विषैला वामपंथ : लड़कियों के इमोशन, ओपिनियन मेकिंग का बहुत बड़ा टूल

आई हेट पॉलिटिक्स… यह लड़कियों का फेवरेट वाक्य है, या शायद “आई एम ऑन डायट” के बाद दूसरे नंबर पर…

पर उन्हें अक्सर पता नहीं होता कि वे कब पॉलिटिक्स पर बात करने लग गईं.

या कहें कि उनकी पॉलिटिकल समझ सामान्यतः इतनी कम होती है कि उन्हें यह भी समझ नहीं आता कि क्या पॉलिटिक्स है और क्या नहीं है…

उनकी गाड़ी का चक्का खिसक कर डोनाल्ड ट्रम्प की पटरी पर आ जाता है…

तो एक दिन ऐसी ही एक ‘आई-हेट-पॉलिटिक्स’ बाला को मैंने याद दिलाया कि डोनाल्ड ट्रम्प अब एक पेज थ्री पर्सनालिटी नहीं है, बल्कि एक राजनेता है… और डोनाल्ड ट्रम्प पर उसका ऑपिनियन एक पॉलिटिकल ओपिनियन है.

और यह भी कि वह एक देश का राष्ट्रपति है, जिसके आप नागरिक नहीं है, इसलिए आपका यह पॉलिटिकल ओपिनियन एक वेस्टेड ओपिनियन है…

क्योंकि आपके ओपिनियन के बावजूद उस देश ने, और अवश्य उस देश की महिलाओं की एक पर्याप्त संख्या ने भी उसे वोट किया है…

तो आपके डोनाल्ड ट्रम्प के बारे में विचार सिर्फ एक ‘ओपिनियन’ हैं, ‘स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट’ नहीं हैं…

कभी-कभी किसी को और ज्यादा खुजली-पत्ता छुआना हो तो यह एक वाक्य भी जोड़ देता हूँ… पता नहीं, अभी तक तो मुझे डोनाल्ड ट्रम्प के किसी काम में ऐसा कुछ पता नहीं चला जिससे उसके स्त्री-विरोधी होने का पता चले…

एक दिन तो सीमा-रेखा क्रॉस कर ली मैंने… कहा, पता नहीं लोग कैसे कहते हैं कि स्त्रियाँ ट्रम्प से घृणा करती हैं… उसने तीन तीन स्त्रियों से शादियाँ की हैं, और आज तक उसकी किसी बीवी ने उसके बारे में कुछ भी बुरा नहीं कहा…

ज्यादातर लोग तो एक बीबी, और उसका पॉजिटिव ओपिनियन मैनेज नहीं कर पाते… और उसकी सभी बीवीयाँ इतनी सुंदर हैं… लगता है सुंदर औरतें ट्रम्प से घृणा नहीं करतीं, सिर्फ बदसूरत औरतें करती हैं…

कहने की जरूरत नहीं है, उस लड़की से कट्टी हो रखी है… आजकल बातचीत बंद है…

वामपंथ लड़कियों के इमोशन को ओपिनियन मेकिंग का बहुत बड़ा टूल मानता है. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में इस टूल का खूब प्रयोग किया गया.

यूनिवर्सिटी कैंपस में एक स्लोगन चला था – Support Trump, Get Dumped… यानि आपने अगर ट्रम्प को सपोर्ट किया तो आपकी गर्ल फ्रेंड आपको डम्प कर देगी…

लड़कों पर यह दबाव था कि अगर ट्रम्प को समर्थन किया तो कभी लड़की नहीं मिलेगी… अब सोच लो, देश प्यारा है या सेक्स…

अगर आप किसी वामपंथी या लिबरल बाला से असहमत होते हैं तो यह सिर्फ एक भिन्न पॉलिटिकल ओपिनियन ही नहीं है… यह गलत ओपिनियन है. और बिना किसी तर्क या विवाद के सीधा गलत है…

और आप सिर्फ एक गलत ओपिनियन ही नहीं रखते… आप एक बुरे व्यक्ति हैं… आपके ओपिनियन बताते हैं कि आप एक दुष्ट, बुरे संस्कारों वाले, हीन और निकृष्ट व्यक्ति हैं.

मेरी कॉलेज के दिनों की एक मित्र, जिससे मेरी कभी कभी ठीक ठाक बातचीत हो जाया करती थी और जिसके लिए मेरे मन में काफी सम्मान है, ने एक दिन अपनी असहमति कुछ इन शब्दों में व्यक्त की – Rajeev, I am ashamed I have shared a classroom with you.

एक दूसरी क्लासमेट जिनसे यूँ भी दुआ सलाम कम ही थी, उसकी नाराज़गी इतनी बढ़ी कि अब हैप्पी बर्थडे बोलने पर जवाब भी नहीं देती…

“राजीव, यू आर सो स्वीट” से लेकर “राजीव, यू आर टेरीबल” का यह सफर अभी तक मैंने 7 मिनट के रिकॉर्ड समय में तय किया है… एक ड्रिंक आर्डर करने से लेकर पोटैटो फ्राइज़ की एक प्लेट सर्व होने के बीच मैंने यह उपलब्धि हासिल कर ली है…

मेरे जेएनयू के कुछ मित्र बताते हैं, जेएनयू में पहुँचने वाले ज्यादा बिहारी गाँव के लड़कों के वामपंथी बनने के पीछे यह कहानी होती है. वहाँ पहुंचने के पहले उन्होंने किसी लड़की से कोई बात नहीं की होती है.

अब वहाँ मौजूद दिल्ली की मॉड, स्मार्ट, फ्रैंक लड़कियों से बात करने, साथ उठने बैठने को मिलता है तो ये लड़के बिल्कुल बह जाते हैं. अब वे ऐसी कोई बात बोलना तो दूर, सोचने की भी नहीं सोच सकते जो उन्हें नाराज़ कर दे.

लड़कियाँ खुद कहेंगी कि वे पॉलिटिक्स से घृणा करती हैं पर वे आपसे भी प्यार नहीं करेंगी अगर आप उनके पॉलिटिकल ओपिनियन से सहमत नहीं होते. और यह रिलक्टेंट ओपिनियन हमेशा वामपंथी होता है…

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