म से माँ का सफ़र, म से मरीचिका से लेकर म से मीरा बनने तक के सफ़र का नाम

बहुत चाहा मैंने सोशल मीडिया जैसे प्लेटफोर्म पर अपने इश्क का इज़हार करना ठीक नहीं लेकिन मैं इज़हार करूं न करूं वो तो खुद ही जा जाकर सबको मेरे बारे में बताता फिरता है…
मुझे एक रहस्यमयी रमणी बनानेवाले का दिया हुआ नाम ही सारे राज़ खोल देता है…

लोग अक्सर पूछते हैं ये नाम के आगे माँ क्यों लगाया है?
और ये जीवन???
शैफाली जैसे सुन्दर सरल नाम के आगे माँ जीवन लगाने का तात्पर्य ????

किस किस से छुपाती और कब तक छुपाती एक न एक दिन तो अपने प्यार का इज़हार करना ही था…

सो आज मैं कहती हूँ उस शख्स का नाम जिसने मुझे पूरी तरह से बदल दिया… दूसरे अर्थों में जो मैं हूँ वो मुझे होने देने के लिए पर्याप्त वातावरण दिया… वो नाम है राजेन्द्र चन्द्रमोहन समैया… जिसे मैं प्यार से राजन कहती हूँ … 11 दिसम्बर को जन्मोत्सव, 21 मार्च को संबोधि दिवस और 19 जनवरी को जिसका मृत्यु उत्सव लोग मनाते हैं

और 14 अगस्त 2009 को मुझे अपनी बाहों में थामकर उसने कहा था… आज से तुम मेरा वो इश्क़ हुई जिसे लोग शैफाली नहीं “माँ जीवन शैफाली” के नाम से जानेंगे…

और तब से आज तक मैं दुनिया से यही कहती आई हूँ …. मैं इश्क़ हूँ दुनिया मुझसे चलती है…

उनके पास जीवन है, विज्ञान है, ताकत भी है
उनके पास जोश है, ज्ञान है, नफरत भी है
उनके पास प्यार है और परमात्मा भी है
उनके पास पानी है और आग भी है
उनके पास निर्जीव, सजीव दोनों दुनिया है
मेरे पास सिर्फ एक देह, एक आत्मा और कुछ संवेदनाएँ हैं

फिर भी वो नहीं जानते ये दुनिया कैसे चलती है
और मैं कहती हूँ मैं इश्क हूँ और दुनिया मुझसे चलती है…..

– राजन का इश्क़… इश्क़ का जादू … माँ जीवन शैफाली

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