तब क्यों नहीं जागी इन जजों की अंतरात्मा?

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों की अन्तरात्मा आज अचानक जाग गयी. जागी भी कुछ इस तरह कि मानो, दिसम्बर की कड़कड़ाती ठण्ड वाली रात को, नींद की गोली खाकर बेसुध सोए व्यक्ति पर आधी रात को बर्फ वाले पानी की भरी हुई बाल्टी उड़ेल कर उसे जगा दिया गया हो. और वो हड़बड़ा कर चीखता हुआ उठ बैठा हो.

जजों की अन्तरात्मा के इस जगने-जगाने का मामला माजरा क्या है? यह धीरे-धीरे उजागर हो ही जाएगा.

लेकिन भारत के ज्ञात इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डाली.

लेकिन मेरे लिए यह घटनाक्रम आश्चर्यचकित करने वाला नहीं है. बल्कि इस घटनाक्रम ने एक भारतीय के रूप में मुझे आहत, अपमानित और लज्जित किया है.

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आज अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चारों जजों ने चीफ जस्टिस के खिलाफ शिकायतों का जो पुलिन्दा प्रेस के सामने प्रस्तुत किया उसमें एकमात्र सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण शिकायत यह ही थी कि केसों का बंटवारा ठीक से नहीं किया जा रहा.

बड़े और महत्वपूर्ण केसों के बंटवारे में भेदभाव हो रहा है.

यह सुनते ही मन खिन्न हो गया. ग्लानि, खीझ, क्षोभ और कुंठा से भर उठा.

अभी तक राजनीति में नेताओं को इस बात पर लड़ते रूठते हुए तो देखा था कि मुझे महत्वपूर्ण विभाग का मंत्री नहीं बनाया गया.

यह हम सब जानते हैं कि महत्वपूर्ण से उस नेता का इशारा आम जनता की भाषा में “मलाईदार मंत्रालय” की तरफ होता है.

मलाईदार मंत्रालय का क्या अर्थ होता है.? यह सच किसी व्यक्ति से छुपा हुआ नहीं है, इसके मायने सब जानते हैं.

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के जजों की ही दृष्टि में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा कोई केस महत्वहीन या महत्वपूर्ण कैसे और क्यों हो जाता है?

अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है कि आज अचानक जागी अपनी अन्तरात्मा के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले 4 जजों का महत्वपूर्ण केसों से क्या तात्पर्य है?

मेरा उपरोक्त संकेत का मर्म मेरे इस एक सवाल से स्पष्ट हो जाएगा.

मेरा सवाल :

इन 4 जजों की अन्तरात्मा तब क्यों नहीं जागी जब 9 अगस्त 2016 को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने सुप्रीम कोर्ट में लम्बित अपने केस के लिए हो रही 80 करोड़ रुपये की सौदेबाजी के कारण आत्महत्या करने की बात अपने 60 पेज लम्बे सुसाइड नोट में लिखी थी?

यह एक सवाल जजों की अन्तरात्मा और आज उनके द्वारा उठाये गए तथाकथित महत्वपूर्ण केसों के बंटवारे की व्याख्या कर देता है.

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