बहुत बौने हैं हम, कुछ मुद्दों को इग्नोर करना भी नहीं जानते

प्रवीण तोगड़िया, विशेषत: हाल ही का प्रवीण तोगड़िया मामला सबकी जुबान पर है.

क्या हम में से किसी की इतनी औकात है कि हम प्रवीण तोगड़िया जी, नरेंद्र मोदी जी, अमित शाह जी, विश्व हिंदू परिषद, भाजपा, संघ पर कमेंट कर सकें?

क्योंकि ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी हिंदुत्व के लिए खपा दी.

आज इस विषय पर सभी उछल-कूद मचाए हुए हैं. सोशल मीडिया पटा पड़ा है.

मुझे बड़ा दुख होता है जिस प्रकार से घर की बात बाज़ार में उछाली जा रही है.

हमें यह समझना होगा कि किस विषय पर हमें प्रतिक्रिया देनी है और किस पर नहीं देनी है.

कौन सही और कौन गलत का निर्णय करने वाले हम कोई नहीं होते क्योंकि हमारा उतना कद नहीं है. इन सब के आगे हम बहुत बौने हैं.

हमें यह समझना चाहिए कि जिस विषय से हिंदुत्व को नुकसान हो रहा हो उस विषय को इग्नोर कर देना चाहिए, और उस पर किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए.

बहुत सारे लोग मुझसे भी प्रतिक्रिया चाह रहे हैं किंतु मेरी ओर से कोई प्रतिक्रिया न दी गई, ना आगे दी जाएगी.

यह विषय अपने आप में बहुत गंभीर है और उसका पटाक्षेप भी समय अपने हिसाब से करेगा.

तो तब तक इंतजार कीजिए मित्रों, और प्रवीण तोगड़िया जी या किसी भी अन्य व्यक्ति पर कमेंट करने से बचिए…

क्योंकि आज बेशक आपकी नज़र में यह गलत या सही हों लेकिन कल तक तो इन्होंने हिंदुत्व की भरपूर सेवा की ही है.

ना तो मैं तोगड़िया जी के पक्ष में हूं और ना विरोध में, बल्कि यूं कहूं कि तोगड़िया जी के पक्ष में भी हूं और विरोध में भी तो ज्यादा ठीक होगा.

पक्ष में इसलिए हूं क्योंकि वह हिंदुत्व के झंडाबदार रहे हैं और बुरा इसलिए लग रहा है क्योंकि हिंदुत्व की नींव के पत्थर ही आज हिंदुत्व की बनी बनाई इमारत को हिलाने पर आमदा हो गए हैं.

और ऐसे में कुछ चूहे उस बिल्डिंग की नींव में बिल बनाने का प्रयास कर रहे हैं. हमें इन चूहों से सावधान रहना है.

दुश्मन की चाल को समझने का प्रयास कीजिये और जो भी मुद्दे हिंदुत्व, हिंदूवादियों, राष्ट्रवादियों में आपस में फूट डालने वाले हों उन्हें इग्नोर करना सीखिए.

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