आखिर जो राज्य जीएसटी रजिस्ट्रेशन और टैक्स बेस में आगे, कैसे आर्थिक प्रगति में पिछड़ा!

यह एक दुर्भाग्य की बात है कि भारत के किसी भी समाचार पत्र या पत्रकार (उस पत्रकार ने भी, जिसकी पोस्ट एक मित्र मेरे संज्ञान में लाये) ने आर्थिक सर्वेक्षण में जीएसटी के द्वारा पहली बार सामने आये डेटा के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में दी गयी जानकारी का विश्लेषण नहीं किया है.

वह पत्रकार लिखता है : “भारत से जो भी निर्यात होता है उसका 70 फीसदी हिस्सा पांच राज्यों से जाता है. तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और तेलंगाना. इसका मतलब है कि निर्यात में ग्रोथ रेट के बढ़ने का लाभ यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बंगाल जैसे राज्यों को नहीं मिलता है. सोलह राज्यों का निर्यात में मात्र 3 फीसदी हिस्सा है. लेकिन निर्यात बढ़ने की सबसे अधिक खुशी बिहार यूपी में ही मनाई जा सकती है. नहीं जानने के कितने सुखद परिणाम होते हैं.”

यह तो आपने सिर्फ जानकारी दी, कटाक्ष किया है. विश्लेषण कहां है?

चलिए मैं आपके लिए आर्थिक सर्वेक्षण में ही दी गई जानकारी के आधार पर विश्लेषण कर देता हूं.

सर्वेक्षण के जिस अध्याय में राज्यों से निर्यात की जानकारी दी गयी है, उसी अध्याय में यह भी लिखा है कि महाराष्ट्र, यूपी, तमिलनाडु और गुजरात में सबसे ज्यादा जीएसटी का रजिस्ट्रेशन हुआ है. वास्तव में, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में जीएसटी पंजीकरण की संख्या में पुरानी कर व्यवस्था की तुलना में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है.

इसी अध्याय में आगे लिखा है किे शीर्ष राज्यों का जीएसटी में क्या शेयर है. आपको सुनकर आश्चर्य होगा कि शीर्ष पर स्थित पांच राज्यों में क्रमशः महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और गुजरात है.

क्या कहा? आंखें मिचमिचा के एक बार फिर से पढ़िए.

जीएसटी के बेस और रजिस्ट्रेशन के मामले में पिछड़ा उत्तर प्रदेश, विकसित गुजरात से आगे है. अगर ऐसा है तो क्या कारण है कि उत्तर प्रदेश निर्यात में इन सभी राज्यों से पीछे हैं?

मैंने 21 दिसंबर 2016 को लिखा था कि “भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, logistics (बिजली, परिवहन, पानी इत्यादि) पर विकसित देशों से 3 से 4 गुना ज्यादा खर्च उठाता है, जिससे कि उन्हें विदेशों से प्रतिस्पर्धा में नुकसान होता है.

उदहारण के लिए, भारत में सड़क यातायात का 60 प्रतिशत भाग माल ढुलाई (freight ट्रैफिक) का होता है. लेकिन, हमारी सड़कों पर एक ट्रक की औसत गति सिर्फ 20-40 किमी प्रति घंटा होती है और ट्रके प्रति दिन औसतन 250-300 किमी की यात्रा कर पाती है, जबकि ब्राजील में 450 किमी और अमेरिका में 800 किमी का औसत है.

माल ढुलाई में देरी का कारण हर राज्य की अपनी सीमा शुल्क की समस्याएं और देरी हैं. 60 प्रतिशत समय तो ट्रक चलता ही नहीं है. कुल यात्रा का लगभग 15-20 प्रतिशत समय भोजन और विश्राम, टोल प्लाजा पर प्रतीक्षा लगभग 15 प्रतिशत; और यात्रा का लगभग एक चौथाई समय चेक पोस्ट – राज्य की सीमाओं के 650 पोस्ट, शहर के प्रवेश द्वार – पर इंतज़ार में गुज़र जाता है.

कंपनियों को यह नहीं पता होता कि उनके ट्रक कितनी देर तक सड़क पर रहेंगे, माल कब डिलीवर होगा. इससे ट्रक (जो कि एक पूँजी है) का कम उपयोग हो पता है, उसमें माल पड़ा रहता है, जिसका पैसा उद्यमियों को डिलीवरी के बाद मिलेगा. जिन कारखानों को माल चाहिए, उनका माल ट्रक में इंतज़ार कर रहा है, इसके अलावा काफी माल गोदाम में भी होता है, किसी इमरजेंसी के लिए. इन सबमें काफी पूंजी फंस जाती है.”

उत्तर प्रदेश से निर्यात इसलिए कम होता है क्योंकि अगर कोई उद्यमी उत्तर प्रदेश में मैनुफैक्चरिंग करता है तो उसे उत्पाद को निर्यात करने के लिए ट्रक द्वारा माल 2000 किलोमीटर दूर बंदरगाह में भेजना होगा.

कई राज्यों में घुसने के पहले ट्रक को इंतजार करना पड़ता था, चुंगी और घूस देना पड़ता था, जो उस माल की लागत में जुड़ जाता था और इसके कारण माल समुद्र किनारे स्थित राज्यों में बने माल से कंपटीशन नहीं कर पाता था.

जीएसटी से यह गोरखधंधा बंद हो गया है. जीएसटी के बाद अब ट्रक औसतन GST से पहले की तुलना में एक दिन में 150 किलोमीटर की यात्रा अधिक कर रहे हैं और उस यात्रा पर उन्हें चुंगी भी नहीं देनी पड़ती, ना ही राज्य सीमा पर इंतजार करना पड़ता है.

यह सिद्ध करता है कि उत्तर प्रदेश या बिहार जैसे राज्य इसलिए नहीं पिछड़े हैं कि वहां के नागरिकों में उद्यमशीलता नहीं है, मेहनत करने की क्षमता नहीं है. यह राज्य इसलिए पिछड़े हैं क्योकि उन्हें जानबूझकर पिछड़ा रखा गया है. ऐसे नियम बनाए गए थे कि वह सिर्फ एक वोट बैंक बनकर रह जाएं, सरकारी नौकरी के पीछे भागें और अपनी आर्थिक प्रगति के लिए किसी “माई-बाप” या राजकुमार या नेता जी या बहिन जी या चारा चोर की तरफ देखे.

जीएसटी के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में तेजी से प्रगति होने की संभावना है जिसका परिणाम आपको कुछ ही समय में ही दिखाई देना शुरू हो जाएगा.

उस पत्रकार को यह प्रश्न पूछना चाहिए था – आखिर जो राज्य जीएसटी रजिस्ट्रेशन और टैक्स बेस में आगे हैं, वह आर्थिक प्रगति में कैसे पिछड़ा रह सकता है?

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