अब हम अपना फूला पेट लेकर कहाँ जायें!

देखिये ग़लती तो सरासर आपकी ही है, आप अपना या किसी और का कोई राज बताकर हमसे यह उम्मीद करते है कि वो हम अपने तक रखें, क्यों रखे भाई? खामख्वाह! भैया आप तो अपनी क़सम देकर, हम से कह सुन कर हल्के हो लिये, अब हम अपना फूला पेट लेकर कहाँ जायें!

अब ज़रूरत क्या थी हमें यह बताने की कि आप रात पीकर कही गिर गिरा पड़े थे, आपके बॉस ने मोटा माल बनाने के चक्कर में कौन सी फ़ाईल काली पीली कर दी है, या बड़ी नाक वाले गुप्ताजी की बेटी का शर्माजी के बेरोज़गार लड़के से नैन मटक्का चल रहा है, श्रीवास्तव की बीबी ने उसे रात घर मे घुसने नहीं दिया था तो अपने तक रखते ये बात, हमें बता कर धर्मसंकट में डालने की ज़रूरत क्या थी आपको!

अब आप ऐसी ही कुछ रहस्य टाईप की बातें हमें चेंप जाये और हम उसे लिये लिये घूमें, यह तो हम जैसे शरीफ़ों पर अत्याचार ही है. पेट गुड़गुड़ाने लगता है, साँस ऊपर नीचे होने लगती है, मन किसी भरोसेमंद आदमी को ढूँढने के उकसाता है ताकि उसे पूरी कथा नमक मिर्ची लगा कर सुनाई जा सके. भरोसेमंद ना सही आदमी ही मिल जाये, चैन तब ही आता है जब वो राज की बात, अपने जैसे ही किसी के कान में, क़सम देकर फूँक दी जाये!

किसी के बारे में कुछ ऐसा वैसा सुन कर उसमें अपनी तरफ से तड़का ना लगा पायें, और ऐसा वैसा, सनसनीखेज ना बना पायें तो हमारे कुछ सुनने, बताने का मतलब ही क्या रह जायेगा!

कुछ बताने लायक हो आपके पास तभी तो लोग पूछते हैं हमें! अब ये तो सरासर गलत बात है कि आप खुद तो पूछताछ के लायक बने रहना चाहते है तो हमसे गुमनाम रहने की उम्मीद करते हैं!

और हम बता ही दें किसी को तो क्या फ़र्क़ पड़ता है! आप भी तो बता ही गये थे ना हमें, खुद चलकर आये थे आप बताने, हमने कोई निमंत्रण नहीं दिया था आपको, रही बात क़सम की तो उसकी चिंता करने में भी कुछ नहीं धरा, शुगर, बीपी से मरे तो मरे क़सम टाईप की टुच्ची चीज़ से तो किसी को मरते कभी देखा नहीं हमने!

तो भैया, हमारे भरोसे ना रहना, हमसे सहन होगी नहीं ये और हम आपके हवाले से किसी तीसरे को बता ही बैठेंगे, इसलिये हमें कुछ बताना तो अपनी रिस्क पर ही बताना, और यह तो कहना ही मत कि पहले बताया नहीं था!

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