आनंद मरा नहीं… आनंद कभी मरते नहीं…

निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने ‘आनंद’ की कहानी राजकपूर के जिंदादिल स्वभाव से प्रेरित होकर लिखी थी. राज कपूर खुद इस फिल्म में आनंद का रोल करना चाहते थे लेकिन ऋषिकेश मुखर्जी ने मना कर दिया कि मैं अपने दोस्त को स्क्रीन पर मरते हुए नहीं देख सकता.

बाद में ये रोल राजेश खन्ना को मिला. जब ऋषिकेश मुखर्जी ने राजेश खन्ना को ये स्क्रिप्ट सुनाई तो अपनी रोमांटिक इमेज को दरकिनार कर काका ने काम करने के लिये हाँ कर दिया लेकिन दिक्कत एक और थी.

ऋषिकेश मुखर्जी ने काका से बोला कि ..देखो मेरी छोटे बजट की फिल्म है और तुम्हारी फीस 15 लाख है तो इतने पैसे तो मैं नही दे पाऊँगा. तब राजेश खन्ना ने बोला कि .. मुझे फीस के तौर पर मुम्बई एरिया के वितरण अधिकार दे दो. फायदा हुआ तो मेरा और नुकसान भी हुआ तो मेरा लेकिन ये फिल्म मैं ही करूँगा.

फिल्म बहुत बड़ी हिट थी .. उन्हें फायदा ही हुआ लेकिन राजेश खन्ना ने ये रोल फायदे के लिये नहीं सिर्फ इसलिये किया था कि वो ऋषिकेश मुखर्जी के साथ काम करने का मौका नहीं गँवाना चाहते थे. बाद में नमक हराम और बावर्ची जैसी क्लासिक फिल्में भी दोनों ने साथ में की.

ऐसे ही एक बार ‘दर्द’ फिल्म के गाने की रेकॉर्डिंग हो रही थी ..तब रेकॉर्डिंग स्टुडियो में प्रोड्यूसर, डायरेक्टर, गीतकार, लता मँगेशकर, किशोर कुमार, राजेश खन्ना सब पहुँच चुके थे. रिहर्सल भी पहले ही हो चुकी थी लेकिन एक घंटे से सभी संगीतकार ‘खय्याम साब’ का इंतजार कर रहे थे कि वो आये और रेकॉर्डिंग शुरू हो.

पूरे डेढ़ घँटे बाद वो पहुँचे. आने पर राजेश खन्ना ने बोल दिया .. बड़ी देर हो गई आपको आने में? जवाब मिला .. दो लोकल चेंज की .. फिर ऑटो पकड़ा .. तब पहुँचा हूँ. तीन घंटे बाद जब रेकॉर्डिंग खत्म होने पर खैय्याम साब बाहर निकले तो राजेश खन्ना ने उन्हें एक नयी कार की चाबी देते हुए कहा .. ‘ये आपकी गाड़ी की चाबी .. नीचे ड्रायवर आपका इंतजार कर रहा है. आपके जैसा गुणी आदमी अपना वक्त यूँ ही ट्रेन-ऑटो में जाया कर देगा तो हमें इतनी मीठी धुनें कहाँ से मिलेंगी?

फिल्म ‘हाथी मेरे साथी’ में कोई बड़ा हीरो काम करने को तैयार नहीं था. वजह थी कोई भी खतरनाक जानवरों के साथ काम करके अपनी जान जोखिम में नहीं डालना चाहता था. देव आनंद, धर्मेन्द्र ने भी मना कर दिया था .. तब राजेश खन्ना ने वो चेलेंज एक्सेप्ट किया. हाथी मेरे साथी राजेश खन्ना के करियर में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई. इस फिल्म के लिये उन्होनें मोटी फीस ली थी. उन्हीं पैसों से राजेश खन्ना ने राजेन्द्र कुमार से उनका बँगला खरीदा जिसे बाद में आशीर्वाद नाम दिया.

7-8 साल पहले BMC ने लगभग 4 करोड़ ‘हाउस टैक्स’ ना भरने की वजह से आशीर्वाद को अपने कब्जे में ले लिया था. तब राजेश खन्ना एक किराये के फ्लैट में शिफ्ट हो गये थे लेकिन अपनी बेटियों, बीवी या जमाई अक्षय कुमार से मदद नहीं ली .. जो दस सेकंड में ये रकम चुका सकते थे. तब राजेश खन्ना ने किसी निर्माता से काम माँगने भी नहीं गये.

उस समय जो C ग्रेड की फिल्में और टीवी सीरियल मिले.. उनमें काम किया और अपना बँगले में वापस आये. अपने आखरी दिनों में जो ad उन्होंने किया था वो भी अपनी बेटी ट्विंकल को गिफ्ट में एक महँगी गाड़ी देने के लिये किया था. सुपरस्टार मरते दम तक सुपरस्टार की तरह ही जीया.

हर आदमी में कई अच्छाई होती है तो कुछ बुराईयाँ भी होती है. जो नकारात्मक लोग होते है उन्हें सिर्फ बुराईयाँ ही दिखती है.

आनंद मरा नहीं… आनंद कभी मरते नहीं…

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