जवाब ज़रूरी है : भाग-1 : राम मन्दिर

मेरे कल के लेख ऐसा पहली बार नहीं हो रहा पर कुछ महावीर हिन्दूवादियों/ राष्ट्रवादियों ने तीखा जवाब लिखा कि… देश भर में सड़कें बनाने के लिए नहीं बल्कि अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए, कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए तथा देश में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए केन्द्र में मोदी सरकार बनवाई गई थी.

इन तीनों मुद्दों/ सवालों का जवाब देना ज़रूरी है. चूंकि एक ही लेख में दिया गया जवाब लम्बा हो जाएगा इसलिए जवाब तीन किस्तों में लिखूंगा. एक लेख में एक जवाब…

सबसे पहले राम मन्दिर की बात…

लगभग साढ़े 4 सौ सालों तक हिन्दुओं की आस्था श्रद्धा की छाती पर ताण्डव करता रहा अयोध्या स्थित बाबरी ढांचा जब यूपी में पहली बार बनी पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार के शासनकाल में ढहा, तो इसकी कीमत भाजपा ने 4 प्रदेशों यूपी, मप्र, राजस्थान, हिमांचल प्रदेश की अपनी पूर्ण बहुमत की सरकारों की तत्काल बर्खास्तगी से चुकायी.

अपनी यूपी की सरकार समेत शेष तीन राज्यों की सरकारों को बचाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह गोली चलवा कर भाजपा की चारों सरकारें बचा सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया. और सरकार गिरने पर मातम करने के बजाय इस पर हमेशा गर्व ही करते रहे.

लेकिन इसका जवाब भाजपा को क्या मिला था?

जिन 4 प्रदेशों की सरकारों को बर्खास्त किया गया था उन चारों प्रदेश में साल भर बाद जब दोबारा चुनाव हुए तो उन चार में से तीन राज्यों यूपी, मप्र, हिमांचल में भाजपा चुनाव हार गई थी.

यूपी में मुलायम सिंह, मप्र में दिग्विजय सिंह और हिमांचल में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री बने थे.

चौथे राज्य राजस्थान में भी भाजपा को बहुमत नहीं मिला था. बहुत जोड़ तोड़ कर के वहां किसी तरह भाजपा की सरकार बनी थी.

इतने कड़वे राजनीतिक घूंट को पीने तथा इतना कठोर राजनीतिक सबक मिलने के बावजूद भाजपा देश में अकेली ऐसी पार्टी है जो सार्वजनिक रूप से कहती है, अपने चुनावी घोषणापत्र में भी अपनी इस मंशा को ऐलानिया प्रकट करती है कि अयोध्या में केवल राम मन्दिर ही बनना चाहिए.

पुरातत्व विभाग की खुदाई, उससे मिले अवशेषीय साक्ष्य, उनके सहारे लड़ी गयी अयोध्या में राम मन्दिर की कानूनी लड़ाई अगर उच्च न्यायलय में जीती जा चुकी है और आज सुप्रीम कोर्ट में जीत की चौखट पर जाकर खड़ी हो चुकी है तो उसका शत प्रतिशत श्रेय सिर्फ और सिर्फ भाजपा को ही है.

यह सर्वज्ञात है कि न्यायालय में रामलला के वकील केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद हैं. बाबरी एक्शन कमेटी, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की वकालत कांग्रेस का कपिल सिब्बल करता है.

अतः अंत में इतना ही कहूंगा कि भाजपा एक राजनीतिक दल है किन्तु साढ़े चार सौ साल पुराने गुलामी के ढांचे को ढहाने वाले कल्याण सिंह के बजाय उस ढांचे को बचाने के लिए गोली चलवाकर लाशें बिछवा देने वाले मुलायम को मुख्यमंत्री चुने जाने का कठोर सबक भाजपा सीख चुकी है. इसलिए किस राजनीतिक दांव-पेंच का प्रयोग कब करना है यह उसे ही तय करने दीजिए.

अगले लेख में बात धारा 370 की.

क्रमश:…

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