एक लड़का जिसका नाम मोहब्बत, गुम है, गुम है

जानती हूँ
वो इतना भी ख़ूबसूरत नहीं था जितना कि मुझे लगता था
जब मैंने बताया अपनी एक दोस्त को
मुझे उस से प्यार है

तो बोली, उस में ऐसा क्या है कि प्यार में पड़ जाओ
अब उसके पास मेरी नज़र तो थी नहीं
मुझे तो उसकी हर बात प्यारी लगती थी
उसकी आँखें
जैसे कोई बच्चा खो गया हो मेले में
और ढूँढ रहा हो वो हाथ जो छूट गया

बड़ी बड़ी गहरी आँखें जिनमें पूरी डल लेक समा जाए
जब वो हँसता ठहाके लगा कर
उसकी आँखें ख़ामोश, उदास सी ही रहती
लोग उसकी हँसी में अपनी हँसी मिलाते

मैं उसकी आँखों में मुस्कुराहट ढूँढती
उसकी आवाज़, भारी भरकम, husky voice
सीधी सरल बात करता भी लगता भाषण दे रहा हो

जब वो बोलता कुछ
तो बहुत देर बाद तक भी वो हवाओं में सुनता रहता
मुझ से कम ही बात करता वो
मैं बस उसे दूसरों के साथ बात करते सुनती

बाल काले घने थे उसके
छोटे बच्चों के जैसे
ज़्यादा फ़िक्र नहीं करता था बालों की
जिधर मर्ज़ी गिरते रहते

होंठ यूँ जैसे चूमने के लिए ही बने हों
ऊपर वाले होंठ में हल्का सा वी बनता
नीचे का भरा पूरा

लँगड़ा कर चलता था
शायद कोई दुर्घटना हुई थी
उसका लंगड़ाना भी अच्छा लगता था मुझे

लंबा था, पतला छिरहरा बदन था उसका
लगता नहीं था इतनी भारी आवाज़ इस शरीर से निकल रही है

सब से बड़ी बात, बहुत ही ज्ञानवान था
लगता था कुछ भी पूछूँगी जानता होगा सब
पर पूछा नहीं कभी मैंने कुछ भी
उसने कभी कहा भी नहीं कुछ
सिवाए इस के
‘ हमेशा अपना ख़्याल रखना ‘

बताया नहीं
अपना ख़्याल कैसे रखते हैं
फिर एक दिन मेले में गुम हो गया वो
एक लड़का जिसका नाम मोहब्बत, गुम है, गुम है

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