क्या उपभोक्ता की कोई वैल्यू नहीं है?

मेरे प्रश्न – हम भारतीय कम्पटीशन से इतना डरते क्यों है? – पर कई कमेंट आये.

इन विचारों का मैं स्वागत करता हूँ. सार्थक विचार-विमर्श से ही हम अपना मत बना सकते हैं कि राष्ट्र को किस दिशा में प्रगति करनी चाहिए.

विमर्श में व्यक्त विचारों से मेरी असहमति के कारण एक कमेंट में मुझसे पूछा गया कि मैं किस उद्यम से हूँ.

मेरे जवाब कि – “किसी भी उद्योग से नहीं. सिर्फ एक उपभोक्ता हूँ” – पर उन सज्जन ने एक व्यंगात्मक हुंकार भरी जिसका अनकहा सारांश यह था कि “हुर्रे इसीलिए आपको उद्योगों या व्यवसाय के बारे में कुछ भी नहीं पता.”

सहमत. मुझे उद्योगों या व्यवसाय के बारे में कुछ भी नहीं पता. सिर्फ कागज़ी ज्ञान है.

लेकिन मैंने यह भी लिखा था कि मैं एक उपभोक्ता हूँ. इस बात को वह सज्जन ही नहीं, बल्कि सभी मित्र जो यह मानते हैं कि सिंगल ब्रांड रिटेल में 100% FDI से भारतीय व्यापारियों को नुकसान होगा, उन सब ने मेरे एक उपभोक्ता के अस्तित्व को नज़रअंदाज़ कर दिया.

जैसे ग्राहक की कोई वैल्यू ही नहीं है.

इसी बिंदु पर वे सभी व्यवसायी FDI से लगने वाले या ऑनलाइन विक्रेता के लिए क्रिकेट की भाषा में विकेट छोड़कर बैटिंग शुरू कर देते है.

ऐसा नहीं है कि भारतीय दुकानों में ग्राहक सेवा में कमी है. दुकान में अगर कस्टमर घुस जाए, तो सेल्समैन कुछ ना कुछ बेच ही देता है. लेकिन मैं बात कर रहा हूँ कि आज के उपभोक्ता को क्या चाहिए और भविष्य में वह क्या और कैसे खरीदेगा?

यह एक ग्लोबल ट्रेंड है कि सभी देशो में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ रही है. लेकिन भारत में उद्यमी उस पर रोक लगाना चाहेंगे या फिर चाहेंगे कि उन पर टैक्स बढ़ा दिया जाए.

चलिए, आप टैक्स बढ़वा दीजिये. क्या तब भी आपको विश्वास है कि लोग ऑनलाइन शॉपिंग बंद कर देंगे?

जिस तरह से ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स (कर्मचारियों, सेवाओं, भण्डारण और बिक्री का जटिल मैनेजमेंट) के दाम गिर रहे हैं, क्या उससे कीमतें नहीं गिरेंगी?

जिस तरह से पति-पत्नी दोनों कार्य कर रहे है, आम मध्यम वर्ग के पास शॉपिंग के लिए समय नहीं है, क्या आपको लगता है कि उपभोक्ता ऑनलाइन शॉपिंग बंद या कम कर देगा?

क्या लोग एक-दूसरे के लिए प्रोडक्ट ऑनलाइन खरीदकर उपहार के रूप में नहीं भेजते है?

क्या व्यस्त महिला को सेल फ़ोन, कपड़े, किताबें, बर्तन इत्यादि ऑनलाइन खरीदने में सहूलियत नहीं है?

क्यों एक परिवार आपकी दुकान में आएगा, जब उसे कार पार्क करने के लिए प्रतीक्षा करनी होगी, हो सकता है कि पार्किंग चार्ज देना पड़े, गन्दगी के बीच में से आपकी दुकान तक पहुंचना पड़े.

फिर, आप स्वयं उस ऑनलाइन मार्केट को एक विक्रेता के रूप में क्यों नहीं जॉइन करने का प्रयास करते? आप नहीं करेंगे, क्योंकि GST फाइल करने के लिए भी आप तैयार नहीं हैं.

कुछ उदाहरण देता हूँ.

इवान स्पीगेल ने विश्वविद्यालय में पढ़ते समय यह नोट किया कि बातचीत करते समय आपके कहे का कोई रिकॉर्ड नहीं रहता. दूसरा यह कि किशोर एवं किशोरिया कुछ ही घंटे में कई सौ टेक्स्ट मैसेज भेज देते थे, फिर उसे डिलीट करने में समय लगते थे.

उसने सोचा कि क्यों न एक मैसेज का ऐप बनाया जाए जिसमें मैसेज पढ़ने के 10 सेकंड या उससे कम समय में स्वतः डिलीट हो जाए और उस एक विचार से स्नैपचैट कंपनी बना ली जो आज एक लाख करोड़ रुपये से अधिक कीमत की है.

जब मेरी पत्नी ने देखा कि हमारा किशोर पुत्र टेक्स्ट का जवाब नहीं देता या देर से देता है, और वह स्नैपचैट का प्रयोग कर रहा है तो उसने अपना भी स्नैपचैट का अकाउंट खोल लिया और दोनों की उसपर ‘चैट’ होती है (पुत्र एक अलग शहर में पढ़ रहा है).

एप्पल के चेयरमैन स्टीव जॉब्स प्रथम iPhone ले लांच होने के कुछ दिन पहले ऑफिस में आये और iPhone को सबके सामने जमीन पर फेंकते हुए बोले कि यह फोन वह बाज़ार में नहीं उतार सकते क्योंकि आम उपभोक्ता उसे जेब में रखेगा और जेब में रखी चाबी और सिक्कों के कारण उसकी स्क्रीन पर खरोंच आ जाएगी. ऐसे उत्पाद को कौन ग्राहक खरीदना चाहेगा.

तब उनकी कंपनी के लोगों को पता चला कि स्टीव उस फोन को अपनी जेब में रखकर घूमते थे. क्योंकि उनका अनुमान था कि आम उपभोक्ता कुछ समय तो iPhone की सुंदरता से प्रभावित रहेगा, फिर उसे एक आम उत्पाद के रुप में अपनी जेब में रख कर घूमेगा.

रातों-रात उस कंपनी ने एक ऐसी स्क्रीन को ढूंढ निकाला जिस पर खरोंच आसानी से नहीं आएगी और उसे 72 घंटे के अंदर चीन की फैक्ट्री में सारे iPhone पर बदलवाने का आदेश दे दिया.

क्या वास्तव में आपको लगता है कि अगर सिंगल ब्रांड रिटेल में 100% FDI ना आये तो आपका बिज़नेस जमा रहेगा?

क्या आज की कोई नवयुवती किसी ऐसे आईडिया को लेकर नहीं आ सकती, जिसे हमने और आपने ना सोचा हो और वह कुछ ही दिनों में आपके बिज़नेस को उलट-पलट दे?

चलिए FDI आप ने कांग्रेस को जितवा कर रुकवा दी, भले ही उसकी कीमत कहीं और आपके बच्चो को चुकानी पड़े. लेकिन क्या आप थ्री-डी प्रिंटर को भी रोक देंगे जो अगले पांच वर्षो में कॉमन हो जायेगा और जो कई वस्तुएं – जैसे कि कार के पुर्जे, बर्तन, खिलौने इत्यादि आपके घर में प्रिंट कर देगा या बना देगा?

क्या आपका ‘गूढ़’ अनुभव आपके उद्यम को अनाड़ियों – कल के छोकरे-छोकरियों – द्वारा लाये जा रही डिजिटल युग की आंधी से बचा देगा?

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