तिरंगे का रंग ही देश का रंग है, जिसमें सबसे ऊपर है भगवा

“ना जाने क्या हो गया है इस देश को, कहाँ ग़ायब हो गयी यहां की गंग-जमुन की तहज़ीब…! बताओ भला ये कोई बात हुई कि तुम्हारा मोदी अब फ़ौज में भी भगवाकरण कर रहा है..!”

एक धर्म विशेष के अंकल जी ने ये बात कहते हुए मुझसे शिक़ायत की. उनका मानना है देश आज़ादी के बाद से अब तक के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है.

फासिज़्म के ख़िलाफ़ बोलते हुए अंकल एक अच्छे पढ़े लिखे व्यक्ति लग रहे थे लेकिन मैंने उन्हें कहा-

“आप अन्यथा ना लें अंकल जी, लेकिन धर्म-मज़हब के बावजूद कटे पिटे देश की सत्ता हासिल करने वाले नेहरू काल के दंगों, काँग्रेस राज के 70 सालों में हुये सैकड़ों कट्टर दंगों और ऑपेरशन ब्लू स्टार के दौरान और उसके बाद हुए देश के वास्तविक माइनॉरिटी के साथ हुए क़त्ल-ओ-ग़ारत के बजाए, अगर आपको देश के यशस्वी पंतप्रधान नरेन्द्र मोदी जी के इन 3-4 साल की सरकार के कार्यकाल को लोकतंत्र का सबसे बुरे दौर से गुजरना कहना सही लग रहा है तो ये अफ़सोस वाली बात है.”

बात असल मे ये थी कि जनाब ने हमें वो तस्वीरें दिखाईं जिसमें फ़ौजी भी उत्साह से हेलिकॉप्टर पर स्वस्तिक बनाकर पूजन में हिस्सा ले रहे हैं. अन्य तस्वीर में LMG और अन्य राइफल्स का भी शस्त्र पूजन चल रहा है.

एक फ़ोटो में बंकर में बैठा फ़ौजी जिस मशीन गन के साथ पोजीशन साधे तैनात है उस पर उन्हें कलावा बाँधा जाना ‘मोदी राज में भगवाकरण’ नज़र आ रहा है.

ज़नाब जिस ‘गंग-जमुन तहज़ीब’ के मुहावरे पे छाती कूट कर सेक्युलर राग अलाप रहे हैं उन्हें कौन बताये कि गंग का इशारा सनातन हिन्दू धर्म से है तो उस ‘जमन’ के किनारों का ज़िक्र भी सूर-मीरा-रसखान के आराध्य श्रीकृष्ण से ही जुड़ा रहा है.

साहब, आगरा और दिल्ली ये दोनों शहर मुग़लिया सल्तनत के मुख्य राजनैतिक केंद्र रहे हैं और दोनों ही यमुना के तीरे बसे शहर रहे हैं…

लेकिन इसका ये मतलब क्यों निकाल लिया सेक्यूलर विद्वानों ने कि ‘गंग-जमन’ का अर्थ हिन्दू-मुस्लिम एकता से है..! भारत वर्ष का हर शहर हर भारतीय का शहर है, यहाँ सातों रंग हमारे भारत वर्ष के हैं.

सदाशयता, सहिष्णुता, सहअस्तित्व और सद्भाव तो सनातन हिन्दू धर्म के मौलिक स्वभाव का हिस्सा रहा है, इसे किसी वामपंथी इतिहासकार या मुस्लिम दरबारी लेखक, शायर की रचनाओं से इन विषयों का पाठ ओढ़ने की कदापि आवश्यकता नहीं आई.

हमारी भारतीय फ़ौज की हर रेजिमेंट कहती है “भारत माता की जय”, यहाँ राजपुताना राइफल्स का जयघोष है “श्री रामचन्द्र जी की जय”, राजपूत रेजिमेंट का जयघोष है “बोलो बजरंगबली की जय”, पंजाब रेजिमेंट का उद्घोष है “बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” “ज्वाला माई की जय”, गोरखा रेजिमेंट का उद्घोष है “जी माँ काली, आयो गोरखाली”, जाट रेजिमेंट के योद्धा कहते हैं “जय बलवान, जय भगवान”, गढ़वाल राइफल्स का जयघोष है “बद्रीविशाल लाल की जय”, कुमाऊँ रेजिमेंट में कहा जाता है “कालिका माता की जय” “बजरंगबली की जय” “दादा किशन की जय”, बिहार रेजिमेंट के सैनिक कहते हैं “बजरंगबली की जय” और जी हाँ जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का जयघोष है “दुर्गा माता की जय”….

तो डिअर सेक्युलर मित्रों ये बताओ क्या 50-60-80 या 100 साल से भी पुराने इन रेजिमेंट्स में ये वार-क्राई बोले तो युद्ध के जयघोष का भगवाकरण 2014 में चुनी हुई मोदी सरकार ने किया है…??!!!

शर्मनाक है ये देखना कि 50-55 साल के पढ़े लिखे भारतीय भी शिकार हो रहे हैं मेन स्ट्रीम वामिस्लामिक मीडिया के दुष्चक्रों के.

शर्मनाक है इस देश में किसी भारतीय फ़ौजी के शस्त्र पूजन पर होने वाली आपत्ति को देखना.

शर्मनाक है इस देश के सुंदर समत्व दर्शन और सहिष्णु इतिहास के साक्षी रहे इस समाज में इन विघटनकारी तत्वों की सोच..!

ज़नाब, हर बात पर मोदी जी को घेरना बन्द करें… तिरंगे का रंग ही देश का रंग है और तिरंगे में सबसे ऊपर है भगवा..!!

जय भारत, जय भारती…

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