एक राजा की खामोश नर्मदा परिक्रमा

राजा को मिला साथ तो कहीं साक्षात हो गई माई

दिग्विजय की नर्मदा यात्रा के अलौकिक क्षण

पुरातन काल से नर्मदा के तट पर ऋषियों ने सत्य, धर्म और ब्रह्म की प्राप्ति के लिए घोर तप किया.

शिवपुत्री रेवा के पावन तीर पर कण-कण शंकर माना जाता है, हो भी क्यों ना, इसके पावन तट पर वैराग्य से सांसारिक जीवन में सभी वरों की प्राप्ति के लिए महान लोगों ने तप-साधना की.

पुण्य सलिला के पावन तट पर ऐसी ही एक परिक्रमा इन दिनों खासी चर्चा में है.

प्रदेश ही नहीं देश की राजनीति के सिरमौर दिग्विजय सिंह ने एक संकल्प उठाया, अपनी पत्नी के साथ उन्होंने पैदल मां रेवा की परिक्रमा शुरू की.

इस यात्रा के दौरान उनके अनुभव शब्दों में नहीं व्यक्त किए जा सकते. कई ऐसे क्षण भी आए जब वे भावुक हो गए, कई बार वे गहन चिंतन और मौन में भी चले गए…

ये मौन उन्हें ऊर्जा और दिव्य आलोक से सराबोर कर गया. मैंने इस यात्रा के दौरान जो अपनी आंखों से देखा, वो शब्दों में बयान कर पा रहा हूं, लेकिन जो महसूस किया, वो नि:शब्द है…

राजा की इस यात्रा के दौरान उन्होंने मुझसे गीता का संदेश साझा करते हुए कहा कि, भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है… तू मेरी तरफ एक कदम बढ़ा.. मैं खुद तेरी तरफ 10 कदम बढ़ा कर तुझे सहारा दूंगा…, तुझे संभाल लूंगा…

भक्ति योग को सबसे सरल और कारगर माना गया है… यदि कुछ नहीं कर सकते तो कम से कम ईश्वर का नाम जपो… परमात्मा की कृपा बरसेगी…

वो यहां तक कहते हैं… सच्चे हृदय से मेरी तरफ आने वाले को… मेरा स्मरण करने वाले को कोई नियम की भी जरूरत नहीं है…

यहां तो दिग्विजय सचमुच तप कर रहे हैं… “अनेक मुंह… अनेक बात… हर एक के अपने-अपने जज़्बात”. तमाम बयानों और कही-सुनी की परवाह किए बगैर दिग्विजय बढ़ते जा रहे हैं.

मैने देखा कि नर्मदा परिक्रमा के दौरान कुछ क्षण ऐसे भी आए जब दिग्विजय सिंह बेहद भावुक हो गए. 67 वर्ष की उम्र में लगभग 3600 किलोमीटर की यात्रा… निश्चित ही उनके आत्मबल और मां रेवा के प्रताप का करिश्मा है.

यात्रा के दौरान ऐसे भी वाकये हुए जब उनकी खुशी आंखों से छलक उठी, कई बार वे शांत भी हुए, लेकिन इसके बाद उनकी वाणी और व्यक्तित्व में जो ओज दिखा, वह उनके साथ चलने वाले ही बयान कर सकते हैं.

भाई से मिले हुए भावुक, पुत्र ने बढ़ाई ताकत

रिश्तों के प्रति दिग्विजय सिंह की संवेदनशीलता किसी से छिपी नहीं है, अपने परिवार के लिए सदैव सजग रहने वाले इस शख्स से परिक्रमा के दौरान जब मैने पूछा तो उन्होंने सहजता से कहा कि परिवार की चिंता यहां मुझे नहीं हो रही.

नर्मदा परिक्रमा के दिग्विजय का साथ देने पहुंचे उनके अनुज लक्ष्मण सिंह

यह पहली बार है, जब उन्होंने अपने परिवार की कमी को महसूस नहीं किया. शायद यह भी मां रेवा के प्रताप का करिश्मा है. जगत का पालन करने वाली पुण्य रेवा ने दिग्गी राजा को वो शक्ति भी प्रदान की.

राजा की इस यात्रा के दौरान उनके इस पुण्य अनुष्ठान में भागीदार बनने पग-पग पर शुभचिंतक और परिजन भी पहुचते हैं.

भाई लक्ष्मण सिंह भी उनसे मिलने का मौका नही चूकते हैं, जहां उन्हें देखकर दिग्विजय भावुक हो जाते है, वहीं पुत्र जयवर्धन जब उनसे मिलने पहुचते हैं तो उन्हें गले लगा लेते हैं…

पुत्र जयवर्धन सिंह को गले लगाते दिग्विजय

दोनों ही मौकों पर मैने राजा की आंखों में अजीब सी चमक देखी, पुत्र ने जहां उनकी ताकत बढ़ाई तो वहीं भाई लक्ष्मण सिंह ने भावनात्मक बल दिया.

काका और भतीजे दोनों की कोशिश रहती है कि परिक्रमा में दोनों में से कोई एक जरूर दिग्विजय के साथ रहे. हाल ही में राघोगढ़ में चुनाव के चलते समय कम दे पा रहे है, लेकिन परिक्रमा की जानकारी लेते रहते हैं.

राजनीति के पुरोधा की इस यात्रा पर सियासी हल्कों में चाहे जो भी कहा-सुनी हो रही हो, लेकिन जिस सत्य को मैने साक्षात देखा, वह यह है कि इस यात्रा से प्रदेश के सभी सरोकार सिद्ध होने जा रहे हैं. कभी प्रदेश के मुखिया रहे दिग्विजय को ऊर्जा से इतना सराबोर मैने कभी नहीं देखा.

परिक्रमा में बने पथिक

नर्मदा परिक्रमा कर रहे पथिक दिग्विजय और पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा के साथ अलग अलग स्थानों पर कई राजनीतिक और सामाजिक हस्तियॉं भी शरीक हुईं. इनमें फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा, मेघा पाटकर, शरद यादव, कमलनाथ ज्योतिरादित्य सिंधिया, नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया, विवेक तन्खा, अजीज कुरैशी, गोविंद सिंह के अलावा कई कांग्रेसी नेता शामिल हुए.

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