अल्लाह के फ़ज़ल से ये सारे दंद-फंद सीख चुके हैं अमित शाह और मोदी

मुझे 10 साल पुराना एक किस्सा याद आता है.

कैलाश नाथ यादव नाम के एक ठेकेदार ने टेलिकॉम की ठेकेदारी में बहुत मोटा पैसा कमाया.

जब वो पैसा कमा के लाल हो गया और जब रुपये पैसे की अहमियत और हवस कुछ कम हुई तो उसे सत्ता की भूख महसूस हुई. राजनीति में उतरने का भूत चढ़ा.

यूँ राजनीति में सफलता का रास्ता आम आदमी के लिए बहुत दुष्कर और बेहद लंबा है, पर यदि आप Lucky Sperm या Lucky Pussy हों या फिर धनपशु हों तो रास्ता बेहद आसान भी हो जाता है.

अब चूंकि कैलाश यादव ठहरे धनपशु. उन्होंने नोट सूटकेस में भरे और जा पहुंचे सीधे भैण जी के पास.

यूपी की राजनीति में बसपा ही एक ऐसी पार्टी है जिसमें आप किसी भी सीट पर विधायक का टिकट खरीद सकते हैं.

सो कैलाश जादो ने सैदपुर विधानसभा का टिकट 2 करोड़ में खरीद लिया. अभी चुनाव में पूरा डेढ़ साल बाकी था.

उन्होंने 3 – 4 नई स्कार्पियो निकलवाई और क्षेत्र में घूमने लगे.

यूपी में बसपा – सपा की राजनीति का सीधा सादा फंडा था. हमारा एक बंधुआ वोट बेस वोट है… अब तुम अपनी बिरादरी का कितना वोट उसमे जोड़ दोगे कि सीट निकल जाए.

ऐसे में कैलाश यादव के सामने चुनौती थी कि वो कितना यादव वोट तोड़ लेते हैं जो कि पारंपरिक रूप से नामाजवादी पार्टी का वोटर है…

सो कैलाश जादो ने स्कार्पियो पर बसपा का झंडा लगा के इलाके में घूमना शुरू किया और प्रत्येक यादव ग्राम प्रधान और पूर्व प्रधान को क्रमशः एक लाख और 50,000 रूपए की पहली किश्त भेंट कर दी.

पिछड़े, दरिद्र, भूखे-नंगे इलाके की खासियत ये होती है कि यहां दीन, धर्म, ईमान, आस्था, ज़मीर और आत्मसम्मान बहुत सस्ते में बिकता है.

सो सारे नहीं पर ज़्यादातर ग्राम प्रधान जी लोग बिक गए और कैलाश यादव के साथ घूमने लगे.

ऐसे ग्राम प्रधानों का एक ही काम था, अपने प्रभाव वाले वोटर को कैलाश यादव के पक्ष में गोलबंद करना.

ऐसे परिवारों को आम तौर पर वोटिंग से एक-दो दिन पहले 5 – 10,000 रूपए प्रति परिवार दे के वोट खरीदा जाता है.

सो इसी क्रम में कैलाश जादो क्षेत्र में घूम रहे थे और अहीरों को रुपया बांट रहे थे.

उनका काम करने का तरीका कुछ यूं था कि जिस गांव में पहुंचते, पहले एक चक्कर चमरौटी का लगाते और फिर अहिरानी में घूम-घूम के रुपया बांटते.

ऐसे में जब वो एक गांव की चमरौटी में पहुंचे तो वहां एक बेहद गरीब आदमी उनके पैर छूने आया…

ग्राम प्रधान ने बताया कि हुज़ूर बहुत गरीब आदमी है और इसकी पत्नी लंबे समय से बीमार है. इलाज चल रहा है. कुछ मदद कर देते तो जान बच जाती.

कैलाश यादव ने साफ मना कर दिया… बोले, नहीं… इनके हिस्से का पैसा मैं बहिन जी को दे चुका हूँ.

कैलाश यादव जानते थे कि हरिजन तो बसपा का बंधुआ वोटर है. वो कहां जाएगा? तो पैसा सिर्फ अहीरों को दिया गया.

चुनाव हुआ. भाजपा से मैदान में थे महेंद्र नाथ पांडेय, जिन्होंने पिछले 6 साल में सैदपुर में इतने विकास कार्य किये थे कि उन्हें गिनाया नही जा सकता. पूरे क्षेत्र का बच्चा बच्चा उन्हें विकास पुरुष के नाम से जानता था.

पर चुनाव में सभी विकास कार्य धरे के धरे रह गए और सैदपुर की जनता ने टेलिकॉम ठेकेदार कैलाश जादो से रुपये ले के उनको जिता दिया.

सबसे बड़ा दुर्भाग्य ये रहा कि विकास पुरुष महेंद्र नाथ पांडेय चौथे स्थान पर रहे. उधर कैलाश जादो रिकॉर्ड मतों से जीते.

बसपा की सरकार बनी.

भैण जी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली… उनके बाद कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वाला पहला व्यक्ति कौन था, जानते हैं???

कैलाश जादो…

रुपये के बल पर कैलाश जादो पहली ही बार में न सिर्फ विधायक बना बल्कि कैबिनेट मंत्री भी.

आज जब सब लोग नोटबन्दी और GST और GDP का रोना रोते हैं तो मैं इसका एक ही जवाब देता हूँ… अरे भाई, ई भारत देस हैं… इहाँ भोट इकास-बिकास, और GST / GDP पे नहीं, सिर्फ और सिर्फ जाति बिरादरी पे पड़ता है या फिर खरीदना पड़ता है.

अल्लाह के फ़ज़ल से अमित शाह और मोदी… ये सारे दंद फंद सीख चुके हैं.

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