मृत्योर्मामृतम् गमय

अच्छा आपको संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या लगता है? भारत का? ताजमहल या बेबीलोनिया के झूलते बगीचे?

युधिष्ठिर ने यक्ष को कहा था कि रोज मरते हुए लोगों को देखकर भी और जीने की इच्छा रखना यही सबसे बड़ा आश्चर्य है.

आपको बीमार ना होना पड़े कितने जतन करते हैं, हाईजीन, दवाएं, साबुन, पेस्ट, कसरत, पौष्टिक भोजन आदि.

मरना न पड़े इसका क्या जतन कर रहे हैं?

भारत का एक बहुत बड़ा आश्चर्य कि अमरत्व की खोज, अमृत की खोज, मृत्यु से अभय की खोज हमारे यहाँ व्यक्तिगत नहीं साझी है. देवता भी इस खोज का हिस्सा हैं तो दानव भी.

है न आश्चर्य, एक पूरा महादेश निश्चित दिन तिथि नक्षत्र होरा पर एक साथ अमृत साधने का प्रयास करता है. जी हाँ, उस महान आश्चर्य का नाम है कुम्भ.

एक समय था
जब देवताओं की भी मृत्यु होती थी
और असुरों की भी,

गुजरते थे वे भी
जन्म और मरण के चक्र से

रहे होंगे औरों के विश्वासों में
देवता स्वभावतः अमर

इस देश में अमरता का
अर्जन करना पड़ता है.

समुद्र मंथन में अमृत निकला. देवता अमर हो गए. यह अमृत क्या था? क्या समुद्र में वैज्ञानिक रहते थे, जिन्होंने अमृत तैयार किया. क्या समुद्र मंथन कोई ऐसी वैज्ञानिक प्रक्रिया थी, जिसे आज हम ‘अमरता-2045’ कह सकते हैं. समुद्र में जेलीफिश ( टय़ूल्रीटोप्सिस न्यूट्रीकुला) पाई जाती है. यह तकनीकी दृष्टि से कभी नहीं मरती है. कोई अन्य जीव जैलीफिश का भक्षण कर ले तो अलग बात है. इसी कारण इसे इम्मोर्टल जेलीफिश भी कहा जाता है. जेलीफिश बुढ़ापे से बाल्यकाल की ओर लौटने की क्षमता रखती है. यही तो अमरता है. अगर वैज्ञानिक जेलीफिश के अमरता के रहस्य को सुलझ लें, तो मानव अमर हो सकता है. कहीं ऐसा तो नहीं है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी जेलीफिश से अमृत बनाया गया हो? अमरता के अनेक खतरे भी हैं.

इसी अमृत को अपात्रों के हाथ लगने से बचाने के लिए इसे क्रमशः चार जगहों पर छुपा के रखा गया.

क्रमवार उन चारों जगहों पर महाकुंभ उपस्थित होते हैं हर बारह वर्ष के अंतराल पर.

#देवानां द्वादशाहोभिर्मर्त्यै द्वार्दशवत्सरै:.
जायन्ते कुम्भपर्वाणि तथा द्वादश संख्यया:..

सूर्य, चंद्र और बृहस्पति देवासुर संग्राम के समय अमृत कुंभ की रक्षा करते रहे. इन तीनों का संयोग जब विशिष्ट राशि पर होता है, तब कुंभ योग आता है.

गंगाद्वारे प्रयागे च धारा गोदावरी तटे.
कलसाख्योहि योगोहयं प्रोच्यते शंकरादिभि:..

हरिद्वार में कुंभकाल : –

पद्मिनीनायके मेषे कुंभराशि गते गुरौ.
गंगाद्वारे भवेत् योग: कुंभनामा तदोत्तम:.

वसंते विषुवे चैव घटे देवपुरोहिते.
गंगाद्वारे च कुन्ताख्‍य: सुधामिति नरो यत:..

कुंभराशिगते जीवे यद्दिने मेषगेरवो.
हरिद्वारे कृतं स्नानं पुनरावृत्ति वर्ज्जनम्..

प्रयाग में कुंभकाल-

मेषराशिगते जीवे मकरे चन्द्रभास्करौ.
अमावस्या तदा योग: कुंभख्यस्तीर्थ नायके..

नासिक में कुंभकाल :

सिंहराशिगते सूर्ये सिहंराश्यां बृहस्पतौ.
गोदावर्यां भवेत कुम्भो जायते खुल मुक्तिद:..

कर्के गुरुस्तशा भानुश्चन्द्रश्चचन्द्रक्षयस्तथा.
गोदावर्यास्तदा कुम्भो जायतेवहनीमण्डले..

उज्जयिनी में कुंभकाल-

मेषराशिगते सूर्ये सिहंराश्यां वृहस्पतौ.
उज्जयिन्यां भवेत कुम्भ: सर्वसौख्य विवर्द्धन:..

घटे सूरि: शशिसूर्य: कुह्याम् दामोदरे यदा.
धारायाश्च तथा कुम्भो जायते खुल मुक्तिद:..

अनादिकाल से इस कुंभयोग को आर्यों ने सर्वश्रेष्ठ साक्षात मुक्तिपद की संज्ञा दी है.

