U Me AUR Hum : गाली भी दोगे तो गली न छोड़ेंगे ऐसे पड़ेंगे गले

पापा के घर में हम संयुक्त परिवार में 40 लोग एक साथ रहते थे. पापा के मुंह से कभी गाली नहीं सुनी लेकिन चाचा और घर के सारे बड़ों के मुंह पर तो माँ बहन की गालियाँ भी जैसे उनकी हर बात का श्रृंगार था जिसके बिना उनकी बात पूरी होती ही नहीं थी.

माँ गाली तो नहीं देती थी लेकिन मुझे हमेशा नखीत्री (खराब नक्षत्रों में पैदा होनेवाली), कारा माथानी (कलमुंही) ज़रूर कहती थी… नासमीटे और मसान में जा तो आसपास गूंजते रहते थे. बुआएं तो ऐसी गाली देती थी कि आज भी याद करके हंसती हूँ… पता नहीं उसका क्या अर्थ होता है ये सोचकर लिख नहीं रही…

और ये सब हमारे लिए इतना सामान्य था कि कभी गाली जैसा लगा ही नहीं. फिर भी हम बच्चे इस माहौल में भी कभी गाली नहीं सीखे. कुत्ता, कमीना, नालायक से कभी आगे नहीं बढ़े… हाँ आजकल कभी कभी किसी को बहुत जम के गाली देने का मन भी करता है… दे नहीं पाती ये अलग बात है…

लेकिन अपने जीवन में सबसे बड़ी गाली मैंने स्वामी ध्यान विनय के मुंह से पहली बार सुनी थी, जो अमृता प्रीतम की किसी पुस्तक में उन्होंने पढ़ी थी… “जा तुझे अपने मेहबूब का नाम भूल जाए”.

आज ‘यू मी और हम’ का यह गीत सुन रही थी तो ये सारी बातें याद आ गयी… पूरा गाना तो जो है सो है… लेकिन इस गीत की मुझे यह पंक्ति बहुत पसंद है… स्वामी ध्यान विनय की दी हुई गाली का जवाब देती हुई… “गाली भी दोगे तो गली ना छोड़ेंगे ऐसे पड़ेंगे गले”…

मेरे पसंदीदा गीतों की सूची में यह गीत सबसे ऊपर है क्योंकि यही मेरे जीवन का दर्शन भी है..

जिनको जिनको भी मिलना है लिखा
इश्क़ मिलवायेगा
जिनको जिनको भी मिलना है लिखा
इश्क़ मिलवाएगा

दूर दूर से ढूंढ ढूंढ के
पास ले आएगा
कहीं भी जाके छुपो
इश्क़ वहीँ आएगा
कितना भी ना ना करो
उठा के ले जायेगा
मानो या न मानो
यह सारी ही दुनिया
इसी के दम पे चले

जी ले जी ले जीले इश्क़ में
मरना है तो
आ मर भी ले इश्क़ में

जाते जाते हम इन पलों को भी
साथ ले जायेंगे
बातों बातों में जो बनी है वह
बात ले जायेंगे
ज़रा भुलक्कड़ है दिल
ये भूल जाये अगर
याद दिलाना हमें
यह पानियों का शहर

यह पल कल न हो
कभी खत्म न हो
वक़्त कहीं भी चले

जब साहिल में हम पहुंचेंगे तो किधर जायेंगे
अपने अपने घर जायेंगे या
अपने घर जायेंगे
इसी सफर से ही
नया सफर लेंगें हम
जहाँ भी बोलोगे तुम
वहीं उतर लेंगे हम
गाली भी दोगे तो
गली न छोड़ेंगे
ऐसे पड़ेंगे गले

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