मैं तुम्हारी सबसे अश्लील कविता की अश्लीलता रहूँगी, सबसे झूठी कहानी का झूठ

क्या जीवन से ज़्यादा अश्लील भी कुछ होता है?
और मौत से ज़्यादा खूबसूरत?
और… और ये मौत और ज़िंदगी के बीच जो कुछ भी होता है
क्या इससे अधिक रहस्यमयी कुछ है?
और जिसे तुमने कभी नहीं देखा
उस परमात्मा से बड़ा सच कोई है?
और इन सब बातों का जवाब जानते हुए
अनजाना बने रहने वाला मुझसे बड़ा झूठा?

ना, कहीं कोई नहीं… कुछ नहीं
आरम्भ से अंत तक
प्रारब्ध से कर्म तक
एक माया, एक छाया
और उनकी ओर भागती हुई एक काया ….
बस….
इसके पार जिसने झांका
उसने साइनाइड तो खा लिया
लेकिन उसके स्वाद को कागज़ पर नहीं उतार पाया
और छोड़ गया कुछ सवाल

क्या जीवन से ज़्यादा अश्लील भी कुछ होता है?
और मौत से ज़्यादा खूबसूरत?
और मुझसे बड़ा झूठा???

लेकिन मैंने इश्क़ का सायनाइड खाकर जाना
ये जीवन मौत से अधिक बेशरम है

आओ मरने से पहले लिख दूं अपनी वसीयत

कि मैं तुम्हारी सबसे अश्लील कविता की अश्लीलता रहूँगी,
और सबसे झूठी कहानी का झूठ
मैं तुम्हारे श्रृंगार रस पर लिखे गीत का सिंगार रहूँगी
और टूटे हृदय से लिखे लेख की पीड़ा

सच तुम कभी लिख नहीं सकोगे
इसे अभिशाप समझ लेना मेरा
क्योंकि मेरे अधूरे छूटे जीवन का सच
जीने का तुम्हें वरदान है…

– माँ जीवन शैफाली

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