‘अमरत्व’ की खोज के लिए गूगल के सहसंस्थापक सर्जेइ ब्रिन, अमेरिकी अरबपति टोनी कोरे, रूस के इंटरनेट उद्योगपति दिमित्री इत्जकोव और पेपॉल के संस्थापक पीटर थेल ने वैज्ञानिक शोधों के लिए अपनी तिजोरियां खोल दी हैं. इन खरबपतियों को विश्वास है कि विज्ञान की मदद से वे 500 साल तक जीवित रह सकते हैं.

गूगल की जीवन लंबा करने वाली गोपनीय अनुसंधान शाखा ‘कैलिफोर्निया लाइफ कंपनी’ में सिंथिया केन्यन जैसी जानी-मानी वैज्ञानिक शोध कर रही हैं.

सिंथिया ने ऐसा गोलकृमि बनाया है, जो अपनी प्राकृतिक उम्र से 10 गुना ज्यादा जी सकता है. यह करिश्मा उन्होंने सिर्फ डैफ-2 नामक एक जीन को अप्रभावी बनाकर किया है. दिलचस्प बात यह है कि इस तरह का एक जीन इंसानों में भी मौजूद है और जिन इंसानों में यह सक्रिय नहीं होता, वे भी 100 साल से ज्यादा जीते देखे गए हैं. इस प्रेक्षण के आधार पर सिंथिया को उम्मीद है कि सदाबहार युवा जीवन की परिकल्पना जल्द सच हो सकती है.

अमेरिकी फ्यूचरिस्ट और गूगल के इंजीनियरिंग डाइरेक्टर रे कुर्जवील ने अपनी थ्योरी ‘लॉ ऑफ एक्सिलरेटिंग रिटर्न्स’ में दावा किया है कि नैनो टेक्नॉलजी और इंसान के शरीर के काम करने के तरीके की ज्यादा समझ हासिल करके इंसान अगले 20 वर्षों में अमर होने का फॉर्म्युला खोज निकालेगा.

कुर्जवील के अनुसार सन 2030-35 तक हम शरीर की दोबारा से प्रोग्रामिंग कर स्टोन-एज सॉफ्टवेयर तैयार कर लेंगे, ताकि उम्र को रोका जा सके और फिर पीछे ले जाया जा सके. नैनो टेक्नोलॉजी हमें अमर बना देगी. 20 साल के अंदर-अंदर हम इंसान के लगभग सभी अंगों को रिप्लेस करने की क्षमता पा लेंगे.

कुर्जवील का मानना है कि वर्चुअल होने का सपना भी तब पूरा हो जाएगा. बस आंखें बंद कर अपने ब्रेन के सिग्नल को शट डाउन करना होगा, और फिर हम जहां चाहे वहां जा सकेंगे. फिलहाल कुर्जवील का अमरता का दावा दूर की कौड़ी लग सकता है, लेकिन उनकी कल्पनाशीलता को नकारा नहीं जा सकता है. स्टेम सेल तकनीक से वैज्ञानिक जगत को बहुत ज्यादा उम्मीदें हैं. चिर यौवन की चाह और अमरत्व की खोज में स्टेम सेल तकनीक एक वरदान साबित हो सकती है.

स्टेम सेल की मदद से शरीर के अंग तैयार करने पर काफी शोध हो रहा है. कनाडा के अरबपति पीटर निगार्ड ने इस प्रयोग के लिए काफी आर्थिक मदद दी है. अब तक कई अंग तैयार भी किए जा चुके हैं और कई अन्य के लिए शोध जारी है.

70 साल के निगार्ड साल में चार बार अपनी स्टेम सेल का इंजेक्शन लेते हैं. उनका दावा है कि वे जवान होते जा रहे हैं. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर के रक्त को बदलकर भी उम्र लंबी की जा सकती है. चूहों पर इस तरह के प्रयोगों के दौरान उनकी क्षमता में वृद्धि के संकेत मिले हैं.

कैलिफोर्निया की स्टैनफर्ड युनिवर्सिटी में इस दिशा में शोध चल रहा है. वैज्ञानिक शरीर बेकार होने के बाद उसे पूरी तरह बदल देने या उसकी जगह उसका रोबोटिक वर्जन तैयार करने पर भी शोध कर रहे हैं. वहीं थ्री-डी प्रिंटर की मदद से भी एक के बाद एक अंगों का निर्माण जारी है.

रूस के अरबपति दिमित्री के निवेश से आधा इंसान – आधी मशीन प्रोजेक्ट शुरू हुआ है. इसमें मनुष्य के मस्तिष्क को रोबोट में डाल दिया जाएगा. रे कुर्जवील का अनुमान है कि 2030 तक उनकी कंपनी ऐसे नैनो रोबोट बना लेगी जो शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र के साथ मिलकर काम करेंगे और शरीर में किसी जीवाणु-विषाणु के पहुंचते ही उसे खत्म कर देंगे. इस तरह मनुष्य सेहतमंद रहेगा और उसकी उम्र लंबी हो जाएगी. चूहों पर इस तरह के प्रयोग सफल रहे हैं.

एक रहस्य यह कि पुनरावृत्ति न हो यही अमरता है और हमने सुना कि पुनरावृत्ति न हो इसका रास्ता पुनरावृत्तियों से होकर जाता है.

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