्लिंग कितना भी लघु क्यों न हो, पूरे वन प्रांतर को भस्मक्षेत्र में परिवर्तित करने में सक्षम होता है.

जीवन अनमोल है, घर के एक कमाऊ की मृत्यु पूरे परिवार का विनाश कर देती है. अधीनस्थ कर्मचारियों से भी प्यार से या कड़ाई से सुरक्षा सम्बंधी प्रावधानों तथा सावधानियों का अनुपालन सुनिश्चित करायें. स्वयं के उदाहरण प्रस्तुत करें.

पर्स में सिक्कों से ले कर विविध मूल्यों के नोट रख दिये गये, इस प्रकार कि टैक्सी वाले का बिल चाहे जो हो, प्रात:काल में छुट्टे की मारामारी न रहे, अभाव में अधिक न देना पड़े. कार्ड भी है. पूजा के लिये स्थान स्वच्छ करने के साथ साथ जल पात्र भी प्रसाद के साथ रख दिया गया, पूछ लिया गया कि दूसरी क्या आवश्यकतायें हो सकती हैं, जूते तक चमका कर रख दिये गये. अत्यल्प जलपान भी प्रस्तुत कर दिया गया, मैं समय से हूँ.

मात्र घर के लिये जीती खपती गृहणी का सम्मान कीजिये. आगत समय में वह दुर्लभ होने वाली है. भारतीय दम्पति धन्यवाद ज्ञापन में कृपण होते हैं किंतु ऐसा नहीं कि अनुभव नहीं करते, सराहते नहीं.

युगों युगों से भारतीय परिवार संस्था में एक अनोखा अव्यक्त स्नेह, आदर एवं विश्वास भाव रहा है जोकि अब संकट में है. मुझे पूरी स्मृति है, गहन शल्यकर्म के पश्चात भी पिताजी पूरे विश्वास के साथ कहते थे कि गाँव जाने दो, तुम्हारी माँ सब सँभाल लेगी, ठीक कर देगी.

कभी कभी उनके मुँह पर कह देते तो माँ असहज हो जाती, उसके पश्चात दोनों बात को अन्य दिशा में ले जाते. यह भारतीय स्वाभाविकता है. यदि पति या पत्नी प्रतिदिन एक दूसरे को न्यूनतम 25 बार सॉरी, थैंक यू, हनी, स्वीटी आदि नहीं कहते तो उसमें कोई पिछड़ापन नहीं.

नवविवाहित सतही प्रगतिशीलता छोड़ गहरे उतर भारतीय परिवार संस्था को समझें जोकि अब संकटग्रस्त है, अनेक कारणों में से एक है – अंधानुकरण. सात जन्म की कौन कहे, सात दिनों में ही विवाह विच्छेद की घटनायें बढ़ रही हैं तो उनका कारण पुंसवादिता नहीं, भारतीयता का त्याग है.

एक विराट एवं जटिल यंत्र में कुछ अस्वाभाविक आयातित उपादान लगा कर उसकी प्रभावोत्पादकता बढ़ाने का प्रयास मूर्खता ही है, समग्रता में देखा, सुना, समझा एवं किया जाना चाहिये. परिवर्तन होने चाहिये किंतु मौलिकता एवं विशिष्टता बनाये रखते हुये.

[प्रवचन समाप्त हुये. उड़ान भरने को है. देख कर बताइये तो, ऊपर लिखे हुये में कितने अरबी/फारसी/तुर्की के शब्द हैं. घर को ठीक रखने का एक अंग भाषा को भी ठीक रखना है. जाने कितने ऐसे अपशब्द हैं जिनके भारतीय भाषाओं में विकल्प मिलेंगे ही नहीं. वे शब्द भी परिवार संस्था पर आघात करते हैं. सूक्ष्मता से विचार कीजिये.]

– सनातन कालयात्री

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