क्या होता अगर कुछ महीने और जी जाते गांधी!

30 जनवरी 1948

क्या होता अगर नाथूराम गोडसे गांधी को न मार पाते?

अगर पिस्तौल न चल पाती?

अगर गांधी को कुछ महीने और जीने का मौका मिल गया होता?

1. गांधी कुछ ही दिनों बाद पाकिस्तान जाकर भारत सरकार व पाकिस्तान सरकार के बीच होते एक अनोखे समझौते के मुख्य गवाह होते.

इस समझौते के अनुसार पूर्वी पाकिस्तान से पश्चिमी पाकिस्तान को जोड़ने वाला 10 किमी चौड़ा एक गलियारा भारत के बीच से गुजरता, पर पाकिस्तान की मिल्कियत होता.

इस समझौते के खिलाफ नेहरू – पटेल आदि सभी थे, लेकिन गांधी इसको भारत पाकिस्तान की ‘मित्रता’ के लिए बहुत जरुरी मानते थे.

यह समझौता फरवरी के दूसरे सप्ताह में होना तय था, इसीलिए गांधी 6-7 फरवरी को पाकिस्तान जाने वाले थे.

2. तब भारत दो टुकड़ों में बंटा होता, उत्तरी भारत (जिसमें लगभग सभी हिमालयी प्रदेश तो होते ही, साथ ही यूपी व बिहार का भी बड़ा हिस्सा होता), और दक्षिणी भारत (पाकिस्तान के उस गलियारे से नीचे का भारत).

3. सुरक्षा की चिन्ता में जल्द ही भारत की राजधानी मुम्बई को घोषित कर दिया जाता. दिल्ली एक बूढ़ा शहर भर होता.

4. पाकिस्तान अपने ‘गलियारे’ में हमेशा अपनी फौज, अपनी मिसाइलें तैनात रखता. जिनका उपयोग अक्सर भारत के खिलाफ होता रहता.

5. चीन 1962 में भारत पर आक्रमण करता तो पाकिस्तान मौके का फायदा उठाकर ‘उत्तरी’ भारत पर आक्रमण कर उस पर कब्जा कर लेता, और उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू कश्मीर पूरी तरह से पाकिस्तान कर कब्जे में होते.

6. 1971 में बांग्लादेश नाम का नया देश नहीं बनता.

7. और आज 2018 में ‘एक बहुत बड़ा’ पाकिस्तान ‘एक छोटे’ भारत के बराबर का देश होता, जिसकी ताकत व क्रूरता से भारत हमेशा परेशान रहता.

8. उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड जैसे प्रदेशों में रहने वाले हिन्दुओं की ज़िन्दगी उतनी ही बदतर होती, जितनी आज के पाकिस्तान के हिन्दुओं की है.

और भी बहुत कुछ ऐसा होता जो मैं नहीं सोच पा रहा, पर आप लोग सोच समझ सकते हैं.

और इसीलिए, हे महान आत्मा नाथूराम गोडसे जी, आपको बहुत बहुत धन्यवाद कि आपने पचासों करोड़ हिन्दुओं की ज़िन्दगी को नर्क बनने से बचा लिया.

आपका यह अहसान यह देश और इस देश के निवासी कभी नहीं चुका सकेंगे. नाथूराम गोडसे अमर रहें.

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